कानपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र का पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप, न्याय न मिलने पर रोड जाम की चेतावनी
रिपोर्ट- हनुमन्त सिंह पिन्टू
कानपुर। कानपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र सचिन चंद्रा ने पुलिस प्रशासन पर न्याय न मिलने और एक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अक्टूबर 2024 में हुई एक कथित घटना के बाद से वह लगातार पुलिस अधिकारियों और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वह लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे।
सचिन चंद्रा के मुताबिक, 26 अक्टूबर 2024 को एक छात्र के साथ कथित तौर पर पिस्टल से जुड़ी घटना हुई थी। उनका आरोप है कि इस मामले में उन्होंने पुलिस और प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत और तहरीर दी। इसके बावजूद उन्हें अभी तक संतोषजनक कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
कई वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने का दावा
पूर्व छात्र सचिन चंद्रा का कहना है कि न्याय की मांग को लेकर वह लंबे समय से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उनके अनुसार, इस मामले में वह अब तक चार एसीपी और दो डीसीपी स्तर के अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने पूर्व पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार तथा वर्तमान पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के समक्ष भी अपनी शिकायत और ज्ञापन प्रस्तुत करने का दावा किया है।
सचिन का कहना है कि लगातार अधिकारियों से मुलाकात और ज्ञापन देने के बावजूद मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। उनका आरोप है कि शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें न्याय के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
हैलट अस्पताल में इलाज का हवाला
सचिन चंद्रा ने अपनी शिकायत में सरकारी अस्पताल हैलट में हुए इलाज का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि घटना के बाद चोटों की जांच और उपचार सरकारी अस्पताल में कराया गया था। उनके मुताबिक, इलाज के दौरान चोटों की पुष्टि होने के बावजूद कथित आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
इसी को लेकर उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मेडिकल जांच में चोटों की पुष्टि हुई थी तो शिकायत के आधार पर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगा।
दो महीने बाद मुकदमा दर्ज होने का आरोप
पूर्व छात्र ने आरोप लगाया कि कथित घटना के करीब दो महीने बाद उलटे उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। सचिन के मुताबिक, इस कार्रवाई के बाद उन्हें अपने पक्ष की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।
उनका कहना है कि शिकायतकर्ता की ओर से न्याय की मांग किए जाने के बाद यदि उसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो जाए तो पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वह चाहते हैं कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी या सक्षम एजेंसी से कराई जाए, जिससे वास्तविक तथ्यों का पता चल सके।
प्रशासन पर धमकी देने का भी आरोप
सचिन चंद्रा ने कानपुर प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने की बात सामने आई है। इसके साथ ही उन्होंने जांच से जुड़े अधिकारियों पर मामला समाप्त करने या रफा-दफा करने के लिए कथित तौर पर पैसों के लेन-देन की बात किए जाने का भी आरोप लगाया है।
ये आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है। यदि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में कोई साक्ष्य या दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उनकी जांच भी मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
गांधी प्रतिमा पर सत्याग्रह का प्रयास
न्याय की मांग को लेकर सचिन चंद्रा ने 15 सितंबर को कानपुर के धरना स्थल पर स्थित गांधी प्रतिमा के पास लोकतांत्रिक तरीके से सत्याग्रह करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं और किसी प्रकार की अव्यवस्था पैदा करना उनका उद्देश्य नहीं है।
उन्होंने प्रशासन से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और उनकी शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की। सचिन का कहना है कि लंबे समय से अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने के बाद भी यदि समाधान नहीं निकलता है तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
रोड जाम की चेतावनी से बढ़ सकती है चुनौती
सचिन चंद्रा ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और उनकी शिकायत पर न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं हुई, तो वह आगे सड़क पर प्रदर्शन करने का कदम उठा सकते हैं। उन्होंने रोड जाम करने की चेतावनी भी दी है।
हालांकि, सार्वजनिक मार्गों को बाधित करने से आम लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और प्रदर्शनकारी पक्ष के बीच संवाद के जरिए समाधान निकालना महत्वपूर्ण होगा। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

