गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा होगी AI से लैस, राम मंदिर समेत VIP प्रतिष्ठानों के लिए बड़े सुरक्षा इंतजाम

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Digital UP News Desk

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में शासन ने कई अहम खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसके तहत गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा।

मंदिर परिसर में मौजूदा सीसीटीवी नेटवर्क को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित सर्विलांस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा फेस रिकग्निशन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 23.07 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। वहीं, प्रदेश पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन से जुड़े आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की खरीद पर 10.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इसके साथ ही अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर समेत कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीम और बम निरोधक दस्तों की क्षमताओं को भी बढ़ाया जाएगा।

गोरखनाथ मंदिर में AI से होगी निगरानी

गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और समय-समय पर वीवीआईपी तथा अन्य महत्वपूर्ण लोगों का भी आवागमन होता है। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में पहले से लगे सीसीटीवी कैमरों को आधुनिक वीडियो मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा जाएगा। कुल 392 कैमरों के लिए वीडियो मैनेजमेंट सिस्टम इंटीग्रेशन तैयार किया जाएगा। इससे अलग-अलग स्थानों से आने वाले वीडियो फीड को एकीकृत तरीके से मॉनिटर करना आसान होगा।

इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्था में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) जैसी तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इससे निगरानी व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

मंदिर परिसर के साथ-साथ वीवीआईपी रूट, हेलिपैड और प्राचीन मानसरोवर मंदिर क्षेत्र तक निगरानी का दायरा बढ़ाया जाएगा। साथ ही, इंटीग्रेटेड पब्लिक एड्रेस सिस्टम और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को भी सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनाया जाएगा।

23.07 करोड़ रुपये से तैयार होगा आधुनिक सुरक्षा सिस्टम

गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए मंजूर 23.07 करोड़ रुपये की राशि से केवल कैमरे लगाने का काम नहीं होगा, बल्कि मौजूदा सुरक्षा ढांचे को एकीकृत तकनीकी प्रणाली में बदला जाएगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग सुरक्षा प्रणालियों को एक प्लेटफॉर्म से जोड़ना है।

इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से सुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं और कैमरों की निगरानी को केंद्रीकृत किया जा सकेगा। वहीं, पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए आवश्यकता पड़ने पर परिसर में मौजूद लोगों तक महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

इस तरह, मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में पारंपरिक निगरानी के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। खास तौर पर भीड़ वाले क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

पुलिस बल के लिए आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की खरीद

इसके साथ ही शासन ने प्रदेश पुलिस की कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की खरीद को भी मंजूरी दी है। इसके लिए 10.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

प्रस्ताव में अलग-अलग श्रेणी के टियर स्मोक और अन्य भीड़ नियंत्रण उपकरण शामिल हैं। इनका इस्तेमाल निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल और कानून के अनुरूप कानून-व्यवस्था की चुनौती वाली परिस्थितियों में किया जाता है।

इस खरीद का उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना है, ताकि बड़े आयोजनों, भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील परिस्थितियों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर ढंग से संभाला जा सके। हालांकि, ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल निर्धारित नियमों और प्रशिक्षित कर्मियों की निगरानी में ही किया जाता है।

राम मंदिर समेत महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए QRT मजबूत होगी

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर परिसर की सुरक्षा को भी इस योजना में विशेष महत्व दिया गया है। इसके अलावा एयरपोर्ट, लोकभवन, मेट्रो, आरआरटीएस, हाईकोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी है।

इन स्थानों पर उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स यानी UPSSF की त्वरित प्रतिक्रिया टीमों और बम निरोधक दस्तों को अतिरिक्त क्षमताओं से लैस किया जाएगा।

इसके तहत विशेष सुरक्षा जरूरतों के लिए उपकरणों की खरीद का प्रस्ताव है। इनमें तीन स्नाइपर राइफल और 14 टेलीस्कोपिक सर्च मिरर भी शामिल हैं। इस खरीद के लिए 52.60 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है।

टेलीस्कोपिक सर्च मिरर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल सुरक्षा जांच के दौरान ऐसे स्थानों की निगरानी में किया जा सकता है, जहां सामान्य तरीके से पहुंचना कठिन हो। वहीं, त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता बनाए रखना है।

जनप्रतिनिधियों और वीवीआईपी की सुरक्षा पर भी जोर

शासन ने जनप्रतिनिधियों और वीवीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुराने हथियारों को बदलने की योजना को भी मंजूरी दी है। इसके तहत 800 नई 9 एमएम सब मशीन गन और 2.56 लाख कारतूस खरीदे जाने का प्रस्ताव है।

इस पूरी खरीद पर करीब 5.59 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सुरक्षा में तैनात कर्मियों को आधुनिक और मानक उपकरण उपलब्ध कराना बताया गया है।

हालांकि, सुरक्षा से जुड़े किसी भी उपकरण की उपलब्धता के साथ प्रशिक्षण और निर्धारित संचालन प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए ऐसी व्यवस्थाओं में उपकरणों के साथ प्रशिक्षित बल की भूमिका भी अहम रहती है।

महिला PAC बटालियनों को भी मिलेंगे नए उपकरण

प्रदेश की तीन महिला पीएसी बटालियनों के लिए भी नए सुरक्षा उपकरण खरीदे जाएंगे। प्रस्ताव के मुताबिक, इन बटालियनों के लिए 373 पिस्टल और 90 ऑटोमैटिक असॉल्ट राइफल खरीदी जाएंगी। इस खरीद पर करीब 1.94 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

महिला बटालियनों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने का उद्देश्य उनकी परिचालन क्षमता और सुरक्षा जिम्मेदारियों को बेहतर बनाना है। विशेष आयोजनों और महत्वपूर्ण ड्यूटी में महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उनके लिए जरूरी संसाधनों को मजबूत करना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

विस्फोटक पहचान की क्षमता भी बढ़ेगी

सुरक्षा व्यवस्था में विस्फोटक पहचान क्षमता को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए बम डिस्पोजल एंड डिटेक्शन स्क्वाड यानी BDDS, एंटी-टेररिस्ट चेक टीमों और अन्य संबंधित सुरक्षा टीमों को 14 हैंड-हेल्ड एक्सप्लोसिव डिटेक्टर उपलब्ध कराने की योजना है।

इस पर 4.19 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल प्रशिक्षित सुरक्षा दल संदिग्ध वस्तुओं या स्थानों की जांच के दौरान करते हैं। इससे सुरक्षा जांच को तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है।

खासकर धार्मिक स्थलों, एयरपोर्ट, सरकारी प्रतिष्ठानों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा जांच के दौरान विस्फोटक पहचान की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। इसलिए आधुनिक डिटेक्शन उपकरणों को सुरक्षा ढांचे में शामिल करना एक अहम कदम माना जा रहा है।

तकनीक और सुरक्षा बलों के बेहतर तालमेल पर जोर

कुल मिलाकर, शासन के इन फैसलों में दो प्रमुख पहलुओं पर जोर दिखाई देता है। पहला, संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और दूसरा, सुरक्षा बलों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना।

गोरखनाथ मंदिर में AI आधारित निगरानी, कैमरा नेटवर्क का एकीकरण और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी सुविधाएं सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करेंगी। वहीं, अयोध्या समेत महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर त्वरित प्रतिक्रिया टीम और बम निरोधक दस्तों की क्षमता बढ़ाने से आपात परिस्थितियों में प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, जनप्रतिनिधियों, वीवीआईपी और महिला पीएसी बटालियनों के लिए आधुनिक उपकरणों की खरीद भी सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।

गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए 23.07 करोड़ रुपये की मंजूरी

उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर शासन का फोकस अब आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों पर है। गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए 23.07 करोड़ रुपये की मंजूरी और राम जन्मभूमि परिसर समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थानों के लिए सुरक्षा उपकरणों की खरीद इसी दिशा में बड़ा कदम है।

AI आधारित निगरानी, आधुनिक कमांड सेंटर, त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की क्षमता और विस्फोटक पहचान उपकरणों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को अधिक तकनीक-सक्षम बनाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में इन व्यवस्थाओं के लागू होने के बाद संवेदनशील स्थलों की निगरानी और सुरक्षा संचालन को और अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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