श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को, 18 वादों पर जारी है सुनवाई
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
प्रयागराज/मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज के अनुसार, अदालत में संबंधित वादों की पुरानी अर्जियों पर आपत्तियों और अनापत्तियों को सुना गया। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। सुनवाई के बाद न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े 18 वाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। अगस्त 2024 में हाईकोर्ट ने इन 18 वादों की सुनवाई योग्य होने से संबंधित आपत्ति को खारिज किया था। अदालत ने कहा था कि इन वादों में उठाए गए मुद्दों पर सुनवाई आगे बढ़ सकती है।
पुरानी अर्जियों पर आपत्ति और अनापत्ति पर सुनवाई
दिनेश फलाहारी महाराज के मुताबिक, हालिया सुनवाई के दौरान सभी संबंधित वादों में पहले से दाखिल अर्जियों पर दोनों पक्षों की ओर से आपत्तियां और अनापत्तियां दर्ज की गईं। इसके साथ ही वादों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को तय करने की प्रक्रिया पर भी सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्ष की ओर से मौजूद अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आगे की कार्यवाही के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की।
हालांकि, इस विवाद में अलग-अलग वादों में अलग-अलग राहत और कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं। इसलिए प्रत्येक दावे और उसके आधार पर न्यायालय में होने वाली सुनवाई का परिणाम संबंधित वाद की प्रकृति के अनुसार तय होगा।
जमीन और 1968 के समझौते को लेकर विवाद
इस पूरे मामले में विवाद का एक प्रमुख बिंदु श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की भूमि और वर्ष 1968 में हुए समझौते से जुड़ा है। न्यायालय के रिकॉर्ड में भी 1968 के समझौते तथा उसके बाद की कानूनी कार्यवाही का उल्लेख मिलता है।
हिंदू पक्ष की ओर से दायर विभिन्न वादों में इस समझौते की वैधता और उसे करने वाली संस्था के अधिकार पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संबंधित सेवा संस्था को विवादित भूमि के संबंध में समझौता करने अथवा संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित करने का अधिकार नहीं था।
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष की ओर से समझौते और वर्तमान स्थिति से जुड़े कानूनी अधिकारों का पक्ष रखा जाता रहा है। इस प्रकार भूमि के स्वामित्व, समझौते की वैधता और संबंधित संस्थाओं के अधिकार जैसे प्रश्न इस मुकदमे की कानूनी बहस का हिस्सा हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के उपलब्ध रिकॉर्ड में भी इस विवाद से संबंधित जमीन, पुराने न्यायिक आदेशों और समझौते को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों का उल्लेख है।
18 वादों पर हाईकोर्ट में चल रही है कार्यवाही
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े मामलों को मई 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पास स्थानांतरित कर लिया था। इसके बाद अलग-अलग वादों में उठाए गए कानूनी सवालों पर हाईकोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ी।
अगस्त 2024 में अदालत ने शाही ईदगाह कमेटी की उस आपत्ति को स्वीकार नहीं किया था, जिसमें 18 वादों की सुनवाई की वैधता पर सवाल उठाया गया था। इसके बाद मामलों की मेरिट से जुड़ी सुनवाई का रास्ता साफ हुआ।
बाद की कार्यवाही में भी अलग-अलग वादों में पक्षकारों, प्रतिनिधित्व और अन्य प्रक्रियात्मक मुद्दों पर सुनवाई हुई है। अगस्त 2026 में भी इस विवाद से जुड़े मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही जारी रही।
बिजली कनेक्शन को लेकर भी दावा
दिनेश फलाहारी महाराज ने सुनवाई के संदर्भ में एक अन्य आरोप का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ईदगाह परिसर में बिजली के इस्तेमाल को लेकर शिकायत की गई थी और उनके दावे के मुताबिक बिजली विभाग की कार्रवाई में जुर्माना लगाया गया।
हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोप और कार्रवाई का विस्तृत आधिकारिक रिकॉर्ड अलग विषय है। इसलिए इसे संबंधित पक्ष के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक आधिकारिक दस्तावेज से इसकी स्वतंत्र पुष्टि न हो।
दोनों पक्षों के अधिवक्ता रहे मौजूद
सुनवाई के दौरान विभिन्न पक्षों की ओर से अधिवक्ताओं की मौजूदगी रही। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एपी सिंह ऑनलाइन दिल्ली से जुड़े। इसके अलावा अधिवक्ता एके मालवीय, वीनू सिंह, गौरव पांडे और सुषमा सोनी सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे। मुस्लिम पक्ष की ओर से तनवीर अहमद समेत अन्य अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा।
अब मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। उस दिन अदालत के समक्ष लंबित अर्जियों और संबंधित कानूनी मुद्दों पर आगे की कार्यवाही हो सकती है। चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष अदालत के आदेश और आगे होने वाली न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

