गोंडा में पतंजलि विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, बोले विदेशी कचरा रिफाइन कर घी के नाम पर बेच रहे
Digital UP News Desk
गोंडा: पतंजलि फूड्स लिमिटेड की ओर से 50 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे का सामना कर रहे पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने गोंडा में एक बार फिर पतंजलि के उत्पादों और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने पतंजलि के घी को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि विदेशों से आने वाले कथित कचरे को रिफाइन करके भारत में घी के नाम पर बेचे जाने की जांच होनी चाहिए।
बृजभूषण शरण सिंह के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, पतंजलि फूड्स ने उनके बयानों को कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। इसी विवाद के चलते कंपनी ने उनके खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा दायर किया है। मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चल रही है।
50 करोड़ के मानहानि केस पर क्या बोले बृजभूषण?
गोंडा में बातचीत के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने उनके खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस कानूनी कार्रवाई से कोई आपत्ति नहीं है और यदि अदालत उन्हें दोषी मानती है तो वह जेल जाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वह जमानत लेने की बजाय जेल जाना पसंद करेंगे। उनके मुताबिक, यदि ऐसा होता है तो इससे खाद्य पदार्थों में मिलावट के मुद्दे पर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ेगी।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला उन बयानों से जुड़ा है, जिनमें बृजभूषण ने पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। पतंजलि की ओर से अदालत में दावा किया गया है कि इन बयानों से कंपनी की ब्रांड छवि प्रभावित हुई और उसे आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
बृजभूषण ने लगाए खाद्य पदार्थों में मिलावट के आरोप
बृजभूषण शरण सिंह ने बातचीत के दौरान देश में खाद्य पदार्थों में कथित मिलावट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाजार में नकली मिठाई, मावा, दही और तेल की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने पतंजलि के उत्पादों को लेकर भी अपने आरोप दोहराए।
उन्होंने दावा किया कि कनाडा और सिंगापुर से आने वाले कथित कचरे को रिफाइन करके भारत में घी के नाम पर बेचा जा रहा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे फिलहाल बृजभूषण शरण सिंह के आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।
उन्होंने बाबा रामदेव और पतंजलि के कई उत्पादों को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि कुछ उत्पाद विभिन्न देशों में प्रतिबंधित किए जा चुके हैं। इन दावों के संबंध में भी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
अपने घी की कीमत का भी दिया उदाहरण
बृजभूषण शरण सिंह ने बातचीत के दौरान अपने यहां तैयार होने वाले घी का उदाहरण देते हुए उसकी कीमत और उत्पादन की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि उनके यहां करीब 150 गायें हैं और उनसे हर महीने लगभग 100 किलोग्राम शुद्ध घी तैयार होता है।
उन्होंने दावा किया कि पहले वह घी करीब 2,000 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर बेचते थे, लेकिन अब इसकी कीमत 3,000 रुपये से अधिक करने की बात कही। साथ ही उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में इसी तरह का घी 14,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है।
बृजभूषण ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि बाजार में कम कीमत पर मिलने वाले घी की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की जाती। उन्होंने सरकार से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर सख्त निगरानी की मांग की।
पतंजलि ने क्या कहा है?
दूसरी ओर, पतंजलि फूड्स की ओर से बृजभूषण के बयानों पर कानूनी कार्रवाई की गई है। कंपनी के वकील विक्रम मालवीय के अनुसार, विवादित बयानों से कंपनी की ब्रांड छवि को नुकसान पहुंचा और शेयर मूल्य पर भी प्रभाव पड़ा। इसी आधार पर 50 करोड़ रुपये के मानहानि दावे की बात सामने आई है।
मामला पहले जिला अदालत में पहुंचा था और बाद में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े विवाद के कारण हाईकोर्ट तक पहुंचा। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। 18 सितंबर को मामले में सुनवाई निर्धारित थी।
2022 से चला आ रहा है विवाद
पतंजलि के घी को लेकर बृजभूषण शरण सिंह और कंपनी के बीच विवाद नया नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2022 में भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का सिलसिला जारी रहा।
अब 50 करोड़ रुपये के मानहानि मामले के बीच गोंडा में दिए गए बृजभूषण के ताजा बयान से यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फिलहाल मामले में अंतिम निर्णय अदालत को करना है। वहीं, बृजभूषण के खाद्य पदार्थों से जुड़े आरोपों की पुष्टि या खंडन संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

