बिहार बाढ़ के बीच BJP विधायक निशा सिंह के बयान पर घमासान, RJD ने कहा- चुनाव में तारणहार, संकट में गंवार?
Digital UP News Desk
पटना: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। कटिहार जिले के कई इलाके भी बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र में भी बाढ़ की स्थिति को लेकर लोगों की परेशानियां सामने आ रही हैं। इसी बीच प्राणपुर से बीजेपी विधायक निशा सिंह का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसे लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने उन पर निशाना साधा है।
आरजेडी ने वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए विधायक के कथित बयान को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि संकट के समय मदद मांगने पहुंचे लोगों के साथ विधायक का रवैया संवेदनशील नहीं था। हालांकि, वायरल वीडियो के संदर्भ और उसके पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत का वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में प्राणपुर की विधायक निशा सिंह अपनी गाड़ी में बैठी नजर आ रही हैं। इसी दौरान कुछ लोग उनके पास पहुंचते हैं। वीडियो में विधायक और वहां मौजूद एक युवक के बीच बातचीत होती दिखाई देती है।
वीडियो में सुनाई दे रहे संवाद के अनुसार, विधायक कहती हैं, “अरे विधायक को दूसरा पैसा मिलता है। बात समझे, पढ़े-लिखे हैं न कि गंवार हैं?” इसके बाद युवक जवाब देता है, “पढ़े-लिखे हैं मैडम।” इस पर विधायक कथित तौर पर कहती हैं, “तो बात समझिएगा न?”
यही बातचीत अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। आरजेडी ने इस वीडियो को आधार बनाकर बीजेपी विधायक और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
RJD ने साधा निशाना, कहा- चुनाव में मतदाता तारणहार
वीडियो सामने आने के बाद आरजेडी ने बीजेपी विधायक निशा सिंह पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि चुनाव के समय जिन मतदाताओं को तारणहार समझा जाता है, वही लोग संकट के समय मदद की गुहार लगाएं तो उन्हें गंवार बताया जा रहा है।
आरजेडी ने सवाल उठाया कि जनता की समस्याओं को सरकार और प्रशासन के सामने रखने में आखिर पैसे की जरूरत क्यों होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाएं।
इसके साथ ही आरजेडी ने सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ जैसी आपदा के समय प्रभावित लोगों को राहत और सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
‘जनता के लिए मदद मांगना भी क्या पैसे का काम है?’
आरजेडी की ओर से जारी बयान में विधायक के कथित बयान को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने पूछा कि क्या सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी पैसे की जरूरत होती है? क्या जनता के लिए मदद मांगने के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं? क्या अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए भी किसी तरह का भुगतान करना पड़ता है?
आरजेडी ने अपने बयान के जरिए बीजेपी विधायक को यह संदेश देने की कोशिश की कि जिस तरह जनप्रतिनिधि चुनाव के दौरान जनता से समर्थन और वोट मांगते हैं, उसी तरह आपदा के समय उन्हें जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और प्रशासन के सामने मजबूती से आवाज उठानी चाहिए।
इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में बाढ़ के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं।
प्राणपुर में बाढ़ से परेशान हैं लोग
बिहार में मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या कई जिलों में लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। कटिहार भी उन जिलों में शामिल है जहां बाढ़ का असर कई बार व्यापक रूप से देखने को मिलता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को आवागमन, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र में भी बाढ़ से प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। विपक्ष जहां सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर अपना पक्ष रखा जाना बाकी है।
वीडियो को लेकर राजनीतिक बहस तेज
राजनीतिक दलों के बीच सोशल मीडिया अब बयानबाजी का प्रमुख माध्यम बन चुका है। किसी नेता का कोई वीडियो सामने आते ही वह तेजी से सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगता है। इसके बाद राजनीतिक दल उसी वीडियो को अपने पक्ष में इस्तेमाल करते हैं।
प्राणपुर विधायक से जुड़ा यह वीडियो भी इसी तरह राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आरजेडी ने इसे लेकर बीजेपी को घेरा है और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, किसी भी वायरल वीडियो को उसके पूरे संदर्भ के साथ देखना जरूरी होता है। वीडियो का एक छोटा हिस्सा पूरे घटनाक्रम की पूरी तस्वीर प्रस्तुत करता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
इसलिए इस मामले में विधायक का पूरा पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आपदा के समय जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण
बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि प्रभावित लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने, राहत सामग्री की व्यवस्था कराने और आवश्यक सेवाओं को सुचारु कराने में सहयोग कर सकते हैं।
ऐसे समय में जनता की अपेक्षा होती है कि उसकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए। साथ ही, जनप्रतिनिधियों से यह भी उम्मीद की जाती है कि वे प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में भूमिका निभाएं।
वहीं, जनता की भी जिम्मेदारी होती है कि वह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपनी समस्याएं शांतिपूर्ण और तथ्यात्मक तरीके से साझा करे। किसी भी आपदा की स्थिति में संवाद और सहयोग का माहौल राहत कार्यों को बेहतर बनाने में मदद करता है।
RJD ने सरकार से मांगा जवाब
आरजेडी ने इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी और सरकार पर राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि बाढ़ से प्रभावित लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाना चाहिए। इसके साथ ही पार्टी ने विधायक के कथित बयान को लेकर भी स्पष्टीकरण की मांग की है।
फिलहाल, वायरल वीडियो के आधार पर बिहार की राजनीति में एक नया मुद्दा जरूर उभर आया है। बाढ़ के बीच सामने आए इस वीडियो ने स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के व्यवहार और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा छेड़ दी है।
हालांकि, पूरे मामले की तस्वीर विधायक निशा सिंह के विस्तृत पक्ष और वीडियो के पूर्ण संदर्भ के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों को अंतिम तथ्य मानने के बजाय संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान का इंतजार करना उचित होगा।

