WCEF 2026: गांधीनगर में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच का उद्घाटन, 62 देशों के 3600 से अधिक प्रतिनिधि जुटे

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Digital UP News Desk

गांधीनगर: गुजरात की राजधानी गांधीनगर में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने मंगलवार को संयुक्त रूप से इस वैश्विक मंच का उद्घाटन किया। दक्षिण एशिया में पहली बार आयोजित हो रहा WCEF 2026 दुनिया के सामने संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, पुनर्चक्रण और टिकाऊ विकास से जुड़े व्यावहारिक समाधान रखने पर केंद्रित है।

यह वैश्विक आयोजन 15 से 18 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष मंच की थीम ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था: आम लोगों और समृद्धि के लिए परिवर्तन’ रखी गई है। कार्यक्रम में दुनिया के 62 देशों से 3600 से अधिक हितधारक हिस्सा ले रहे हैं। इनमें उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उद्यमी, स्टार्टअप, शोधकर्ता, नीति निर्माता, शिक्षाविद और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं।

वसुधैव कुटुंबकम की भावना से विकसित हों चक्रीय समाधान

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने कहा कि दक्षिण एशिया में पहली बार WCEF का आयोजन भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) को वैश्विक चक्रीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि WCEF 2026 के माध्यम से दुनिया के विभिन्न देशों के बीच ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित होंगे, जिन्हें आम लोगों के जीवन में भी अपनाया जा सके।

भूपेंद्रभाई पटेल ने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना समय की आवश्यकता है। गुजरात ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने पारंपरिक भारतीय जीवनशैली का उदाहरण देते हुए बताया कि संसाधनों का पुन: उपयोग और कचरे को उपयोगी सामग्री में बदलने की सोच भारतीय संस्कृति में लंबे समय से मौजूद रही है।

उन्होंने सोमनाथ मंदिर में अर्पित की जाने वाली सामग्रियों के पुनर्चक्रण का उदाहरण भी दिया। उनके मुताबिक, ऐसी सामग्री को पुनर्चक्रित करके उपयोगी संसाधनों में बदला जाता है और इससे स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर भी पैदा होते हैं।

‘पहले मरम्मत, फिर पुन: उपयोग और इसके बाद पुनर्चक्रण’

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि भारत के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था कोई पूरी तरह नई अवधारणा नहीं है। बल्कि यह देश की पुरानी जीवनशैली और परंपराओं को आधुनिक संदर्भ में देखने का नया तरीका है।

उन्होंने कहा कि भारत में लंबे समय से वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनकी मरम्मत और पुन: उपयोग करने की परंपरा रही है। उन्होंने चक्रीय अर्थव्यवस्था के मूल विचार को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी वस्तु को बदलने से पहले उसकी मरम्मत करनी चाहिए, फेंकने से पहले उसका दोबारा उपयोग करना चाहिए और अपशिष्ट के रूप में छोड़ने से पहले उसमें मौजूद उपयोगी सामग्री को प्राप्त करना चाहिए।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय विकास को अधिक संसाधन-कुशल, टिकाऊ और लचीला बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल यह नहीं होना चाहिए कि कितना कचरा पुनर्चक्रित किया गया, बल्कि यह भी होना चाहिए कि कितनी सामग्री को बेकार जाने से बचाया गया।

भारत में EPR व्यवस्था को मिला विस्तार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नियामक सुधारों और डिजिटल अनुपालन प्रणालियों को मजबूत किया है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े नियमों को बेहतर बनाया गया है और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) व्यवस्था लागू की गई है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी उत्पाद का उपयोग समाप्त होने के बाद उसकी यात्रा खत्म न हो, बल्कि उसमें मौजूद सामग्री नए संसाधन चक्र का हिस्सा बने।

भूपेंद्र यादव के अनुसार, अगस्त 2026 तक विभिन्न EPR व्यवस्थाओं के अंतर्गत 83,000 से अधिक उत्पादक और 4,802 पुनर्चक्रणकर्ता पंजीकृत हो चुके थे। वहीं, विनियमित अपशिष्ट प्रवाहों के माध्यम से लगभग 482.24 लाख मीट्रिक टन अपशिष्ट का प्रसंस्करण किया गया।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नियम और कानून बनाने से चक्रीय अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए उपभोक्ताओं की आदतों में भी बदलाव जरूरी है।

बाजार से घर तक पहुंचे चक्रीय अर्थव्यवस्था का विचार

भूपेंद्र यादव ने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था की शुरुआत केवल पुनर्चक्रण संयंत्र से नहीं हो सकती। इसकी शुरुआत बाजार से होनी चाहिए, फिर यह घरों तक पहुंचे और अंततः लोगों की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बने।

उन्होंने मिशन LiFE का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को अपनाने में आम नागरिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कम संसाधनों का इस्तेमाल, उत्पादों का लंबे समय तक उपयोग, मरम्मत, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण जैसे कदम चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।

इसके अलावा, मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था स्वभाव से सहयोगात्मक है। कोई भी देश, कंपनी या समुदाय अकेले इस पूरी व्यवस्था को सफल नहीं बना सकता। इसलिए ज्ञान, तकनीक, वित्त और जिम्मेदारी को देशों तथा विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझा करना होगा।

उन्होंने भारत की अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख करते हुए रिसोर्स एफिशिएंसी एंड सर्कुलर इकोनॉमी इंडस्ट्री कोएलिशन (RECEIC) का भी जिक्र किया, जिसे भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान शुरू किया गया था। साथ ही भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चक्रीय अर्थव्यवस्था को सतत जीवनशैली, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और जलवायु अनुकूलन से जोड़कर देखने पर भी जोर दिया गया।

गुजरात को वैश्विक चक्रीय अर्थव्यवस्था केंद्र बनाने पर जोर

गुजरात के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री अर्जुनभाई मोधवाडिया ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पृथ्वी पर सभी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन लालच के लिए नहीं।

उन्होंने कहा कि गुजरात में चक्रीय अर्थव्यवस्था की नींव को आगे बढ़ाया जा रहा है और राज्य को वैश्विक चक्रीय परिवर्तन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कचरे को संसाधन में और संसाधनों को उपयोगी उत्पादों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

फिनलैंड और नीदरलैंड ने साझा किया अनुभव

भारत में फिनलैंड के राजदूत मिक्को किविकोस्की ने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था केवल पर्यावरण से जुड़ा एजेंडा नहीं है, बल्कि यह विकास को देखने का एक नया तरीका है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड की राष्ट्रीय नीति में चक्रीय अर्थव्यवस्था महत्वपूर्ण स्थान रखती है और देश का लक्ष्य 2035 तक संसाधनों की खपत को 2015 के स्तर से नीचे लाना है।

उन्होंने बताया कि भारत में 100 से अधिक फिनिश कंपनियां टिकाऊ तकनीक और चक्रीय सिद्धांतों पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन की शुरुआत से ही सामग्रियों के जीवनकाल को बढ़ाने और अपशिष्ट को कम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

वहीं, नीदरलैंड की आर्थिक मामलों एवं जलवायु मंत्रालय की चक्रीय अर्थव्यवस्था की उप महानिदेशक मैरीके स्पाइकरबोअर ने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था डच औद्योगिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नीदरलैंड ने 2050 तक पूरी तरह चक्रीय अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को चक्रीय मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए जरूरी बताया। WCEF 2026 में नीदरलैंड की 20 से अधिक कंपनियां और संगठन हिस्सा ले रहे हैं।

135 प्रदर्शक दिखा रहे चक्रीय समाधान

WCEF 2026 के तहत आयोजित प्रदर्शनी में 135 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक अपने व्यावहारिक चक्रीय समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। यहां संसाधन दक्षता, पुनर्चक्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और टिकाऊ उत्पादन से जुड़े नए विचारों और तकनीकों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया। इनमें ‘उपचारित सीवेज के पुन: उपयोग के सर्वोत्तम तौर-तरीके’ और ‘स्थिरता को बढ़ावा देना-भारत की चक्रीय अर्थव्यवस्था और EPR पहलों के लिए मार्गदर्शिका’ शामिल हैं।

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