बांदा में अयोध्यावासी वैश्य समाज ने OBC आरक्षण की मांग उठाई, डीएम के जरिए सीएम को भेजा ज्ञापन

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रिपोर्ट- पंकज त्रिपाठी

बांदा। अयोध्यावासी वैश्य समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सूची में शामिल किए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर बुधवार को अयोध्यावासी वैश्य समाज के लोगों ने बांदा जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार से लंबे समय से चली आ रही मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए आरक्षण का लाभ दिए जाने की मांग की।

प्रदर्शन का नेतृत्व अयोध्यावासी वैश्य आरक्षण अभियान समिति के अध्यक्ष अवधेश कुमार गुप्ता ‘खादी वाला’ ने किया। इस दौरान समाज के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई और कहा कि अयोध्यावासी वैश्य समाज के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को देखते हुए उसे राज्य की पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल किया जाना चाहिए।

OBC सूची में शामिल करने की मांग

ज्ञापन में समाज की ओर से कहा गया कि अयोध्यावासी वैश्य समाज को कई स्थानों पर अवध बनिया या कौशल के नाम से भी जाना जाता है। समिति का दावा है कि समाज की बड़ी आबादी आज भी आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही है। उनके अनुसार, करीब 85 प्रतिशत लोग रोज कमाने और खाने पर निर्भर हैं तथा बड़ी संख्या में परिवार रेहड़ी, ठेला और छोटे स्तर के कारोबार के जरिए अपना जीवन चला रहे हैं।

समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा, रोजगार और सरकारी सेवाओं में पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण समुदाय के सामने कई तरह की चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में OBC आरक्षण मिलने से समाज के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

30 वर्षों से मांग किए जाने का दावा

अयोध्यावासी वैश्य आरक्षण अभियान समिति के अनुसार, समाज को OBC सूची में शामिल करने की मांग पिछले करीब 30 वर्षों से उठाई जा रही है। समिति ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने 14 मार्च 2012 को अयोध्यावासी वैश्य समाज को राज्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल करने की संस्तुति की थी।

समिति का आरोप है कि आयोग की संस्तुति के बावजूद इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि आयोग की पूर्व संस्तुति पर दोबारा विचार किया जाए और उसे लागू किया जाए तो समाज को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार और शासन में भागीदारी के अधिक अवसर मिल सकते हैं।

हालांकि, आयोग की वर्ष 2012 की संस्तुति और उसके बाद की सरकारी कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के लिए उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों को समिति द्वारा ज्ञापन में रखी गई मांग के रूप में देखा जाना चाहिए।

समान वैश्य जातियों का दिया उदाहरण

प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में कुछ अन्य वैश्य समुदायों का भी उल्लेख किया। समिति की ओर से कहा गया कि कसौंधन, शिवहरे और मोदनवाल जैसी कुछ समान वैश्य जातियां पहले से OBC सूची में शामिल हैं। ऐसे में अयोध्यावासी वैश्य समाज को भी उसके सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर OBC सूची में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।

समाज के लोगों ने यह भी कहा कि बिहार में अवध बनिया समुदाय को आरक्षण का लाभ मिलने की बात सामने आती है। इसी आधार पर उन्होंने उत्तर प्रदेश में भी समुदाय की स्थिति का अध्ययन कर उचित निर्णय लेने की मांग सरकार से की।

रोजगार और शिक्षा में अवसर मिलने की उम्मीद

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि OBC आरक्षण का लाभ मिलने से समाज के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ भी समुदाय के पात्र लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंच सकेगा।

समिति ने कहा कि किसी भी समुदाय को आरक्षण दिए जाने का निर्णय उसके सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों तथा संबंधित आयोग की प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। इसी क्रम में अयोध्यावासी वैश्य समाज ने सरकार से समुदाय की वर्तमान सामाजिक और आर्थिक स्थिति का अध्ययन कराने की मांग भी उठाई।

जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

ज्ञापन सौंपने पहुंचे समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि अयोध्यावासी वैश्य समाज को राज्य OBC सूची में शामिल करने के संबंध में पूर्व में हुई प्रक्रिया और संस्तुतियों की समीक्षा की जाए। साथ ही, समुदाय की वर्तमान सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शन के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांग किसी के अधिकारों को प्रभावित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि समुदाय के लिए शिक्षा और रोजगार में अवसर सुनिश्चित करने की मांग के रूप में रखी जा रही है।

अंत में प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। अब समाज के प्रतिनिधियों की नजर सरकार की आगामी कार्रवाई पर है। समिति का कहना है कि जब तक उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग को संबंधित मंचों पर उठाते रहेंगे।

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