खीरी में धौरहरा पुलिस पर ग्रामीणों से मारपीट के आरोप, 16 लोगों के घायल होने का किया गया दावा – पढ़िए क्या बोले विधायक विनोद अवस्थी

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रिपोर्ट – शरद अवस्थी 

लखीमपुर खीरी: जिले के धौरहरा क्षेत्र के सिसैया खुर्द गांव में सोमवार रात पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने धौरहरा पुलिस पर महिलाओं, बच्चों और अन्य ग्रामीणों के साथ मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान करीब 16 लोग घायल हुए, जिन्हें देर रात उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक, सोमवार रात धौरहरा पुलिस की टीम सिसैया खुर्द गांव पहुंची थी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने गांव की बिजली बंद कराकर कार्रवाई शुरू की। इसके बाद कई ग्रामीणों को लाठियों से पीटे जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

प्रदर्शन के बाद कार्रवाई का ग्रामीणों ने लगाया आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला स्थानीय विधायक विनोद अवस्थी के खिलाफ किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, विधायक के खिलाफ प्रदर्शन के बाद पुलिस गांव पहुंची और कार्रवाई की गई। इसी दौरान कथित तौर पर कई लोगों के साथ मारपीट हुई।

वहीं, ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि किसी मामले में कानून-व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाई जरूरी थी, तो पुलिस को नियमानुसार प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बच्चों को भी परेशान किया गया।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच और पुलिस के विस्तृत पक्ष के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

16 लोगों के घायल होने का दावा

ग्रामीणों के अनुसार, कथित पुलिस कार्रवाई में करीब 16 लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद कई ग्रामीण रात में ही उपचार के लिए सीएचसी पहुंचे। स्थानीय स्तर पर घटना को लेकर गांव में चर्चा तेज हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसके बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। इसी बीच पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने का आरोप लगाया गया है।

फिलहाल, घायलों की स्थिति और उन्हें किस तरह की चोटें आई हैं, इसकी विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी होगा।

लोधी समाज के लोगों ने जताई नाराजगी

ग्रामीणों के मुताबिक, घटना में प्रभावित बताए जा रहे अधिकांश लोग लोधी समाज से संबंधित हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद समाज के कुछ स्थानीय नेताओं के गांव पहुंचने की बात भी सामने आई है।

इसके बाद मामले ने सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का रूप ले लिया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने प्रदर्शन करने वालों की शिकायत सुनने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई का कारण और घटनाक्रम का आधिकारिक विवरण सामने आना अभी बाकी है।

ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की है, ताकि आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर सामने आ सके।

इंस्पेक्टर के बयान पर भी सवाल

ग्रामीणों ने धौरहरा थाने के इंस्पेक्टर के बयान पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस अधिकारी अपने पक्ष को सही साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वहीं, किसी भी पुलिस कार्रवाई में यदि बल प्रयोग के आरोप सामने आते हैं तो उसकी परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर जब महिलाओं, बच्चों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के प्रभावित होने का दावा किया जा रहा हो।

इसी वजह से ग्रामीणों की मांग है कि घटना के दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका, कार्रवाई का कारण और मौके की परिस्थितियों की जांच की जाए। इसके साथ ही घायलों के मेडिकल रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बनाया जाए।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

सिसैया खुर्द प्रकरण को लेकर ग्रामीणों की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि यदि पुलिस कार्रवाई नियमों के तहत हुई है तो उसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं, यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

इसके अलावा, ग्रामीणों ने घटना से जुड़े वीडियो, मोबाइल फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की मांग भी उठाई है। ऐसे मामलों में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल दस्तावेज जांच को दिशा देने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

फिलहाल सिसैया खुर्द गांव में घटना को लेकर माहौल चर्चा में है। ग्रामीण अपने आरोपों को लेकर अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोमवार रात गांव में वास्तव में क्या परिस्थितियां बनी थीं और पुलिस कार्रवाई की वजह क्या थी।

प्रशासन द्वारा यदि मामले की जांच कराई जाती है तो उसकी रिपोर्ट से आरोपों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य मानने के बजाय आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के बयान का इंतजार करना उचित होगा।

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