अमरोहा में सरकारी खलिहान की जमीन पर कब्जे का आरोप, गाटा 564 के दूसरे हिस्से में भी निर्माण से मामला गरमाया
Digital UP News Desk
अमरोहा: अमरोहा जनपद की तहसील नौगांवा सादात क्षेत्र के गांव बीलना में सरकारी खलिहान की जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में खलिहान के रूप में दर्ज भूमि पर अलग-अलग हिस्सों में निर्माण किए जाने से सरकारी जमीन की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब इसी गाटा संख्या के दूसरे हिस्से में भी मकान निर्माण किए जाने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव बीलना में गाटा संख्या 564 की जमीन सरकारी अभिलेखों में खलिहान के रूप में दर्ज बताई जा रही है। आरोप है कि इस भूमि के एक हिस्से पर पहले ही निर्माण कर कब्जा किए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद अब इसी गाटे के दूसरे हिस्से में भी मकान निर्माण किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे ग्रामीणों के बीच सरकारी भूमि की निगरानी और संरक्षण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
एक ही गाटे के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण का आरोप
बताया जा रहा है कि गाटा संख्या 564 के एक हिस्से पर शाहरूख पुत्र जाहिद उर्फ पप्पू द्वारा मकान निर्माण कर कब्जा किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। वहीं, अब इसी गाटा संख्या के दूसरे हिस्से पर उमरपाल सिंह और कुमरपाल सिंह द्वारा मकान बनाए जाने का आरोप सामने आया है।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा सरकारी अभिलेखों में दर्ज भूमि और मौके पर मौजूद निर्माण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जमीन वास्तव में सरकारी खलिहान के रूप में दर्ज है, तो उस पर निजी निर्माण की अनुमति किस आधार पर हुई, इसकी जांच जरूरी है।
कार्रवाई नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी भूमि पर कथित कब्जे के मामलों की जानकारी सामने आने के बावजूद अब तक अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इसी वजह से ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि आखिर सरकारी जमीन की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।
इसके अलावा, ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गाटा संख्या 564 की वास्तविक स्थिति क्या है। यदि अभिलेखों में भूमि खलिहान के तौर पर दर्ज है और मौके पर निजी निर्माण पाया जाता है, तो प्रशासन की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।
जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंचा मामला
मामला अमरोहा के जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ के संज्ञान में पहुंचने के बाद प्रशासन की ओर से जांच की बात कही गई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर किसी भी कीमत पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा।
जिलाधिकारी के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया है तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस रुख के बाद अब ग्रामीणों की नजर जांच की प्रक्रिया और उसके परिणाम पर है।
अभिलेख और मौके की स्थिति से खुलेगा मामला
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू सरकारी राजस्व अभिलेख हैं। गाटा संख्या 564 की भूमि किस श्रेणी में दर्ज है और मौके पर उसका वर्तमान उपयोग क्या है, इसका सत्यापन राजस्व विभाग की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जिस भूमि पर निर्माण किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, उसका स्वामित्व और उपयोग संबंधी रिकॉर्ड क्या कहता है।
यदि जांच में सरकारी खलिहान की भूमि पर बिना अनुमति निर्माण या कब्जा पाया जाता है, तो प्रशासन के सामने उसे हटाने और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का सवाल होगा। वहीं, यदि अभिलेख और मौके की स्थिति में कोई अंतर सामने आता है, तो उसकी भी प्रशासनिक स्तर पर जांच की आवश्यकता होगी।
ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक जांच पर
फिलहाल बीलना गांव में गाटा संख्या 564 की जमीन को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा जारी है। एक ही गाटे के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण के आरोप सामने आने के बाद अब प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि राजस्व रिकॉर्ड, मौके की पैमाइश और निर्माण की स्थिति की जांच के बाद पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
वहीं, प्रशासन ने सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच में गाटा संख्या 564 की जमीन की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और यदि सरकारी खलिहान की भूमि पर कब्जे के आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशासन की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

