मेरठ में सैकड़ों ट्रैक्टरों संग कमिश्नरी पहुंचे किसान, मांगें न मानीं तो अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

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रिपोर्ट- मनीष पाराशर

मेरठ: भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले सोमवार को सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ मेरठ कमिश्नरी कार्यालय पहुंचे। किसानों ने ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया और मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली व्यवस्था, चकरोड़ पर कथित कब्जे, पशुओं में फैल रही बीमारियों और ग्रामीण इलाकों की अन्य समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।

किसानों का कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। हालांकि, अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी के चलते भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने किसानों को संगठित कर ट्रैक्टरों के साथ कमिश्नरी कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं।

मंडलायुक्त को सौंपा ज्ञापन, कई समस्याओं के समाधान की मांग

भाकियू (अराजनैतिक) के जिला अध्यक्ष कालू प्रधान के नेतृत्व में किसान कमिश्नरी कार्यालय पहुंचे। यहां संगठन की ओर से मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं का उल्लेख करते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई।

किसान नेताओं ने कहा कि ग्रामीण इलाकों की समस्याओं का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। इसलिए स्वास्थ्य, बिजली, रास्तों और पशुपालन से जुड़े मामलों को केवल शिकायत के स्तर पर न रखकर उनका समयबद्ध समाधान किया जाना चाहिए।

धनवंतरी हॉस्पिटल और आयुष्मान कार्ड का मुद्दा उठा

प्रदर्शन के दौरान धनवंतरी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान कथित लापरवाही और आयुष्मान कार्ड से संबंधित शिकायतों का मामला भी उठाया गया। किसान संगठन ने इन शिकायतों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

संगठन का आरोप है कि अस्पताल में उपचार से जुड़े एक मामले में पीड़ित परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी आधार पर किसान नेताओं ने पूरे प्रकरण की जांच कराकर यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड के इस्तेमाल से संबंधित शिकायतों की भी जांच की मांग की गई। किसानों ने प्रशासन से कहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए।

राली गांव में चकरोड़ पर कथित कब्जे का मामला

किसानों ने मेरठ के राली गांव में चकरोड़ पर कथित कब्जे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। भाकियू (अराजनैतिक) के अनुसार, ग्रामीण करीब आठ महीने से रास्ते से संबंधित समस्या का सामना कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि संबंधित स्थान पर दीवार बनाए जाने से ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी हो रही है।

किसान नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि मौके की जांच कराई जाए। यदि जांच में चकरोड़ पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए रास्ते को कब्जामुक्त कराया जाए। साथ ही ग्रामीणों के आवागमन की सुविधा बहाल करने की मांग भी की गई।

किसानों का कहना है कि गांवों में चकरोड़ केवल एक रास्ता नहीं बल्कि खेतों और आबादी के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम होता है। इसलिए ऐसे मामलों में राजस्व और संबंधित विभागों को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए।

गलत बिजली बिल और स्मार्ट मीटर को लेकर किसानों में नाराजगी

प्रदर्शन के दौरान बिजली विभाग से जुड़ी शिकायतें भी प्रमुखता से सामने आईं। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि कई ग्रामीणों को अधिक राशि वाले अथवा गलत बिजली बिलों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों की जांच कराकर वास्तविक खपत के आधार पर बिलों को संशोधित किया जाए।

इसके अलावा स्मार्ट मीटर को लेकर भी किसानों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। संगठन ने कहा कि स्मार्ट मीटर की व्यवस्था लागू करने के दौरान उपभोक्ताओं की शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए। किसानों का कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था के कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।

किसान नेताओं ने विद्युत विभाग से शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की, ताकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को बार-बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

खुले बिजली तार और जर्जर ट्रांसफार्मर बदलने की मांग

ज्ञापन में कमालपुर और पबली खास सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था से संबंधित समस्याओं को भी शामिल किया गया। किसानों ने खुले तारों और जर्जर ट्रांसफार्मरों का मुद्दा उठाते हुए सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की।

किसान संगठन के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में विद्युत लाइनों और ट्रांसफार्मरों की नियमित जांच जरूरी है। पुराने या क्षतिग्रस्त उपकरणों को समय रहते बदलने से संभावित समस्याओं से बचा जा सकता है।

इसके अलावा खरखौदा, खड़ौली और पबली क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण कराने तथा जहां आवश्यक हो वहां मरम्मत और सुधार कार्य कराने की मांग की गई।

पशुओं में बीमारी की रोकथाम के लिए विशेष टीकाकरण अभियान

किसानों ने पशुओं में फैल रही बीमारियों को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन से जुड़े हैं। ऐसे में पशुओं की बीमारी का सीधा प्रभाव पशुपालकों की आजीविका पर पड़ सकता है।

भाकियू (अराजनैतिक) ने पशुपालन विभाग से गांव-गांव विशेष टीकाकरण अभियान चलाने की मांग की। संगठन ने कहा कि केवल बीमारी फैलने के बाद उपचार करने के बजाय पहले से रोकथाम पर जोर दिया जाना चाहिए।

इसके लिए नियमित पशु स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण और पशुपालकों को बीमारी से बचाव के उपायों की जानकारी देने की मांग की गई। किसानों ने संबंधित विभागों से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की भी अपील की।

कालू प्रधान ने प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी

भाकियू (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष कालू प्रधान ने कहा कि किसान संगठन लंबे समय से ग्रामीणों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखता रहा है। उनका कहना है कि कई मामलों में शिकायतों के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि राली गांव के चकरोड़ का मामला लंबे समय से लंबित है। वहीं, बिजली बिल, स्मार्ट मीटर, खुले तार और जर्जर ट्रांसफार्मरों से संबंधित शिकायतों पर भी कार्रवाई की जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उन्होंने दोहराई।

कालू प्रधान ने प्रशासन से किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

किसान नेताओं ने कहा कि यदि ज्ञापन में उठाई गई समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाएगा। कालू प्रधान ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर मेरठ कमिश्नरी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जा सकता है।

हालांकि, किसान संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य प्रशासन पर अनावश्यक दबाव बनाना नहीं बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कराना है। इसके बावजूद यदि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा।

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