समुद्र लक्ष्मण अभ्यास में आईएनएस मैसूर ने दिखाया दम, मलेशियाई नौसेना के साथ बढ़ा समुद्री सहयोग
Digital UP News Desk
मलेशिया: भारत और मलेशिया के बीच समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस मैसूर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय नौसेना की परिचालन तैनाती के तहत आईएनएस मैसूर ने 9 से 12 सितंबर 2026 तक मलेशिया के लुमुट में रॉयल मलेशियाई नौसेना के साथ आयोजित संयुक्त नौसैनिक अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण’ के चौथे संस्करण में हिस्सा लिया। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन समझ, समन्वय और अंतर-संचालनीयता को और बेहतर बनाना रहा।
भारत और मलेशिया के बीच लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में सहयोग जारी है। ऐसे में समुद्री क्षेत्र में आयोजित यह अभ्यास दोनों देशों के नौसैनिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करता है। इसके माध्यम से दोनों नौसेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने, पेशेवर अनुभव साझा करने और संयुक्त रूप से समुद्री गतिविधियों को अंजाम देने का अवसर मिला।
लुमुट में हुआ अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण’ का चौथा संस्करण
‘समुद्र लक्ष्मण’ भारत और मलेशिया की नौसेनाओं के बीच होने वाला महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास है। इसके चौथे संस्करण में भारतीय नौसेना की ओर से आईएनएस मैसूर ने भाग लिया, जबकि रॉयल मलेशियाई नौसेना की ओर से उसके युद्धपोत केडी लेकिर और केडी गगाह समुदेरा अभ्यास का हिस्सा बने।
यह अभ्यास मुख्य रूप से दो चरणों में आगे बढ़ा। पहले चरण में बंदरगाह आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया, जबकि इसके बाद समुद्री परिचालन चरण में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों ने संयुक्त अभ्यास किया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दोनों नौसेनाओं के अधिकारियों और कर्मियों के बीच पेशेवर संवाद को विशेष महत्व दिया गया।
बंदरगाह चरण में हुआ पेशेवर आदान-प्रदान
अभ्यास के बंदरगाह चरण के दौरान भारतीय नौसेना और रॉयल मलेशियाई नौसेना के अधिकारियों तथा कर्मियों के बीच विभिन्न पेशेवर गतिविधियां और बातचीत हुईं। इस दौरान दोनों पक्षों को अपने अनुभव साझा करने और समुद्री परिचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला।
इसके अलावा, ऐसे संवादों से दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ विकसित करने में मदद मिलती है। सैन्य अभ्यास केवल समुद्र में होने वाली गतिविधियों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके माध्यम से दोनों देशों के सैन्यकर्मी एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, प्रक्रियाओं और परिचालन जरूरतों को भी बेहतर ढंग से समझते हैं।
इस दृष्टि से ‘समुद्र लक्ष्मण’ का बंदरगाह चरण दोनों देशों के बीच पेशेवर संबंधों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
समुद्री चरण में साथ आए तीनों युद्धपोत
बंदरगाह चरण के बाद अभ्यास का समुद्री परिचालन चरण आयोजित किया गया। इस चरण में भारतीय नौसेना के आईएनएस मैसूर ने रॉयल मलेशियाई नौसेना के केडी लेकिर और केडी गगाह समुदेरा के साथ संयुक्त समुद्री गतिविधियों में हिस्सा लिया।
समुद्री चरण के दौरान दोनों देशों के जहाजों ने समन्वित अभ्यास किए। इन गतिविधियों का प्रमुख उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता यानी Interoperability को बेहतर बनाना रहा। अंतर-संचालनीयता का अर्थ है कि अलग-अलग देशों की नौसेनाएं जरूरत पड़ने पर साझा प्रक्रियाओं और बेहतर समन्वय के साथ प्रभावी तरीके से काम कर सकें।
इस तरह के अभ्यास समुद्री परिस्थितियों में आपसी तालमेल को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों देशों के नौसैनिक बलों को संयुक्त परिचालन के लिए बेहतर तरीके से तैयार करते हैं।
आईएनएस मैसूर की अहम भूमिका
भारतीय नौसेना का आईएनएस मैसूर इस अभ्यास में भारत के प्रतिनिधि युद्धपोत के रूप में शामिल हुआ। उसकी भागीदारी ने भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और क्षेत्रीय समुद्री सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
भारतीय नौसेना लगातार मित्र देशों के साथ विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समुद्री अभ्यासों में हिस्सा लेती रही है। इन अभ्यासों का उद्देश्य केवल सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन करना नहीं होता, बल्कि इनके माध्यम से साझा अनुभव, पेशेवर ज्ञान और परिचालन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया जाता है।
इसी क्रम में आईएनएस मैसूर की ‘समुद्र लक्ष्मण’ में भागीदारी भारत-मलेशिया नौसैनिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती
अभ्यास के सफल आयोजन ने भारत और मलेशिया के बीच बढ़ते नौसैनिक सहयोग को एक और मजबूत आधार दिया है। दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग को लेकर लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं।
ऐसे में नियमित नौसैनिक अभ्यास दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ाने का अवसर देते हैं। साथ ही, इससे दोनों पक्षों के बीच विश्वास और पेशेवर संबंध भी मजबूत होते हैं।
‘समुद्र लक्ष्मण’ का चौथा संस्करण इसी व्यापक समुद्री साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ता हुआ कदम है।
12वीं भारत-मलेशिया उप-समिति बैठक से जुड़ा प्रयास
यह अभ्यास हालिया भारत-मलेशिया द्विपक्षीय रक्षा समन्वय को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण है। 1 जुलाई 2026 को आयोजित 12वीं भारत-मलेशिया उप-समिति बैठक के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को और आगे बढ़ाने के प्रयास जारी रहे हैं।
इसी पृष्ठभूमि में समुद्री अभ्यास का आयोजन दोनों देशों के बीच नियमित पेशेवर संपर्क और व्यावहारिक सहयोग को दर्शाता है। इस तरह की गतिविधियां रक्षा संबंधों को केवल उच्चस्तरीय बैठकों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जमीनी और परिचालन स्तर पर भी मजबूत करती हैं।
भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण आधार
भारत और मलेशिया के बीच रक्षा संबंध लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास भविष्य में दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग के नए अवसरों का आधार बन सकते हैं।
‘समुद्र लक्ष्मण’ के दौरान हुए पेशेवर आदान-प्रदान और संयुक्त समुद्री अभ्यास से दोनों नौसेनाओं को वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में समन्वय का अनुभव प्राप्त हुआ। परिणामस्वरूप, इससे दोनों देशों के नौसैनिक बलों के बीच बेहतर परिचालन समझ विकसित करने में मदद मिलती है।
इसके साथ ही, नियमित अभ्यासों के माध्यम से साझा प्रक्रियाओं को समझने और संयुक्त गतिविधियों में तालमेल बढ़ाने की क्षमता भी मजबूत होती है।
भारत-मलेशिया समुद्री साझेदारी की दिशा में अहम कदम
समुद्र लक्ष्मण अभ्यास 2026 भारत और मलेशिया के बीच बढ़ती समुद्री साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। 9 से 12 सितंबर के बीच लुमुट में आयोजित इस अभ्यास में आईएनएस मैसूर और रॉयल मलेशियाई नौसेना के जहाजों की भागीदारी ने दोनों देशों के बीच परिचालन सहयोग को मजबूत किया।
वहीं, बंदरगाह चरण में हुए पेशेवर संवाद और समुद्री चरण में किए गए संयुक्त अभ्यासों ने आपसी समझ तथा अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने में योगदान दिया। इसके अलावा, 12वीं भारत-मलेशिया उप-समिति बैठक जैसे हालिया द्विपक्षीय प्रयासों के साथ यह अभ्यास दोनों देशों के रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

