मेरठ में PMAY रजिस्ट्री के नाम पर 6 हजार की रिश्वत लेते आवास विकास का कर्मचारी गिरफ्तार

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रिपोर्ट- मनीष पाराशर 

मेरठ: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मिले मकान की रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत मांगने के मामले में मेरठ में एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। शास्त्री नगर स्थित आवास एवं विकास परिषद के कार्यालय में टीम ने आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव शर्मा को 6,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए कथित तौर पर रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ नौचंदी थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

मामले में शिकायत करने वाली महिला रंजना ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान मिलने के बाद उसकी रजिस्ट्री और कब्जे से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उससे रिश्वत की मांग की गई। महिला का कहना है कि आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के बावजूद उससे रकम मांगी गई। इसके बाद उसने एंटी करप्शन विभाग से संपर्क किया और शिकायत के आधार पर टीम ने कार्रवाई की।

PM आवास योजना के मकान की रजिस्ट्री के लिए मांगी रिश्वत

जानकारी के मुताबिक, मेरठ के किनानगर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रंजना को मकान आवंटित हुआ था। महिला के अनुसार, मकान प्राप्त करने के लिए उसे 76 हजार रुपये डाउन पेमेंट जमा करना था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसने यह रकम 2 प्रतिशत ब्याज पर उधार लेकर जमा की।

रंजना ने बताया कि मकान आवंटन के बाद उसे उम्मीद थी कि अब रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाएगी। हालांकि, जब रजिस्ट्री और मकान की चाबी मिलने का समय आया तो कथित तौर पर उससे अतिरिक्त रकम की मांग की गई।

महिला के अनुसार, पहले अरुण नाम के कर्मचारी ने उससे रुपये मांगे और बाद में अभिनव शर्मा ने भी 6,000 रुपये की मांग की। रंजना का आरोप है कि उसने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कर्मचारियों से रकम नहीं मांगने की अपील की, लेकिन इसके बावजूद उससे रिश्वत की मांग जारी रही।

पति की मौत के बाद चार बच्चों की जिम्मेदारी

शिकायतकर्ता रंजना ने मीडिया के सामने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसके पति देवेंद्र की कोरोना काल में मौत हो चुकी है। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उसके ऊपर आ गई। वह अपने चार बच्चों के साथ रह रही है और सीमित आर्थिक संसाधनों में परिवार का खर्च चला रही है।

महिला के मुताबिक, पीएम आवास योजना के तहत मकान मिलना उसके परिवार के लिए बड़ी राहत थी। इसके लिए उसने किसी तरह डाउन पेमेंट की व्यवस्था की थी। ऐसे में रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया के लिए रिश्वत मांगे जाने से वह परेशान हो गई।

रंजना का कहना है कि उसके पास रिश्वत देने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। अंततः उसने अपनी सोने की कान की बाली गिरवी रखकर रकम की व्यवस्था की और पूरे मामले की शिकायत एंटी करप्शन विभाग से कर दी।

शिकायत का सत्यापन कराने के बाद बनाई गई कार्रवाई की योजना

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन के बाद टीम ने आरोपी कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ने की योजना तैयार की।

इसके तहत शिकायतकर्ता महिला को एंटी करप्शन टीम ने निर्धारित रकम उपलब्ध कराई। टीम ने कथित तौर पर केमिकल लगे नोट महिला को दिए और उसे शास्त्री नगर स्थित आवास एवं विकास परिषद कार्यालय भेजा गया।

इस दौरान एंटी करप्शन टीम के सदस्य सादे कपड़ों में कार्यालय के आसपास मौजूद रहे। टीम आरोपी कर्मचारी की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। जैसे ही अभिनव शर्मा ने शिकायतकर्ता से 6,000 रुपये की रकम ली, टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया।

कार्रवाई के बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद उसे नौचंदी थाने लाया गया, जहां मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

नौचंदी थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा

नौचंदी थाना प्रभारी अनूप सिंह के अनुसार, आवास एवं विकास परिषद कार्यालय में रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारी अभिनव शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की विधिक कार्रवाई की जा रही है। उसे न्यायालय के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।

वहीं, एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या रिश्वत की मांग केवल आरोपी कर्मचारी तक सीमित थी या फिर इसके पीछे किसी अन्य कर्मचारी अथवा अधिकारी की भूमिका भी हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

पहले भी सामने आ चुका है रिश्वत का मामला

आवास एवं विकास परिषद कार्यालय में रिश्वतखोरी का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले भी संपत्ति विभाग के कर्मचारी परमीत को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़े जाने की बात सामने आ चुकी है।

इसके अलावा, कुछ आवंटियों ने संपत्ति अधिकारी सुनील कुमार शर्मा पर भी भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मौजूदा मामले में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर भी पूरे प्रकरण की जांच की संभावना है।

जांच में सामने आएगी अन्य लोगों की भूमिका

अभिनव शर्मा की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि क्या वह कथित तौर पर रिश्वत की रकम अपने स्तर पर ले रहा था या फिर किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी के निर्देश पर काम कर रहा था।

एंटी करप्शन विभाग यह भी जांच कर सकता है कि कार्यालय में रजिस्ट्री, पजेशन और अन्य संपत्ति संबंधी प्रक्रियाओं के दौरान लाभार्थियों से किसी तरह की अवैध रकम की मांग की गई थी या नहीं। इसके लिए शिकायतों, संबंधित दस्तावेजों और कार्यालय में होने वाली प्रक्रियाओं की भी जांच की जा सकती है।

यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मुख्य कार्रवाई आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव शर्मा के खिलाफ हुई है।

PMAY लाभार्थियों के लिए कार्रवाई महत्वपूर्ण

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आवास की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना के लाभार्थियों से किसी भी तरह की अवैध रकम की मांग का आरोप गंभीर माना जाता है।

मेरठ की इस कार्रवाई से यह संदेश भी जाता है कि सरकारी योजनाओं से जुड़े काम में रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर जांच एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं। साथ ही, लाभार्थियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि यदि उनसे किसी सरकारी प्रक्रिया के नाम पर अवैध रकम मांगी जाती है तो वे संबंधित विभाग या भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी को इसकी सूचना दें।

हालांकि, मौजूदा मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। पुलिस और एंटी करप्शन विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि रिश्वत की मांग और वसूली में आरोपी की भूमिका किस स्तर तक थी।

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