लखीमपुर खीरी के बेलरायां की सरजू सहकारी चीनी मिल को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट केन डेवलपमेंट अवॉर्ड

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रिपोर्ट- शरद अवस्थी

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बेलरायां क्षेत्र के लिए यह गौरव का अवसर है। सरजू सहकारी चीनी मिल लिमिटेड, बेलरायां ने गन्ना विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। मिल को वर्ष 2024-25 के लिए ‘बेस्ट केन डेवलपमेंट अवॉर्ड’ की ‘अन्य चीनी रिकवरी जोन’ श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला है। इस उपलब्धि से क्षेत्र के गन्ना किसानों, मिल प्रबंधन और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है।

यह सम्मान नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF), नई दिल्ली की ओर से प्रदान किया गया। 22 सितंबर 2026 को आयोजित सम्मान समारोह में सरजू सहकारी चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक राजेश कुमार ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के हाथों यह पुरस्कार प्राप्त किया। राष्ट्रीय मंच पर मिले इस सम्मान ने बेलरायां की सहकारी चीनी मिल और यहां के गन्ना किसानों के प्रयासों को नई पहचान दी है।

गन्ना विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन

सरजू सहकारी चीनी मिल की इस सफलता के पीछे गन्ना विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को अहम माना जा रहा है। मिल प्रबंधन के अनुसार किसानों के साथ निरंतर संवाद और समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ गन्ने की खेती को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। इसके परिणामस्वरूप गन्ना विकास के क्षेत्र में मिल ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया।

दरअसल, चीनी उद्योग में गन्ने की गुणवत्ता, उत्पादन और रिकवरी का सीधा संबंध किसानों तथा मिल की कार्यप्रणाली से होता है। इसलिए गन्ना विकास के लिए खेत स्तर पर किए जाने वाले प्रयास महत्वपूर्ण माने जाते हैं। बेलरायां की सरजू सहकारी चीनी मिल ने इसी दिशा में किसानों के साथ समन्वय को प्राथमिकता दी। साथ ही, तकनीकी दक्षता और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।

टेक्निकल एफिशिएंसी के लिए भी सम्मान

गन्ना विकास के पुरस्कार के साथ ही सरजू सहकारी चीनी मिल को टेक्निकल एफिशिएंसी के क्षेत्र में भी सम्मानित किया गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा मिल को यह सम्मान प्रदान किया गया। इस प्रकार मिल ने एक ही अवसर पर गन्ना विकास और तकनीकी दक्षता से जुड़े क्षेत्रों में अपनी उपलब्धि दर्ज कराई।

यह दोहरी उपलब्धि मिल प्रबंधन और कर्मचारियों के लिए विशेष महत्व रखती है। एक ओर जहां गन्ना विकास के क्षेत्र में किसानों के साथ मिलकर किए गए प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली, वहीं दूसरी ओर तकनीकी दक्षता के लिए मिला सम्मान मिल की कार्यप्रणाली और क्षमता को भी रेखांकित करता है।

किसानों की मेहनत बनी सफलता की आधारशिला

किसी भी चीनी मिल की सफलता में गन्ना किसानों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। खेतों में किसान पूरे वर्ष फसल की देखभाल करते हैं और बेहतर उत्पादन के लिए मेहनत करते हैं। ऐसे में बेलरायां की सरजू सहकारी चीनी मिल को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार क्षेत्र के किसानों के लिए भी सम्मान का विषय है।

मिल प्रबंधन के अनुसार, किसानों के साथ लगातार संपर्क और गन्ना विकास से जुड़ी गतिविधियों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं किसानों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर मिल को मिला सम्मान पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। इससे गन्ना उत्पादन और उससे जुड़े कार्यों को लेकर किसानों में सकारात्मक उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।

बेलरायां को मिली राष्ट्रीय पहचान

लखीमपुर खीरी पहले से ही कृषि और गन्ना उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में बेलरायां स्थित सरजू सहकारी चीनी मिल का राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार हासिल करना जिले के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे बेलरायां का नाम देश के सहकारी चीनी उद्योग के राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से सामने आया है।

इसके अलावा, यह सम्मान इस बात को भी रेखांकित करता है कि किसानों की मेहनत, मिल प्रबंधन की योजनाबद्ध कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास मिलकर किस तरह उल्लेखनीय परिणाम दे सकते हैं। खेत से लेकर चीनी मिल तक की पूरी प्रक्रिया में बेहतर तालमेल होने पर उत्पादन और दक्षता दोनों में सुधार की संभावनाएं बढ़ती हैं।

साझा प्रयासों का परिणाम है सम्मान

सरजू सहकारी चीनी मिल के लिए मिला यह पुरस्कार केवल एक संस्था की उपलब्धि के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे बेलरायां क्षेत्र के गन्ना किसानों की मेहनत, मिल के अधिकारियों की योजनाएं और कर्मचारियों के निरंतर प्रयास शामिल हैं। यही कारण है कि इस सम्मान को क्षेत्र की सामूहिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

इस राष्ट्रीय सम्मान से बेलरायां के गन्ना किसानों का उत्साह बढ़ा है और गन्ना विकास से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली है। साथ ही, मिल प्रबंधन के सामने अब इस उपलब्धि को आगे भी कायम रखने और गन्ना किसानों के साथ समन्वय को और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।

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