अमरमणि त्रिपाठी के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों पर निधि शुक्ला की चेतावनी, टिकट मिला तो कानूनी लड़ाई की बात
Digital UP News Desk
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व मंत्री और मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अमरमणि त्रिपाठी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के बीच दिवंगत कवयित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि अमरमणि त्रिपाठी को कांग्रेस में शामिल किया गया या आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट दिया गया तो वह इसका विरोध करेंगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाएंगी।
निधि शुक्ला ने कांग्रेस नेतृत्व से अपील की है कि पार्टी किसी ऐसे व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण न दे, जिसे गंभीर आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को महिला आयोग और अदालत तक ले जाने के साथ ही लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी करेंगी।
अमरमणि के कांग्रेस में जाने की अटकलों से राजनीतिक हलचल
अमरमणि त्रिपाठी की ओर से अगले विधानसभा चुनाव में उतरने की इच्छा जताए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनके संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हुई हैं। इसी बीच निधि शुक्ला ने कांग्रेस के कुछ नेताओं की गतिविधियों का हवाला देते हुए पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
निधि शुक्ला के मुताबिक, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त ने आठ सितंबर को महाराजगंज के फरेन्दा विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान अमरमणि त्रिपाठी के स्वागत और उन्हें कांग्रेस से जोड़ने को लेकर कथित तौर पर चर्चा हुई। निधि शुक्ला ने कहा कि इस तरह की चर्चा से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।
उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2004 में जब उन्होंने अपनी बहन मधुमिता शुक्ला के मामले में न्याय की लड़ाई आगे बढ़ाई थी, तब वह तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिली थीं। उनके अनुसार, सोनिया गांधी ने उनकी बात सुनी थी और न्याय की लड़ाई में समर्थन का भरोसा दिया था।
निधि शुक्ला बोलीं- महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर समझौता नहीं
निधि शुक्ला ने कहा कि वह स्वयं कांग्रेस की सदस्य हैं और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व महिलाओं के सम्मान तथा बेहतर राजनीतिक मानकों की बात करता रहा है। ऐसे में उनका मानना है कि अमरमणि त्रिपाठी को पार्टी से जोड़ने की किसी भी कोशिश पर कांग्रेस नेतृत्व को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अतीत में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी ने भी अमरमणि त्रिपाठी से दूरी बनाए रखी थी। इसलिए अब यदि उन्हें कांग्रेस में शामिल करने की कोई कोशिश होती है तो वह इसका विरोध करेंगी।
निधि शुक्ला ने कहा कि मधुमिता को न्याय दिलाने की उनकी लड़ाई करीब 25 वर्षों से जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल द्वारा अमरमणि त्रिपाठी को राजनीतिक संरक्षण देने की कोशिश का वह विरोध करेंगी।
टिकट मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
निधि शुक्ला ने कहा है कि यदि अमरमणि त्रिपाठी को किसी राजनीतिक दल की ओर से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया जाता है तो वह महिला आयोग में शिकायत करेंगी। इसके साथ ही अदालत का दरवाजा खटखटाने और विरोध प्रदर्शन करने की भी बात कही है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने धरना देंगी और भूख हड़ताल भी करेंगी। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और न्याय से जुड़ा विषय है।
इसी क्रम में निधि शुक्ला ने उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष संभावित विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य चुनाव आयुक्त को पत्र भी भेजा है। पत्र में उन्होंने अमरमणि त्रिपाठी की चुनावी पात्रता और उनके खिलाफ लंबित मामलों का उल्लेख करते हुए मांग की है कि चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पहले इन बिंदुओं को रिकॉर्ड पर लिया जाए।
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में आजीवन कारावास
मधुमिता शुक्ला की हत्या नौ मई 2003 को लखनऊ के महानगर थाना क्षेत्र में हुई थी। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की थी। इसके बाद देहरादून की विशेष CBI अदालत ने 24 अक्टूबर 2007 को अमरमणि त्रिपाठी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में इस सजा को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
हालांकि, वर्ष 2023 में सजा में छूट से संबंधित आदेश के आधार पर अमरमणि त्रिपाठी को जेल से रिहा कर दिया गया था। इसके बाद से ही समय-समय पर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं सामने आती रही हैं।
निधि शुक्ला ने अपने पत्र में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि इस प्रावधान के तहत अमरमणि त्रिपाठी की चुनाव लड़ने की अयोग्यता वर्ष 2029 तक प्रभावी रह सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की मौजूदा चुनावी पात्रता का अंतिम निर्धारण संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम निर्वाचन प्राधिकरण के निर्णय के आधार पर होता है।
अन्य मामलों का भी किया उल्लेख
निधि शुक्ला ने राज्य चुनाव आयुक्त को भेजे पत्र में बस्ती में दर्ज अपहरण के मामले का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि इस मामले में अदालती कार्यवाही लंबित है। उन्होंने अमरमणि के खिलाफ जारी विभिन्न कानूनी आदेशों और उनकी संपत्ति से संबंधित कार्रवाई का भी हवाला दिया है।
निधि शुक्ला का आरोप है कि इन कानूनी विवादों के बावजूद अमरमणि त्रिपाठी महाराजगंज के नौतनवा और फरेन्दा क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद उनकी चुनावी पात्रता की विधिवत जांच की जाए।
मधुमिता शुक्ला की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था
मधुमिता शुक्ला लखीमपुर खीरी की रहने वाली कवयित्री थीं। वह विशेष रूप से वीर रस की कविताओं के लिए जानी जाती थीं और विभिन्न मंचों पर काव्य पाठ करती थीं। मई 2003 में लखनऊ में उनकी हत्या के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया था। पोस्टमॉर्टम में मधुमिता के गर्भवती होने की पुष्टि हुई थी। बाद में DNA जांच से बच्चे के पितृत्व को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिसके बाद अमरमणि त्रिपाठी और मधुमिता शुक्ला के संबंधों की चर्चा सार्वजनिक हुई।
उस समय उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी और अमरमणि त्रिपाठी राज्य सरकार में मंत्री थे। हत्या के मामले में उनकी दोषसिद्धि के बाद यह प्रकरण उत्तर प्रदेश की राजनीति और आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े चर्चित मामलों में शामिल हो गया।
अमरमणि का राजनीतिक सफर भी रहा है लंबा
अमरमणि त्रिपाठी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से की थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया। उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेता हरिशंकर तिवारी को उनका राजनीतिक गुरु माना जाता रहा है।
वर्ष 1996 में उन्होंने महाराजगंज की नौतनवा विधानसभा सीट से पहला चुनाव जीता। इसके बाद वह इस सीट से लगातार चार बार विधायक रहे। वर्ष 1997 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और 1997 से 2000 के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे।
मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के बाद भी उनका राजनीतिक प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। वर्ष 2007 में उन्होंने नौतनवा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया था।
अब निगाहें कांग्रेस के अगले कदम पर
अमरमणि त्रिपाठी के संभावित कांग्रेस प्रवेश और आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बीच निधि शुक्ला की चेतावनी ने राजनीतिक बहस को नया आयाम दे दिया है। एक ओर जहां अमरमणि की राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा है, वहीं दूसरी ओर निधि शुक्ला कानूनी और लोकतांत्रिक माध्यमों से इसका विरोध करने की बात कह रही हैं।
फिलहाल, अमरमणि त्रिपाठी को कांग्रेस में औपचारिक रूप से शामिल किए जाने या पार्टी की ओर से उन्हें चुनावी टिकट दिए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व का रुख इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माना जाएगा।

