यूपी विधान परिषद चुनाव 2026: तीन जिलों को छोड़कर पूरे प्रदेश में आचार संहिता लागू, जानिए क्या बदला

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Digital UP News

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 को लेकर चुनावी प्रक्रिया तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने के बाद प्रदेश के अधिकांश जिलों में आदर्श आचार संहिता के प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। हालांकि, कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को इस दायरे से बाहर रखा गया है। यानी इन तीन जिलों को छोड़कर उत्तर प्रदेश के अन्य सभी जिलों में चुनाव आचार संहिता प्रभावी रहेगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी जानकारी के अनुसार विधान परिषद के खंड स्नातक की पांच और खंड शिक्षक की छह सीटों के लिए द्विवार्षिक निर्वाचन कराया जाना है। संबंधित निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव की पूरी समय-सारिणी जारी कर दी है।

23 अक्टूबर को होगा मतदान

चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक विधान परिषद द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के लिए 29 सितंबर 2026 को निर्वाचन की अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर निर्धारित की गई है।

वहीं, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 23 अक्टूबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। मतदान का समय सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना होगी और निर्वाचन प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी किए जाने का कार्यक्रम है।

11 विधान परिषद सीटों पर होगा चुनाव

इस द्विवार्षिक निर्वाचन में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के कुल 11 निर्वाचन क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें पांच खंड स्नातक और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र हैं।

खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। इसी तरह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र शामिल हैं।

इस प्रकार चुनाव कार्यक्रम के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां भी चुनावी प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ेंगी। हालांकि, आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण प्रशासनिक और सार्वजनिक गतिविधियों में निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा।

तीन जिलों में क्यों नहीं लागू हुई आचार संहिता?

चुनाव आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को विधान परिषद द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के संदर्भ में लागू आदर्श आचार संहिता के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य सभी जिलों में संबंधित प्रावधान लागू हैं।

इसका अर्थ यह है कि चुनाव से जुड़े जिन निर्वाचन क्षेत्रों और जिलों में आचार संहिता प्रभावी है, वहां प्रशासन, राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों को निर्धारित चुनावी नियमों के अनुसार कार्य करना होगा। चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और निर्धारित नियमों के पालन के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से जारी निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

26 दिसंबर 2016 के प्रावधानों के अनुसार लागू रहेगी आचार संहिता

मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक विधान परिषद द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के संदर्भ में लागू आदर्श आचार संहिता भारत निर्वाचन आयोग के 26 दिसंबर 2016 को जारी पत्र में दिए गए संबंधित प्रावधानों के अनुसार प्रभावी रहेगी।

आदर्श आचार संहिता का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया के दौरान संबंधित पक्षों के लिए निर्धारित आचरण और प्रशासनिक व्यवस्था को चुनाव नियमों के अनुरूप बनाए रखना है। निर्वाचन आयोग अपनी चुनाव प्रबंधन व्यवस्था के तहत आदर्श आचार संहिता से संबंधित दिशा-निर्देश और निगरानी तंत्र संचालित करता है। आयोग की वेबसाइट पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट से जुड़े निर्देश और चुनाव संबंधी संसाधन उपलब्ध हैं।

तबादलों और प्रशासनिक फैसलों पर भी चुनावी नियमों का असर

आचार संहिता लागू होने के बाद चुनाव वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक निर्णय भी निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किए जाते हैं। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण सहित ऐसे प्रशासनिक फैसले, जिनका चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है, संबंधित चुनावी नियमों और आयोग के निर्देशों के अधीन रहेंगे।

हालांकि, किसी भी तबादले को लेकर विशेष अनुमति या प्रक्रिया लागू होने की स्थिति संबंधित सरकारी आदेश और निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर निर्भर करेगी। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर जारी होने वाले अलग-अलग आदेशों को उनके मूल प्रावधानों के आधार पर देखना महत्वपूर्ण होगा।

चुनाव प्रक्रिया पर रहेगी निगरानी

विधान परिषद चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी। आयोग की चुनाव प्रबंधन व्यवस्था में आदर्श आचार संहिता के पालन, अनुमति प्रक्रिया, पर्यवेक्षण और शिकायतों से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल हैं।

इसके साथ ही राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और प्रशासनिक अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे चुनाव संबंधी निर्धारित नियमों का पालन करें। किसी भी शिकायत या आचार संहिता के उल्लंघन की स्थिति में निर्वाचन आयोग की निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में विधान परिषद द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से आगे बढ़ चुकी है। 29 सितंबर से नामांकन, 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना के साथ चुनाव प्रक्रिया निर्धारित चरणों में पूरी होगी। वहीं, कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में आदर्श आचार संहिता लागू रहने से प्रशासनिक और चुनावी गतिविधियां निर्धारित नियमों के तहत संचालित होंगी।