बिधनू में पंचायत सचिवालय की व्यवस्था पर सवाल, सचिव की कुर्सी पर पंचायत सहायक के पति के बैठने का आरोप

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रिपोर्ट- सर्वेश सोनू शर्मा 

कानपुर : विकासखंड बिधनू की ग्राम पंचायत दलेलपुर में पंचायती राज व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने पंचायत सचिवालय के कामकाज में कथित अनियमितताओं और एक अनधिकृत व्यक्ति की मौजूदगी को लेकर शिकायतें सामने रखी हैं। आरोप है कि पंचायत सहायक के पद पर नियुक्त महिला की जगह उनके पति सचिवालय में बैठकर सरकारी कार्यों से जुड़े कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, दलेलपुर ग्राम पंचायत में कुछ महीने पहले पारुल नाम की महिला की नियुक्ति पंचायत सहायक के पद पर हुई थी। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि वह नियमित रूप से पंचायत सचिवालय में मौजूद नहीं रहतीं। इसके बजाय उनके पति अभिषेक पाल के सचिवालय में बैठने और पंचायत से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहने की बात कही जा रही है।

सचिवालय में सरकारी कुर्सी पर बैठने की तस्वीर सामने आई

मामले को लेकर सामने आई तस्वीर में एक युवक पंचायत राज विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के बोर्ड के सामने सरकारी कुर्सी पर बैठा दिखाई दे रहा है। उसके सामने कुछ सरकारी फाइलें रखी हैं और वह मोबाइल फोन पर बातचीत करता नजर आ रहा है। स्थानीय स्तर पर युवक की पहचान पंचायत सहायक पारुल के पति अभिषेक पाल के रूप में बताई जा रही है।

हालांकि, किसी व्यक्ति की तस्वीर के आधार पर उसके द्वारा सरकारी कार्य किए जाने की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। इसलिए पूरे मामले में संबंधित विभाग की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि कोई अनधिकृत व्यक्ति सरकारी पदाधिकारी की जिम्मेदारियों से जुड़े कार्य कर रहा है, तो यह पंचायती राज व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है।

ग्रामीणों ने उठाए पंचायत के कामकाज पर सवाल

दलेलपुर के ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिवालय आम लोगों के लिए सरकारी योजनाओं, प्रमाणपत्रों, पंचायत संबंधी दस्तावेजों और विभिन्न विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी हासिल करने का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में सचिवालय में अधिकृत कर्मचारी की मौजूदगी और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम होना जरूरी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सहायक की नियुक्ति के बाद भी यदि उनके स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति नियमित रूप से सचिवालय में बैठता है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पंचायत से संबंधित रिकॉर्ड, सरकारी फाइलों और योजनाओं के संचालन तक किस-किस व्यक्ति की पहुंच है।

इसके अलावा, ग्रामीणों ने अधिकारियों से यह भी मांग की है कि पंचायत सचिवालय में कर्मचारियों की उपस्थिति, कार्यों के निष्पादन और सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव की जांच कराई जाए। इससे वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

अभिषेक पाल पर पहले भी आरोप लगने का दावा

स्थानीय ग्रामीणों ने अभिषेक पाल पर पंचायत के कार्यों को लेकर पूर्व में भी आरोप लगाए जाने का दावा किया है। ग्रामीणों के अनुसार, उन पर पंचायत के कुछ कार्यों को कथित तौर पर मानकों के अनुरूप नहीं कराए जाने तथा सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ चुके हैं।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग पुराने मामलों और वर्तमान शिकायतों की निष्पक्ष जांच करे। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं मिलते हैं तो संबंधित व्यक्ति को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि मामले की जानकारी खंड विकास अधिकारी (BDO) समेत अन्य अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई दिखाई नहीं देने का आरोप लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि शिकायतों की जांच केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह गई है।

ऐसे में सवाल यह है कि यदि मामला अधिकारियों के संज्ञान में है तो मौके पर जाकर पंचायत सचिवालय की व्यवस्था, कर्मचारियों की उपस्थिति और सरकारी रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं की जा रही है? यदि जांच पहले से चल रही है, तो उसकी स्थिति सार्वजनिक किए जाने से ग्रामीणों की शंकाओं का समाधान हो सकता है।

पंचायती राज व्यवस्था का मूल उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देना और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना है। इसलिए पंचायत सचिवालय में निर्धारित पदों की जिम्मेदारी स्पष्ट रहना बेहद जरूरी है।

सचिव और पंचायत सहायक की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण

ग्राम पंचायत में सचिव और पंचायत सहायक की अपनी-अपनी निर्धारित जिम्मेदारियां होती हैं। सरकारी व्यवस्था में किसी पद पर नियुक्त व्यक्ति से जुड़े कार्य किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए जाने की स्थिति में प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

इसी वजह से दलेलपुर पंचायत के मामले में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि पंचायत सचिवालय में कौन-कौन लोग अधिकृत रूप से कार्य करते हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि तस्वीर में दिखाई दे रहे व्यक्ति की वहां मौजूदगी किस उद्देश्य से थी और क्या वह किसी सरकारी कार्य का निष्पादन कर रहे थे।

यदि कोई व्यक्ति केवल निजी या व्यक्तिगत कारण से सचिवालय में मौजूद था, तो स्थिति अलग हो सकती है। लेकिन यदि वह सरकारी रिकॉर्ड, फाइलों या पंचायत के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा था, तो इसकी जांच और जिम्मेदारी तय करना विभाग का दायित्व होगा।

जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्रशासनिक जांच की होगी। जांच के दौरान पंचायत सचिवालय की उपस्थिति पंजिका, पंचायत सहायक की उपस्थिति, संबंधित दस्तावेजों, कार्यों की प्रगति और सरकारी भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।

इसके अलावा, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए पुराने आरोपों की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं, यदि शिकायतें निराधार पाई जाती हैं तो प्रशासन को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

इससे न केवल ग्रामीणों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि पंचायत स्तर पर सरकारी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का भी समाधान होगा।

अब CDO, DDO और BDO से कार्रवाई की उम्मीद

दलेलपुर ग्राम पंचायत के मामले में ग्रामीण अब मुख्य विकास अधिकारी (CDO), जिला विकास अधिकारी (DDO) और खंड विकास अधिकारी (BDO) से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिवालय किसी व्यक्ति विशेष का निजी कार्यालय नहीं, बल्कि जनता से जुड़ी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा है।

इसलिए वहां निर्धारित नियमों और जिम्मेदारियों के अनुसार ही काम होना चाहिए। यदि पंचायत सहायक के स्थान पर उनके पति या कोई अन्य व्यक्ति नियमित रूप से सरकारी कामकाज में शामिल होने की बात सामने आती है, तो इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

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