GSVM मेडिकल कॉलेज में ACME in OBG सेमिनार, बेहतर चिकित्सा शिक्षा और रोगी सेवा पर जोर
रिपोर्ट- सर्वेश सोनू शर्मा
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओर से सोमवार को न्यू SIFPSA में “ACME in OBG – Learning Today for Better Care Tomorrow” विषय पर शैक्षणिक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना, फैकल्टी एवं रेजिडेंट चिकित्सकों के प्रशिक्षण को और बेहतर बनाना तथा इसके माध्यम से मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। साथ ही, प्रतिभागियों को आधुनिक शिक्षण मॉडल और प्रशिक्षण से संबंधित व्यावहारिक जानकारियां भी दी गईं। सेमिनार में विभाग के फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट चिकित्सकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में ACME की भूमिका पर चर्चा
सेमिनार में डॉ. पाविका लाल ने “Role of ACME in Medical Education” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में उन्नत प्रशिक्षण की आवश्यकता और इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में लगातार नई तकनीकों, उपचार पद्धतियों और क्लिनिकल प्रक्रियाओं का विकास हो रहा है। ऐसे में चिकित्सकों और चिकित्सा शिक्षकों के लिए अपने ज्ञान एवं कौशल को लगातार अपडेट करना जरूरी है।
उन्होंने चिकित्सा शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण और क्लिनिकल अनुभव से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, बेहतर शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों और रेजिडेंट चिकित्सकों में निर्णय लेने की क्षमता तथा मरीजों की आवश्यकताओं को समझने का कौशल विकसित किया जा सकता है।
इस दौरान ACME प्रशिक्षण की भूमिका को चिकित्सा शिक्षा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझाया गया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि एक बेहतर प्रशिक्षित शिक्षक ही आगे चलकर सक्षम और संवेदनशील चिकित्सकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ACME Training से मिली सीख पर प्रकाश
इसके बाद डॉ. शैली अग्रवाल ने “Key Takeaways from ACME Training” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने ACME प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त प्रमुख सीख और उनके व्यावहारिक उपयोग के बारे में जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे प्राप्त ज्ञान को दैनिक शिक्षण एवं क्लिनिकल अभ्यास में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इसके लिए शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों और रेजिडेंट चिकित्सकों के साथ संवादात्मक तरीके से जुड़ने की आवश्यकता होती है।
साथ ही, उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान विकसित किए गए विभिन्न कौशलों को मेडिकल कॉलेज की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल करने पर जोर दिया। इससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बनाई जा सकती है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चिकित्सा शिक्षा में केवल जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। बल्कि छात्रों को उस जानकारी का विश्लेषण करने, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने और उसे मरीज की देखभाल में लागू करने के लिए तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
SNAPPs Model से कराया परिचित
सेमिनार का एक महत्वपूर्ण आकर्षण डॉ. रेनू गुप्ता की प्रस्तुति रही। उन्होंने फैकल्टी एवं रेजिडेंट चिकित्सकों को SNAPPs Model से परिचित कराया। उन्होंने केस-आधारित शिक्षण और क्लिनिकल रीजनिंग के क्षेत्र में इस मॉडल की उपयोगिता को विस्तार से समझाया।
SNAPPs Model के माध्यम से चिकित्सकों को किसी क्लिनिकल केस पर व्यवस्थित तरीके से विचार करने और अपनी सोच को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। इससे रेजिडेंट चिकित्सकों में क्लिनिकल परिस्थितियों का विश्लेषण करने तथा उपलब्ध जानकारी के आधार पर उचित निष्कर्ष तक पहुंचने की क्षमता विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि केस-आधारित शिक्षण चिकित्सा शिक्षा को अधिक व्यावहारिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब किसी वास्तविक या परिस्थितिजन्य केस के आधार पर चर्चा की जाती है, तो रेजिडेंट चिकित्सक केवल तथ्य याद करने के बजाय उनके पीछे के कारणों और संभावित उपचार विकल्पों को समझने का प्रयास करते हैं।
इस प्रकार, क्लिनिकल रीजनिंग को मजबूत करने के साथ-साथ यह पद्धति चिकित्सकों में आत्मविश्वास और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने में भी सहायक हो सकती है।
विभागाध्यक्ष के निर्देशन में हुआ आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सीमा द्विवेदी के निर्देशन में किया गया। उनके मार्गदर्शन में आयोजित इस शैक्षणिक कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और क्लिनिकल प्रशिक्षण को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में डॉ. नीना गुप्ता और डॉ. बंदना शर्मा ने चेयरपर्सन के रूप में अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों का मार्गदर्शन किया और चिकित्सा शिक्षा से संबंधित विषयों पर चर्चा को आगे बढ़ाया।
इसके अलावा विभाग के फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट चिकित्सकों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने प्रस्तुत किए गए विषयों को ध्यानपूर्वक सुना और चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक प्रशिक्षण विधियों के महत्व पर विचार साझा किए।
बेहतर रोगी सेवा के लिए निरंतर सीखना जरूरी
सेमिनार में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि चिकित्सा क्षेत्र में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। नई चिकित्सा तकनीक, शोध, उपचार पद्धतियां और शिक्षण मॉडल लगातार विकसित हो रहे हैं। इसलिए चिकित्सकों और चिकित्सा शिक्षकों के लिए निरंतर सीखते रहना आवश्यक है।
कार्यक्रम में यह संदेश सामने आया कि निरंतर सीखना, सहयोग और नवाचार बेहतर चिकित्सा शिक्षा की मजबूत आधारशिला हैं। जब शिक्षक नए तरीकों को अपनाते हैं और रेजिडेंट चिकित्सकों को व्यावहारिक एवं केस-आधारित प्रशिक्षण दिया जाता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव अंततः रोगी देखभाल पर भी पड़ता है।
वहीं, सहयोग की भावना चिकित्सा शिक्षा को और प्रभावी बनाती है। फैकल्टी और रेजिडेंट चिकित्सकों के बीच बेहतर संवाद से जटिल क्लिनिकल परिस्थितियों पर सामूहिक रूप से विचार किया जा सकता है। इससे सीखने के साथ-साथ मरीजों की देखभाल से जुड़े निर्णयों को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
शिक्षण से लेकर मरीजों की देखभाल तक असर
सेमिनार का व्यापक उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की बेहतर देखभाल के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना रहा। चिकित्सा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का सीधा संबंध भविष्य के चिकित्सकों की दक्षता से जुड़ा होता है। ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक शिक्षण तकनीकों और क्लिनिकल रीजनिंग पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है।
इसके अलावा, स्त्री एवं प्रसूति रोग जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा क्षेत्र में चिकित्सकों को नवीनतम ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से लगातार अपडेट रखना आवश्यक है। इस दिशा में आयोजित होने वाले शैक्षणिक कार्यक्रम फैकल्टी और रेजिडेंट चिकित्सकों के लिए सीखने तथा अपने अनुभव साझा करने का प्रभावी मंच उपलब्ध कराते हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित यह सेमिनार भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने न केवल आधुनिक शिक्षण पद्धतियों की जानकारी दी, बल्कि उनके व्यावहारिक इस्तेमाल पर भी चर्चा की।

