जौनपुर में ग्राम विकास अधिकारी पर जानलेवा हमला, सरकारी अभिलेख और डोंगल छीनने का किया गया प्रयास
रिपोर्ट – विवेक कुमार
जौनपुर: जिले के विकास खंड मड़ियाहूं में तैनात ग्राम विकास अधिकारी जयसिंह गुप्ता ने कुछ लोगों पर उनके साथ मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, पेट्रोल पंप जाने के दौरान रास्ते में उनके साथ गाली-गलौज की गई और इसके बाद लोहे की रॉड, लाठी-डंडों से हमला किया गया। ग्राम विकास अधिकारी ने कथित तौर पर असलहा दिखाकर धमकी देने का आरोप भी लगाया है। पीड़ित की तहरीर के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
शिकायत के अनुसार, घटना रामपुर खास क्षेत्र में विवादित भूमि के पास हुई। ग्राम विकास अधिकारी का आरोप है कि मौके पर मौजूद विनोद जायसवाल, राज जायसवाल समेत कई नामजद और अज्ञात लोगों ने एक साथ होकर उनके साथ मारपीट की। हालांकि, घटना की वास्तविक स्थिति और लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पेट्रोल पंप जाते समय विवाद का आरोप
ग्राम विकास अधिकारी जयसिंह गुप्ता के मुताबिक, वह किसी काम से पेट्रोल पंप की ओर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया और उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद आरोपित लोगों ने लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से उनके साथ मारपीट की।
तहरीर में शिकायतकर्ता ने बताया है कि इस घटना में उनके सिर और पैरों में चोटें आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान वह बेहोश हो गए। हालांकि, चोटों की स्थिति और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है।
सरकारी अभिलेख और डोंगल क्षतिग्रस्त करने का आरोप
मामले में ग्राम विकास अधिकारी ने एक अन्य गंभीर आरोप भी लगाया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके पास सरकारी काम से संबंधित अभिलेख और डोंगल मौजूद था। आरोप है कि हमलावरों ने मारपीट के दौरान इन सामानों को छीन लिया और उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया।
ग्राम विकास अधिकारी ने शिकायत में कहा है कि सरकारी अभिलेख और डोंगल के क्षतिग्रस्त होने के कारण उनके विभागीय कार्य प्रभावित हुए। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
सरकारी कार्य से जुड़े उपकरण और दस्तावेजों को लेकर लगाए गए आरोपों के कारण पुलिस के सामने घटना के सभी पहलुओं की जांच करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए मौके की स्थिति, संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।
कट्टा दिखाकर धमकी देने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उन्हें कथित तौर पर कट्टा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। इस आरोप को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के दौरान वास्तव में इस तरह की धमकी दी गई थी या नहीं।
वहीं, ग्राम विकास अधिकारी के भाई संतोष गुप्ता और भांजे प्रियांशु गुप्ता के भी मौके पर पहुंचने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके भाई और भांजे के साथ भी मारपीट की गई। इन आरोपों की भी पुलिस द्वारा जांच की जानी है।
जन चौपाल में नहीं पहुंच सके ग्राम विकास अधिकारी
ग्राम विकास अधिकारी ने बताया कि उन्हें ग्राम पंचायत हिनौती में आयोजित जन चौपाल में सरकारी कार्य के सिलसिले में शामिल होना था। हालांकि, कथित मारपीट की घटना के कारण वह वहां नहीं पहुंच सके।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जन चौपाल में सरकारी कार्य के लिए जाना उनकी ड्यूटी का हिस्सा था। ऐसे में घटना के चलते उनके काम में बाधा आने की बात भी तहरीर में कही गई है।
विवादित भूमि के पास हुई घटना
बताया गया है कि कथित घटना रामपुर खास क्षेत्र में स्थित विवादित भूमि के पास हुई। शिकायत में इसी स्थान को घटना का स्थल बताया गया है। ऐसे में पुलिस के लिए भूमि विवाद से जुड़े पहलुओं की भी जांच करना जरूरी होगा, ताकि घटना की पृष्ठभूमि और विवाद के कारणों का पता लगाया जा सके।
पुलिस जांच के दौरान शिकायत में नामजद लोगों के साथ-साथ अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल ग्राम विकास अधिकारी की तहरीर में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुटी है। शिकायत में नामजद और अज्ञात लोगों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस के स्तर से घटना के संबंध में संबंधित पक्षों के बयान, चोटों से जुड़े दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा सकती है। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस घटना ने सरकारी कार्य से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है। खासकर जब कोई कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्र में विभागीय कार्य के लिए जाता है, तो उसकी सुरक्षा और काम में किसी तरह की बाधा न आने का विषय महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, इस मामले में आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि घटना में किन लोगों की भूमिका रही और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

