IMEI से छेड़छाड़ पर सख्ती, जानिए मोबाइल यूजर्स के लिए नियम और सुरक्षा उपाय

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रिपोर्ट- अमित सिंह यादव

नई दिल्ली। भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम के बीच मोबाइल डिवाइस की सुरक्षा और उनकी पहचान की विश्वसनीयता को लेकर सरकार ने जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है। दूरसंचार विभाग के अनुसार, जुलाई 2026 में देश में सक्रिय वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबरों की संख्या 1,204.01 मिलियन तक पहुंच गई। ऐसे में मोबाइल फोन और अन्य दूरसंचार उपकरणों की पहचान को सुरक्षित रखना डिजिटल सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

इसी कड़ी में IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबर के साथ छेड़छाड़ को गंभीर विषय माना गया है। सरकार के मुताबिक, IMEI में जानबूझकर बदलाव, उसे हटाना या मिटाना तथा ऐसे उपकरणों का निर्माण, इस्तेमाल, बिक्री या कब्जा रखना, जिनके IMEI से छेड़छाड़ की गई हो, कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।

क्या होता है IMEI नंबर?

IMEI मोबाइल डिवाइस की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला 15 अंकों का विशिष्ट नंबर है। यह मोबाइल नेटवर्क पर किसी डिवाइस की पहचान करने में मदद करता है। किसी फोन के IMEI के शुरुआती आठ अंक TAC यानी Type Allocation Code होते हैं, जो डिवाइस के मॉडल या प्रकार से जुड़े होते हैं।

TAC के वैश्विक आवंटन की निगरानी GSMA (Global System for Mobile Communications Association) करती है। इसके बाद निर्माता संबंधित डिवाइस को विशिष्ट IMEI नंबर प्रदान करते हैं। वहीं, डुअल-सिम मोबाइल फोन में आमतौर पर प्रत्येक सिम स्लॉट के लिए अलग IMEI नंबर होता है।

अपने मोबाइल का IMEI नंबर जानने के लिए यूजर फोन पर *#06# डायल कर सकता है। इसके अलावा, डिवाइस की जानकारी को संचार साथी प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी सत्यापित किया जा सकता है। यूजर 14422 पर KYM <15 अंकों का IMEI नंबर> लिखकर SMS के जरिए भी जानकारी प्राप्त कर सकता है।

IMEI से छेड़छाड़ क्यों गंभीर है?

दरअसल, मोबाइल नेटवर्क में डिवाइस की पहचान के लिए IMEI महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि किसी डिवाइस का IMEI बदला हुआ या गलत तरीके से कॉन्फिगर किया गया हो, तो नेटवर्क पर उसकी सही पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

इसके परिणामस्वरूप कानून लागू करने वाली एजेंसियों, उपभोक्ता सुरक्षा और दूरसंचार नेटवर्क की निगरानी से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसलिए सरकार ने मोबाइल डिवाइस के पूरे लाइफसाइकिल—निर्माण से लेकर बिक्री और इस्तेमाल तक—IMEI की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर दिया है।

निर्माताओं और आयातकों की भी जिम्मेदारी

सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, भारत में बनने वाले संबंधित दूरसंचार उपकरणों के IMEI नंबरों का निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण किया जाना जरूरी है। इसके लिए Device Setu–ICDR पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है।

वहीं, भारत में संबंधित दूरसंचार उपकरण आयात करने वाले आयातकों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत IMEI नंबर पंजीकृत कराने होते हैं। इसके अलावा, उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि आयात किए गए उपकरणों पर सही और अधिकृत IMEI नंबर मौजूद हों।

इसी तरह, ब्रांड मालिकों को अपने ब्रांड के तहत बाजार में आने वाले उपकरणों में वैध IMEI और आवश्यक साइबर सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर ध्यान देना होगा।

पुराने मोबाइल खरीदते समय रहें सावधान

पुराने मोबाइल फोन या अन्य संबंधित उपकरण खरीदने वाले उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस्तेमाल किए गए डिवाइस की खरीद से पहले उसके IMEI की जांच करना महत्वपूर्ण है।

सरकार के केंद्रीय डेटाबेस में छेड़छाड़ किए गए और ब्लैकलिस्टेड डिवाइस से संबंधित जानकारी उपलब्ध होती है। इसलिए उपभोक्ताओं को अधिकृत विक्रेताओं से ही मोबाइल खरीदने और IMEI की जानकारी का सत्यापन करने की सलाह दी गई है।

नागरिकों को किन गतिविधियों से बचना चाहिए?

दूरसंचार विभाग ने नागरिकों को ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल या खरीद-फरोख्त करने से बचने को कहा है, जिनका IMEI बदला या कॉन्फिगर किया जा सकता हो। इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों या किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके SIM कार्ड हासिल करना भी नियमों के विरुद्ध है।

अपने नाम पर जारी SIM कार्ड को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने या हस्तांतरित करने से भी बचना चाहिए। साथ ही, मोबाइल एप, वेबसाइट या किसी अन्य माध्यम से CLI (Calling Line Identity) अथवा अन्य दूरसंचार पहचानकर्ताओं में अनधिकृत बदलाव करने वाली गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

फोन चोरी या खोने पर क्या करें?

यदि मोबाइल फोन खो जाए या चोरी हो जाए, तो सबसे पहले स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कर उसकी प्रति सुरक्षित रखनी चाहिए। इसके बाद दूरसंचार ऑपरेटर से डुप्लीकेट SIM प्राप्त किया जा सकता है।

इसके बाद संचार साथी के CEIR पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए डिवाइस को ब्लॉक कराने का अनुरोध दर्ज किया जा सकता है। इसके लिए पुलिस रिपोर्ट और वैध पहचान प्रमाण की आवश्यकता हो सकती है।

यदि बाद में मोबाइल फोन वापस मिल जाता है, तो पहले स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए। इसके बाद संबंधित अनुरोध आईडी का इस्तेमाल करके डिवाइस को आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से अनब्लॉक कराया जा सकता है।

IMEI छेड़छाड़ पर क्या है कानूनी प्रावधान?

Telecommunications Act, 2023 में दूरसंचार पहचानकर्ताओं के साथ छेड़छाड़ और दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रावधान किए गए हैं। अधिनियम की धारा 42(3)(c) टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स के साथ छेड़छाड़ को प्रतिबंधित करती है। वहीं, धारा 42(3)(e) धोखाधड़ी, जालसाजी या किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करके SIM अथवा दूरसंचार पहचानकर्ता हासिल करने से संबंधित है।

नियमों के उल्लंघन पर तीन साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है। इसके अलावा अधिनियम की धारा 42(7) के तहत ऐसे अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हो सकते हैं। अपराध में मदद या उसे बढ़ावा देने वालों के लिए भी कानून में प्रावधान किए गए हैं।

डिजिटल सुरक्षा में सभी की भूमिका

भारत में डिजिटल सेवाओं का विस्तार लगातार हो रहा है। ऐसे में सुरक्षित मोबाइल डिवाइस और भरोसेमंद दूरसंचार नेटवर्क डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत हैं। इसलिए IMEI की सुरक्षा केवल सरकार या मोबाइल निर्माता की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं की भी इसमें अहम भूमिका है।

अंततः, मोबाइल खरीदते समय IMEI सत्यापित करना, अधिकृत विक्रेता से डिवाइस लेना और संदिग्ध उपकरणों से दूरी बनाए रखना डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकता है। जागरूक उपभोक्ता, जिम्मेदार उद्योग और प्रभावी कानूनी व्यवस्था मिलकर भारत के डिजिटल दूरसंचार इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में योगदान दे सकते हैं।