मेरठ में लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन का प्रदर्शन, 15 दिन में दूसरी बार घेराव

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रिपोर्ट – मनीष पाराशर 

मेरठ: लंबित मांगों के समाधान को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले मंगलवार को बड़ी संख्या में किसानों ने मेरठ में प्रदर्शन किया। किसानों ने कमिश्नरी और कलक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। संगठन का दावा है कि पिछले 15 दिनों के भीतर यह दूसरी बार है, जब किसानों ने अपनी मांगों के समाधान के लिए अधिकारियों के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया है।

प्रदर्शन के दौरान किसान अपने हाथों में गन्ना और ज्वार की फसल लेकर कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और अधिकारियों से समस्याओं का समाधान कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के बाद प्रशासन की ओर से कमिश्नर कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया गया। इसके साथ ही मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया।

सुबह से कमिश्नर कार्यालय पहुंचने लगे किसान

बताया गया कि मंगलवार सुबह करीब 11 बजे से ही किसान कमिश्नर कार्यालय के बाहर पहुंचना शुरू हो गए थे। धीरे-धीरे प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई। किसान हाथों में गन्ना और ज्वार की फसल लेकर कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।

किसानों का कहना था कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और इनका समाधान कराने के लिए लगातार अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा प्रदर्शन करना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि किसानों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर लंबित समस्याओं का समाधान कराया जाए।

कमिश्नर कार्यालय के बाहर सड़क पर बैठे किसान

प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने और नारेबाजी के बीच प्रशासन ने कमिश्नर कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई। इसके बाद किसान कार्यालय के बाहर सड़क पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।

इस दौरान किसानों ने प्रशासन के रवैये को लेकर भी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन उन्हें अपेक्षित समय नहीं दिया गया। इसी बात को लेकर किसानों में नाराजगी बताई गई।

हालांकि, किसानों के आरोपों पर प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

हुक्का लेकर पहुंचे किसान, ट्रैक्टर पर बजा डीजे

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अलग अंदाज में भी अपनी बात रखी। कमिश्नर कार्यालय के बाहर सड़क पर बैठे कुछ किसानों ने हुक्का पीकर प्रदर्शन किया। वहीं, कुछ किसान ट्रैक्टर लेकर पहुंचे थे, जिन पर डीजे बजाया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में माहौल बनाया।

गन्ना और ज्वार की फसल हाथों में लेकर प्रदर्शन करने का उद्देश्य किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखना बताया गया। किसानों ने कहा कि उनकी समस्याओं का सीधा संबंध खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है, इसलिए प्रशासन को इन मामलों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

कमिश्नर के प्रतिनिधि को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद किसानों ने कमिश्नर के प्रतिनिधि को अपना ज्ञापन सौंपा। इसके बाद किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन दिया।

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने अपनी लंबित मांगों के समाधान की मांग रखी। संगठन की ओर से कहा गया कि अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने के बावजूद यदि समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो आगे भी आंदोलन किया जा सकता है।

किसानों का कहना है कि उनकी मांगों पर अधिकारियों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए। साथ ही, जिन मामलों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता है, उनमें समयबद्ध तरीके से निर्णय लिया जाना चाहिए।

15 दिनों में दूसरी बार प्रदर्शन

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले किसानों का यह प्रदर्शन 15 दिनों के भीतर दूसरी बार होने की बात कही गई है। इससे संकेत मिलता है कि संगठन लंबित मांगों को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

किसानों का कहना है कि बार-बार अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखने के बावजूद यदि समाधान नहीं होता है तो संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है। मंगलवार को हुए प्रदर्शन में भी किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

वहीं, प्रशासन के सामने अब किसानों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई करने की चुनौती है। यदि संबंधित विभागों की ओर से समय पर कार्रवाई होती है तो किसानों की कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।

अधिकारियों से समाधान की मांग

किसानों ने कहा कि उनका उद्देश्य अपनी लंबित मांगों को अधिकारियों तक पहुंचाना और उनका समाधान कराना है। इसके लिए उन्होंने कमिश्नरी से लेकर कलक्ट्रेट तक अपनी बात रखी। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि अधिकारियों को किसानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए।

फिलहाल किसानों की ओर से दिए गए ज्ञापनों के बाद संबंधित विभागों की कार्रवाई पर नजर रहेगी। किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो संगठन आगे की रणनीति तय कर सकता है।

मेरठ में हुए इस प्रदर्शन के दौरान किसानों की संख्या, कमिश्नरी और कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन तथा ज्ञापन सौंपे जाने से एक बार फिर किसानों से जुड़े लंबित मुद्दे प्रशासन के सामने आए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन मांगों पर किस तरह की कार्रवाई करते हैं और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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