कानपुर में राजनीतिक दलों की मौजूदगी में EVM-VVPAT की जांच, 5417 मशीनों का होगा परीक्षण

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Digital UP News

कानपुर: आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 की तैयारियों के तहत कानपुर नगर में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की प्रथम स्तरीय जांच यानी फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। निर्वाचन आयोग के निर्धारित रोस्टर और प्रोटोकॉल के अनुसार चल रही इस प्रक्रिया में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के अधिकृत इंजीनियर एक-एक मशीन की तकनीकी स्थिति और कार्यक्षमता की जांच कर रहे हैं।

इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मशीनों का परीक्षण किया जा रहा है। साथ ही एफएलसी की ऑनलाइन निगरानी भी की जा रही है। कानपुर में 3,736 प्रस्तावित मतदान बूथों के लिए कुल 5,417 EVM-VVPAT मशीनों की चरणबद्ध जांच की जानी है। यह प्रक्रिया 17 सितंबर से शुरू हुई है।

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में जांच

एफएलसी के दूसरे दिन भारत निर्वाचन आयोग से आए प्रेक्षकों के दल के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. विवेक चतुर्वेदी मौजूद रहे। इसके अलावा समाजवादी पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अपना दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी जांच प्रक्रिया का अवलोकन किया।

मशीनों की जांच के दौरान राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों को पूरी प्रक्रिया को देखने का अवसर दिया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक चरण पूरा हो।

जिला प्रशासन के अनुसार, एफएलसी की प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत कराई जा रही है। इससे पहले जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को प्रक्रिया के दौरान अपने अधिकृत प्रतिनिधियों को नामित करने के लिए सूचित किया गया था।

5417 मशीनों की होगी चरणबद्ध तकनीकी जांच

कानपुर नगर में प्रस्तावित 3,736 मतदान बूथों के लिए 5,417 EVM और VVPAT मशीनों की प्रथम स्तरीय जांच की जा रही है। इसके लिए BEL के अधिकृत इंजीनियरों की टीम तकनीकी परीक्षण कर रही है।

एफएलसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप हों। जांच के दौरान मशीनों की भौतिक स्थिति, संचालन और कार्यक्षमता सहित विभिन्न तकनीकी पहलुओं को परखा जाता है।

इसके साथ ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत मशीनों में वोट डालकर यह भी देखा जाता है कि EVM सही तरीके से काम कर रही है या नहीं। किसी मशीन को उपयोग के लिए उपयुक्त पाए जाने के बाद उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित किया जाता है।

रैंडम मशीनों का भी होगा विस्तृत परीक्षण

एफएलसी में सभी मशीनों की सामान्य तकनीकी जांच के अलावा रैंडम तरीके से चयनित मशीनों का विस्तृत परीक्षण भी किया जाता है। इसके तहत निर्धारित अनुपात में चुनी गई मशीनों पर अधिक संख्या में वोट डालकर उनकी कार्यक्षमता परखी जाती है।

प्रक्रिया के अनुसार रैंडम चयनित मशीनों में से 2 प्रतिशत पर 500 वोट, 2 प्रतिशत पर 1,000 वोट और 1 प्रतिशत मशीनों पर 1,200 वोट डालकर परीक्षण किया जाता है। इस तरह कुल 5 प्रतिशत रैंडम चयनित मशीनों का विस्तृत परीक्षण किया जाता है।

इस परीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मशीनें अलग-अलग परिस्थितियों में भी निर्धारित तरीके से काम कर रही हैं। साथ ही परीक्षण के दौरान सामने आने वाली किसी तकनीकी समस्या की पहचान कर संबंधित मशीन को आगे की प्रक्रिया में शामिल करने से पहले आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

सही पाई गई मशीनों को किया जाएगा सील

प्रथम स्तरीय जांच पूरी होने के बाद जो EVM और VVPAT मशीनें निर्धारित मानकों के अनुरूप सही पाई जाएंगी, उन्हें भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षित रखा जाएगा।

जांच के बाद मशीनों को निर्धारित तरीके से सील किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक मशीन की एफएलसी स्थिति और संबंधित विवरण को निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। इससे आगे के चरणों में मशीनों की स्थिति और आवंटन का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहेगा।

पहले दिन की रिपोर्ट के अनुसार भी एफएलसी की प्रक्रिया में मशीनों के डेटा की सफाई और तकनीकी परीक्षण का काम किया गया था तथा निर्वाचन आयोग की ओर से इसकी निगरानी की गई।

इसके बाद होगा EVM का पहला रैंडमाइजेशन

एफएलसी पूरी होने के बाद निर्धारित चरण में EVM प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से मशीनों का प्रथम रैंडमाइजेशन किया जाएगा। यह प्रक्रिया जिला निर्वाचन अधिकारी और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराई जाएगी।

प्रथम रैंडमाइजेशन के माध्यम से EVM और VVPAT मशीनों का विधानसभा क्षेत्रवार आवंटन किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद मशीनों को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संबंधित स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

इस तरह एफएलसी से लेकर रैंडमाइजेशन तक प्रत्येक चरण को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा किया जाता है। जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर के साथ-साथ निर्वाचन आयोग के स्तर से भी एफएलसी की निगरानी की व्यवस्था रहती है।

ट्रेनिंग और मतदाता जागरूकता में भी इस्तेमाल होंगी मशीनें

एफएलसी में सही पाई गई मशीनों में से निर्धारित संख्या में EVM-VVPAT का इस्तेमाल मतदान कार्मिकों की ट्रेनिंग और मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा। इन मशीनों पर अलग से ‘ट्रेनिंग एवं अवेयरनेस’ अंकित किया जाएगा।

निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने से पहले तक इन मशीनों को निर्धारित स्थानों पर ले जाकर प्रशिक्षण और मतदाता जागरूकता गतिविधियों में इस्तेमाल तथा प्रदर्शित किया जा सकता है। हालांकि, निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के बाद प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए चिह्नित मशीनों को बाहर ले जाने की अनुमति निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं होगी।

कुल मिलाकर कानपुर में EVM और VVPAT की प्रथम स्तरीय जांच आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चरण है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी, तकनीकी परीक्षण और निगरानी व्यवस्था के माध्यम से प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा किया जा रहा है।