बदायूं में फर्जी आधार कार्ड से जमीन हड़पने का आरोप, तत्कालीन तहसीलदार समेत 8 पर FIR
रिपोर्ट- विपिन यादव
बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के सहसवान थाना क्षेत्र में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि लावारिस और मृतक खातेदारों की जमीनों को फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए हड़पने की कोशिश की गई। इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार, नायब तहसीलदार और लेखपाल समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) बदायूं के आदेश के बाद की गई है।
पुलिस के अनुसार, ग्राम प्रधान ब्रह्मचारी की शिकायत के आधार पर थाना सहसवान में FIR दर्ज की गई है। मुकदमे में तत्कालीन तहसीलदार हरीश चंद्र, नायब तहसीलदार अनगराज और लेखपाल अछेलाल को नामजद किया गया है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है।
मृतक और लावारिस खातेदारों की जमीनों पर फर्जीवाड़े का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में ऐसी जमीनों को निशाना बनाया गया, जिनके खातेदार या तो मृतक थे अथवा जिनकी जमीनें लावारिस स्थिति में थीं। आरोप के मुताबिक, इन जमीनों के संबंध में कथित तौर पर फर्जी बैनामे तैयार किए गए और बाद में राजस्व अभिलेखों में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी कराई गई।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप फर्जी पहचान के इस्तेमाल को लेकर है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीनों के लेन-देन में फर्जी आधार कार्ड तथा अन्य कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए वास्तविक खातेदारों की पहचान और अधिकारों को प्रभावित करने की कथित कोशिश की गई।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगा। FIR में लगाए गए आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।
CJM के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
मामले में शिकायतकर्ता ग्राम प्रधान ब्रह्मचारी ने न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया। इसके बाद CJM बदायूं के आदेश पर थाना सहसवान पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। दर्ज FIR की संख्या 0493/2026 है और इसे 22 सितंबर 2026 को दर्ज किया गया।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। FIR में धारा 318(4), 336(3), 337, 338 और 340(2) लगाई गई हैं। इन धाराओं के तहत लगाए गए आरोपों का संबंध कथित धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने जैसी गतिविधियों से है।
तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में तत्कालीन तहसीलदार और अन्य राजस्व कर्मचारियों के नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जिन जमीनों के कथित फर्जी बैनामे और दाखिल-खारिज कराए गए, उनमें राजस्व विभाग के स्तर पर किस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
इसके लिए संबंधित राजस्व अभिलेखों, बैनामा दस्तावेजों, आधार कार्ड से जुड़े रिकॉर्ड और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया से संबंधित कागजात की जांच की जा रही है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि दस्तावेजों में दर्ज पहचान और संबंधित खातेदारों की वास्तविक स्थिति में कोई अंतर था या नहीं।
राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर रही पुलिस
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच टीम कथित जमीनों से संबंधित पुराने और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड को खंगाल रही है। इसके अलावा बैनामों और अन्य दस्तावेजों की प्रमाणिकता की भी जांच की जाएगी।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए आधार कार्ड वास्तविक थे या उनमें किसी प्रकार की हेराफेरी की गई थी। दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
फर्जीवाड़े की जांच में सामने आएंगे अन्य तथ्य
जमीन से जुड़े मामलों में दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित जमीनों का वास्तविक स्वामित्व किसके नाम था और कथित बैनामे किस आधार पर तैयार किए गए।
इसके अलावा दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों और पहचान संबंधी प्रमाणों की भी जांच होगी। यदि जांच में दस्तावेजों के फर्जी होने की पुष्टि होती है तो मामले में आरोपों से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।
फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नामजद आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस की कार्रवाई और दस्तावेजी जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
आठ लोगों पर मुकदमे से बढ़ी हलचल
तत्कालीन तहसीलदार, नायब तहसीलदार और लेखपाल समेत आठ लोगों पर FIR दर्ज होने के बाद सहसवान क्षेत्र में राजस्व मामलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासतौर पर मृतक और लावारिस खातेदारों की जमीनों के कथित फर्जी बैनामे तथा दाखिल-खारिज के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है।

