आजमगढ़ में फर्जी सीओ बनकर शराब का ठेका दिलाने के नाम पर ठगी, पांचवीं पास आरोपी गिरफ्तार

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रिपोर्ट – पित्तेश्वर कुमार 

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में खुद को पुलिस का सीओ अधिकारी बताकर शराब का ठेका दिलाने के नाम पर कथित तौर पर ठगी करने का मामला सामने आया है। गंभीरपुर थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान गंभीरपुर थाना क्षेत्र के मगरावा गांव निवासी संजय के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 40 वर्ष बताई गई है और वह पांचवीं कक्षा तक पढ़ा है।

पुलिस का आरोप है कि संजय ने खुद को पुलिस विभाग का अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को शराब का ठेका दिलाने का भरोसा दिया। इसके बदले उसने 3.20 लाख रुपये की मांग की और कथित तौर पर 90 हजार रुपये भी ले लिए। जांच के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से दो कूटरचित पुलिस अधिकारी पहचान पत्र, शराब ठेके का फर्जी आवंटन पत्र, पुलिस वर्दी का एक सेट और मोबाइल फोन बरामद किया है।

शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस जांच

पुलिस के मुताबिक, 17 सितंबर को मामले में शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि संजय नाम के व्यक्ति ने खुद को सीओ अधिकारी बताते हुए शराब का ठेका दिलाने की बात कही थी। इसके लिए कुल 3.20 लाख रुपये मांगे गए थे। शिकायत के अनुसार, 30 अगस्त को आरोपी को 90 हजार रुपये दिए गए थे।

इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। शिकायत के आधार पर गंभीरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरोपी से जुड़े मोबाइल नंबर, लोकेशन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसकी तलाश शुरू की।

वर्दी पहनकर करता था वीडियो कॉल

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर पुलिस अधिकारी का प्रभाव बनाने के लिए वर्दी पहनकर लोगों से वीडियो कॉल करता था। बताया गया कि एक सितंबर को भी उसने पुलिस की वर्दी पहनकर मोबाइल फोन से वीडियो कॉल की थी।

वीडियो कॉल के दौरान वह खुद को पुलिस अधिकारी बताता था। पुलिस के अनुसार, इसी तरीके से वह सामने वाले व्यक्ति पर प्रभाव डालने और अपने बारे में विश्वास पैदा करने का प्रयास करता था। बाद में जब शिकायतकर्ता ने उसके बारे में जानकारी जुटाई तो उसके पुलिस अधिकारी होने पर संदेह हुआ।

जांच में उसके पास मौजूद कथित फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज भी पुलिस के सामने आए। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस और साइबर सेल की टीम ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।

रानीपुर रजमों मोड़ के पास से गिरफ्तारी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपराध और साइबर ठगी से जुड़े मामलों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गंभीरपुर थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।

पुलिस के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना और आरोपी की लोकेशन के आधार पर टीम ने 18 सितंबर को रानीपुर रजमों मोड़ के पास से संजय को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके कब्जे से कथित तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किए।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने आरोपी के पास से दो कूटरचित पुलिस अधिकारी पहचान पत्र, शराब ठेके का कूटरचित आवंटन पत्र, पुलिस वर्दी का एक सेट और मोबाइल फोन बरामद किया है।

शराब ठेके और नौकरी का झांसा देने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, आरोपी केवल शराब का ठेका दिलाने की बात तक सीमित नहीं था। वह कथित तौर पर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को नौकरी और अन्य काम कराने का भरोसा भी देता था।

पुलिस का कहना है कि वह सीओ या डिप्टी एसपी की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल करता और फर्जी पहचान पत्र के माध्यम से अपनी पहचान पुलिस अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करता था। इसके बाद संबंधित व्यक्ति से किसी काम के बदले रकम की मांग की जाती थी।

ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति द्वारा सरकारी अधिकारी की पहचान का कथित रूप से गलत इस्तेमाल कर भरोसा हासिल करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसलिए पुलिस आरोपी से जुड़े अन्य लोगों, दस्तावेजों और संभावित लेनदेन के बारे में भी जानकारी जुटा सकती है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?

पुलिस के अनुसार, गंभीरपुर थाने में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी के खिलाफ वर्ष 2017 में गंभीरपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। पुराने मामले का विवरण भी मौजूदा जांच के दौरान पुलिस के रिकॉर्ड का हिस्सा रहेगा।

बरामद सामान की जांच में जुटी पुलिस

गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन, पहचान पत्र और शराब ठेके से संबंधित कथित फर्जी आवंटन पत्र की जांच कर रही है। इसके अलावा यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि आरोपी ने इन दस्तावेजों को कहां से तैयार कराया और क्या उसने इसी तरीके से अन्य लोगों से भी संपर्क किया था।

फिलहाल पुलिस के सामने मुख्य चुनौती मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि करना और कथित ठगी के दायरे का पता लगाना है। वहीं, आरोपी के खिलाफ दर्ज मुकदमे में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

इस मामले में पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि किसी व्यक्ति के अधिकारी होने के दावे पर केवल वर्दी, वीडियो कॉल या पहचान पत्र देखकर भरोसा न करें। सरकारी काम, लाइसेंस, ठेका या अन्य किसी सुविधा के नाम पर रकम मांगने वाले व्यक्ति की पहचान संबंधित विभाग से सीधे सत्यापित करना जरूरी है। इससे इस तरह की कथित ठगी से बचने में मदद मिल सकती है।