ईपीएफओ वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये, लाखों कर्मचारियों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का लाभ
हरि शंकर शर्मा
कानपुर। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का निर्णय लिया है। संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर 2026, विश्वकर्मा जयंती से प्रभावी होने की जानकारी दी गई है। सरकार के इस निर्णय से 15 हजार से 25 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारी ईपीएफओ की अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आ सकेंगे।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रेस वार्ता के दौरान इस निर्णय की जानकारी दी। वहीं, ईपीएफओ कानपुर के क्षेत्रीय आयुक्त (प्रथम) शाहिद इकबाल ने ईपीएफओ कार्यालय के सभागार में पत्रकारों को सरकार के फैसले और इसके संभावित प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया।
15 हजार से 25 हजार रुपये हुई वेतन सीमा
क्षेत्रीय आयुक्त शाहिद इकबाल के मुताबिक, ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए निर्धारित वेतन सीमा सितंबर 2014 से 15,000 रुपये प्रति माह पर बनी हुई थी। इस अवधि में वेतन, न्यूनतम मजदूरी और जीवन-यापन की लागत में बदलाव आया है। इसके बावजूद अनिवार्य ईपीएफ कवरेज की वेतन सीमा में लंबे समय से बदलाव नहीं हुआ था।
अब केंद्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है। ऐसे में 15,000 रुपये से अधिक और 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज का दायरा बढ़ेगा। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों और प्रतिष्ठानों पर लागू वैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही कवरेज निर्धारित होगा।
कर्मचारियों को मिलेंगे भविष्य निधि, पेंशन और बीमा के लाभ
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पर पड़ने की उम्मीद है। ईपीएफओ के दायरे में आने वाले पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि बचत के साथ-साथ पेंशन और बीमा से संबंधित वैधानिक सुरक्षा का लाभ मिल सकता है।
दरअसल, भविष्य निधि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के लिए दीर्घकालिक बचत का आधार उपलब्ध कराती है। वहीं, पेंशन व्यवस्था भविष्य में नियमित आय का एक माध्यम बन सकती है। इसके अलावा, ईपीएफओ से जुड़ी बीमा सुरक्षा कर्मचारी और उसके परिवार के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।
इस प्रकार वेतन सीमा में वृद्धि से उन कर्मचारियों को भी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने का रास्ता साफ होगा, जो अब तक निर्धारित वेतन सीमा से अधिक होने के कारण अनिवार्य कवरेज के दायरे में नहीं आते थे।
सामाजिक सुरक्षा का दायरा होगा विस्तृत
सरकार के इस निर्णय को औपचारिक क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वेतन सीमा बढ़ने के बाद 15 हजार से 25 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के दायरे में आ सकता है।
इसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों की नियमित बचत को बढ़ावा मिलने के साथ भविष्य के लिए वित्तीय सुरक्षा मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का दायरा बढ़ने से औपचारिक कार्यबल को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
विभिन्न मंत्रालयों के बीच हुआ विचार-विमर्श
क्षेत्रीय आयुक्त शाहिद इकबाल ने बताया कि वेतन सीमा में बदलाव से पहले विभिन्न मंत्रालयों के बीच इस प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि 16 जून 2026 को आयोजित बैठक में व्यय वित्त समिति (EFC) ने इस प्रस्ताव की सिफारिश की थी।
इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से वेतन सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इस प्रक्रिया में प्रस्ताव के वित्तीय प्रभावों का भी आकलन किया गया। सरकार के अनुमान के मुताबिक, वेतन सीमा बढ़ाए जाने के कारण वार्षिक अतिरिक्त व्यय लगभग 11,339 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।
वर्तमान में ईपीएफओ के लिए वार्षिक बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, पांच वर्ष की अवधि में इस निर्णय के कारण अनुमानित अतिरिक्त व्यय लगभग 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा पर जोर
वेतन सीमा में वृद्धि का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक अधिक कर्मचारियों की पहुंच सुनिश्चित करना है। खास तौर पर ऐसे कर्मचारी जिनका मासिक वेतन 15 हजार रुपये से अधिक है, लेकिन 25 हजार रुपये तक है, उनके लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके साथ ही, कर्मचारी भविष्य निधि में नियमित योगदान से लंबी अवधि में बचत की आदत मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर, पेंशन और बीमा से जुड़ी सुरक्षा कर्मचारियों के भविष्य तथा उनके परिवारों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहारा उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।
कुल मिलाकर, ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज सीमा में 10 हजार रुपये की वृद्धि से सामाजिक सुरक्षा का दायरा पहले की तुलना में व्यापक होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से अधिक कर्मचारी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली से जुड़ेंगे और उन्हें भविष्य निधि, पेंशन तथा बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

