कानपुर में हिन्दू रक्षा दल के जिला अध्यक्ष को धमकी, परिवार सहित नुकसान पहुंचाने की चेतावनी से हड़कंप – तुरंत पढ़िए
Digital UP News
कानपुर: शहर में हिन्दू रक्षा दल के जिला अध्यक्ष नीरज निश्चल श्रीवास्तव को पाकिस्तान के एक व्हाट्सऐप नंबर से कथित तौर पर धमकी मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि व्हाट्सऐप के जरिए उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। इसके साथ ही धमकी देने वाले व्यक्ति ने कथित रूप से खुद को पाकिस्तान में सक्रिय बताए जाने वाले शहजाद भट्टी का सहयोगी बताया है। हालांकि, इन दावों की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामला सामने आने के बाद नीरज निश्चल श्रीवास्तव ने पुलिस प्रशासन से शिकायत कर पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराने और धमकी देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, घटना की जानकारी सामने आने के बाद संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों में भी चिंता का माहौल है।
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं नीरज निश्चल
बताया गया है कि नीरज निश्चल श्रीवास्तव लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। मंदिर निर्माण, धार्मिक स्थलों से संबंधित विषयों और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर वह सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते रहे हैं। इसी सक्रियता के बीच कथित धमकी मिलने से मामला चर्चा में आ गया है।
नीरज निश्चल का कहना है कि सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाना उनका अधिकार है। किसी व्यक्ति को उनके विचारों या कार्यों से असहमति है तो वह लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपनी बात रख सकता है। हालांकि, परिवार को धमकी देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की धमकियों से वह अपने सामाजिक कार्यों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस और प्रशासन के माध्यम से ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
पाकिस्तान के नंबर से संदेश मिलने का दावा
नीरज निश्चल श्रीवास्तव के अनुसार, जिस व्हाट्सऐप नंबर से कथित धमकी मिली, वह पाकिस्तान का नंबर बताया जा रहा है। संदेश में परिवार सहित नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दिए जाने का आरोप है। इसके अलावा, संदेश भेजने वाले व्यक्ति ने खुद को कथित तौर पर एक ऐसे व्यक्ति का सहयोगी बताया, जिसका नाम शहजाद भट्टी बताया जा रहा है।
हालांकि, केवल किसी व्यक्ति के दावे के आधार पर उसके किसी संगठन या आतंकी नेटवर्क से संबंध को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसलिए इस पहलू की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप संदेश और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामले की पड़ताल कर सकती है।
पुलिस जांच से सामने आएगी धमकी की वास्तविकता
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में कौन है और उसका उद्देश्य क्या था। इसके लिए पुलिस द्वारा तकनीकी जांच किए जाने की आवश्यकता है। व्हाट्सऐप नंबर की जानकारी, संदेशों का रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इसके अलावा, यदि जांच में धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान सामने आती है तो उसके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में किसी आतंकी संगठन या किसी विशेष नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता
कथित धमकी में परिवार को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आने के बाद नीरज निश्चल श्रीवास्तव और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने भी प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने और आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।
संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि सामाजिक या धार्मिक विषयों पर किसी व्यक्ति की सक्रियता को धमकी के जरिए रोकने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि किसी भी विवाद या मतभेद का समाधान कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
नीरज निश्चल श्रीवास्तव ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धमकी मिलने के बावजूद वह कानून व्यवस्था में विश्वास रखते हैं और किसी भी परिस्थिति में कानून अपने हाथ में नहीं लेंगे। उनका कहना है कि सामाजिक कार्य जारी रहेंगे, लेकिन किसी भी कार्रवाई का रास्ता कानून के अनुसार ही होगा।
फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि धमकी किस व्यक्ति ने भेजी, उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था और उसके द्वारा बताए गए कथित संबंधों में कितनी सच्चाई है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।

