‘हनुमान अंश’ की सफलता से चर्चा में हनी बख्शी, नीम करोली बाबा के किरदार से जुड़ी रोचक कहानी

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक प्रभाव से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों अपनी सफलता को लेकर चर्चा में है। फिल्म में रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर हनी बख्शी ने नीम करोली बाबा का किरदार निभाया है। हालांकि उनका रोल कैमियो यानी सीमित अवधि के लिए है, लेकिन फिल्म की सफलता के साथ उनके इस किरदार की भी चर्चा हो रही है।

हनी बख्शी का सेना से जुड़ा करियर भी काफी चर्चित रहा है। वह भारतीय सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस से जुड़े रहे और बाद में टेक्निकल सपोर्ट डिवीजन (TSD) के प्रमुख बने। यह वही यूनिट थी, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। अपने सैन्य करियर के दौरान बख्शी को कई जांचों और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना भी करना पड़ा था।

‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा का किरदार

हनी बख्शी ने एक मीडिया रिपोर्ट में फिल्म में अपने किरदार के बारे में जानकारी साझा की है। उनके मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ की शुरुआत उस दौर से होती है, जब नीम करोली बाबा को उनकी आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त हो चुकी होती हैं। फिल्म में बाबा की मुलाकात डॉ. भोंसले से होती है, जिन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू के डॉक्टर के तौर पर बताया गया है।

बख्शी के अनुसार, फिल्म की शुरुआत के कुछ मिनटों में उनका किरदार डॉ. भोंसले से बातचीत करता है। इसके बाद कहानी फ्लैशबैक में आगे बढ़ती है और दर्शकों को नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़े प्रसंगों की ओर ले जाया जाता है।

हालांकि फिल्म में हनी बख्शी की भूमिका छोटी है, लेकिन नीम करोली बाबा के व्यक्तित्व से उनकी समानता को देखते हुए उन्हें इस किरदार के लिए चुना गया।

डायरेक्टर ने देखा बाबा जी से मिलता-जुलता चेहरा

हनी बख्शी के मुताबिक, उन्हें यह भूमिका किसी औपचारिक ऑडिशन के जरिए नहीं मिली थी। वह फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के पास एक स्क्रिप्ट लेकर गए थे और उस पर सलाह लेना चाहते थे। उस समय विशाल चतुर्वेदी फिल्म की योजना पर काम कर रहे थे।

बख्शी के अनुसार, निर्देशक ने उन्हें देखकर महसूस किया कि उनका चेहरा काफी हद तक नीम करोली बाबा से मिलता है। इसके बाद उन्होंने बख्शी को फिल्म में बाबा की भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया।

हालांकि, इस भूमिका के साथ एक शर्त भी रखी गई थी। बख्शी ने बताया कि फिल्म की रिलीज तक उन्हें नॉन-वेज भोजन और शराब से दूर रहना था। उन्होंने इस शर्त को स्वीकार किया और फिल्म का हिस्सा बने।

फिल्म की सफलता को बख्शी ने बताया चमत्कार

फिल्म की सफलता को लेकर हनी बख्शी ने अपनी प्रतिक्रिया भी साझा की। उनके मुताबिक, उन्हें पहले उम्मीद नहीं थी कि फिल्म इतनी बड़ी सफलता हासिल करेगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने फिल्म के प्रचार के लिए भंडारों का आयोजन किया और अपने परिचितों से फिल्म देखने की अपील भी की।

बख्शी का कहना है कि उन्हें लग रहा था कि फिल्म शायद दो सप्ताह में सिनेमाघरों से उतर जाएगी। हालांकि, इसके विपरीत फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और वह सफल साबित हुई।

उन्होंने फिल्म की सफलता को अपने लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया। उनके अनुसार, फिल्म के सफल होने के बाद सेना से जुड़े कई लोगों ने भी उन्हें फोन करके बधाई दी। बख्शी ने कहा कि जनरल से लेकर सिपाही तक, कई लोग उन्हें फिल्म की सफलता पर शुभकामनाएं दे रहे हैं।

सेना में मिलिट्री इंटेलिजेंस से जुड़े रहे बख्शी

हनी बख्शी की सैन्य पृष्ठभूमि भी इस कहानी का अहम हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 61 वर्षीय बख्शी को वर्ष 1988 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून में कैडेट रहते हुए मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) में कमीशन किया गया था।

उन्होंने वर्ष 2007 से 2010 तक कोलकाता में एक MI यूनिट की कमान संभाली। इसके बाद तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने उन्हें टेक्निकल सपोर्ट डिवीजन यानी TSD की जिम्मेदारी सौंपी।

यह यूनिट सेना की एक विशेष इकाई के रूप में काम करती थी। हालांकि, वर्ष 2012 में जनरल वीके सिंह के रिटायर होने के बाद TSD को लेकर कई जांच शुरू हुईं। इसी दौरान बख्शी का नाम भी विवादों में आया।

TSD को लेकर लगे थे कई आरोप

TSD से संबंधित जांच के दौरान यूनिट पर कई तरह के आरोप लगाए गए थे। इनमें राजनीतिक नेताओं के फोन टैप किए जाने के आरोप भी शामिल थे। हालांकि, इन आरोपों और जांच से जुड़े मामलों को उनके संदर्भ और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के साथ देखा जाना चाहिए।

इसके बाद हनी बख्शी को सैन्य न्यायिक प्रक्रिया का सामना भी करना पड़ा। वर्ष 2015 में उन्हें पंजाब के नाभा स्थित एक आर्मर्ड ब्रिगेड में कोर्ट मार्शल की कार्यवाही का सामना करने के लिए भेजा गया था।

बख्शी ने इस मामले में अपील की थी। उनकी ओर से यह तर्क दिया गया था कि उनके खिलाफ हुई कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में कानूनी कमियां थीं और बचाव के लिए जरूरी दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए थे। मार्च में उनकी अपील के बाद उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई थी।

अब वेब सीरीज की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद हनी बख्शी अब लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि वह अपना समय वेब सीरीज के लिए स्क्रिप्ट लिखने में बिताते हैं।

वहीं, ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा की भूमिका मिलने और फिल्म की सफलता ने उन्हें एक अलग पहचान भी दी है। सैन्य पृष्ठभूमि से आने वाले बख्शी के लिए फिल्मी दुनिया का यह अनुभव अलग रहा। फिल्म की सफलता के बाद उन्हें मिल रही प्रतिक्रियाओं से वह उत्साहित नजर आते हैं।

इस तरह, नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक व्यक्तित्व पर आधारित ‘हनुमान अंश’ ने जहां दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई है, वहीं फिल्म में बाबा का किरदार निभाने वाले हनी बख्शी की सैन्य पृष्ठभूमि और फिल्म से जुड़ने की कहानी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

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