मुंबई गरबा विवाद: VHP की मांग पर अमृता फडणवीस का अलग रुख, BJP ने भी किया किनारा

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Didital UP News Desk

महाराष्ट्र में नवरात्रि समारोह से पहले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी को लेकर नया विवाद सामने आया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन की ओर से कार्यक्रम आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान की पुष्टि करने की अपील भी की जा रही है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने इस मुद्दे पर समावेशी रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा का आनंद लेने आता है और फिर चला जाता है, तो उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी इस मुद्दे से खुद को अलग करती नजर आ रही है। पार्टी के एक कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया है कि VHP और BJP को एक ही संगठन नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि VHP सहयोगी संगठन जरूर है, लेकिन उसकी मांग को BJP की आधिकारिक मांग नहीं माना जा सकता।

नवरात्रि से पहले गरबा कार्यक्रमों को लेकर विवाद

महाराष्ट्र में इस साल नवरात्रि समारोह को लेकर तैयारियां चल रही हैं। इसी बीच गरबा और डांडिया आयोजनों में कौन शामिल हो सकता है, इसे लेकर बहस तेज हो गई है। VHP कार्यकर्ताओं की ओर से कुछ आयोजकों से कथित तौर पर यह आग्रह किया जा रहा है कि कार्यक्रम स्थल पर आने वाले लोगों की पहचान की पुष्टि की जाए।

संगठन की ओर से आधार कार्ड जैसे पहचान पत्रों के जरिए प्रतिभागियों की पहचान सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इसके अलावा, कुछ आयोजकों से यह भी कहा गया है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग माथे पर लाल तिलक लगाएं, ताकि उनकी हिंदू पहचान स्पष्ट हो सके।

हालांकि, यह मांग सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में प्रवेश के लिए किस प्रकार के नियम लागू किए जाने चाहिए और ऐसे आयोजनों में सरकार की भूमिका क्या होनी चाहिए।

अमृता फडणवीस ने अपनाया समावेशी रुख

विवाद के बीच अमृता फडणवीस की टिप्पणी ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है। उन्होंने गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिमों की भागीदारी पर आपत्ति जताने के बजाय सभी को साथ लेकर चलने की बात कही।

अमृता फडणवीस का कहना है कि नवरात्रि का त्योहार सबको साथ लेकर चलने वाला होना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा देखने या उसमें शामिल होकर त्योहार का आनंद लेने आता है और इसके बाद अपने घर लौट जाता है, तो उन्हें इसमें कोई समस्या नहीं दिखाई देती।

उनके इस बयान को VHP की मांग से अलग रुख के तौर पर देखा जा रहा है। इसके बाद संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने VHP की स्थिति को दोहराते हुए कहा कि संगठन नवरात्रि के कार्यक्रमों में मुसलमानों की भागीदारी पर रोक चाहता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि VHP की अपनी नीतियां और अपना संगठनात्मक रुख है। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति के बयान को संगठन की नीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

VHP ने अपनी मांग के पीछे दिया धार्मिक तर्क

VHP ने गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर अपनी मांग के समर्थन में धार्मिक तर्क दिया है। संगठन का कहना है कि नवरात्रि हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है और इस दौरान देवी दुर्गा तथा देवी अंबा की आराधना की जाती है।

श्रीराज नायर ने सवाल उठाया कि जब इस्लाम में मूर्ति पूजा की परंपरा नहीं है, तो मुस्लिम लोग नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में क्यों शामिल होना चाहते हैं।

हालांकि, दूसरी ओर गरबा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर यह एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन का रूप भी ले चुका है, जिसमें अलग-अलग समुदायों के लोग हिस्सा लेते रहे हैं। यही वजह है कि इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

नितेश राणे ने किया VHP के रुख का समर्थन

महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने VHP की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग हिंदू नाम का इस्तेमाल करके गरबा आयोजनों में प्रवेश करते हैं और हिंदू महिलाओं को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने इस संदर्भ में ‘लव जिहाद’ का मुद्दा उठाया और कहा कि अगर गरबा और नवरात्रि के कार्यक्रम इस तरह की गतिविधियों का माध्यम बनते हैं, तो उन्हें रोकना जरूरी है।

हालांकि, अमृता फडणवीस के बयान के बाद नितेश राणे के रुख में कुछ नरमी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि जो मुस्लिम लोग गरबा में शामिल होते हैं, उन्हें साफ नीयत के साथ ऐसा करना चाहिए।

इस तरह एक ही मुद्दे पर हिंदुत्व खेमे के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आने लगे हैं। जहां VHP प्रवेश पर रोक की मांग कर रही है, वहीं अमृता फडणवीस ने त्योहार को सबको साथ लेकर चलने वाला बताया है।

BJP ने VHP की मांग से खुद को अलग किया

विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि VHP और BJP को एक ही संगठन नहीं माना जाना चाहिए।

मंत्री के मुताबिक, VHP BJP का सहयोगी संगठन है, लेकिन दोनों की संगठनात्मक पहचान और नीतियां अलग हैं। उन्होंने कहा कि BJP की ओर से नवरात्रि समारोहों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की कोई अपील नहीं की गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि गरबा और डांडिया के अधिकांश कार्यक्रम निजी समूहों या आयोजकों द्वारा आयोजित किए जाते हैं। इसलिए ऐसे आयोजनों के संचालन में सरकार की भूमिका सीमित रहती है।

इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि इस मुद्दे पर BJP और VHP के रुख को अलग-अलग देखा जा रहा है।

निजी आयोजनों और पहचान जांच पर भी उठे सवाल

गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में पहचान की जांच की मांग को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। आयोजकों के सामने यह सवाल है कि क्या निजी आयोजनों में प्रवेश के लिए धर्म आधारित पहचान जांच को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

वहीं, कार्यक्रम आयोजकों के लिए सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में कई आयोजक प्रवेश व्यवस्था के लिए अपने स्तर पर नियम निर्धारित कर सकते हैं। हालांकि, किसी भी नियम को लागू करते समय संबंधित कानूनों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।

इसके अलावा, नवरात्रि जैसे बड़े सार्वजनिक और सांस्कृतिक आयोजनों में लोगों की भागीदारी को लेकर समाज में अलग-अलग विचार होना स्वाभाविक है। इसलिए इस पूरे मामले में संतुलित संवाद की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

नवरात्रि से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

नवरात्रि समारोह शुरू होने से पहले सामने आया यह विवाद केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है। इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। एक तरफ VHP अपने संगठनात्मक रुख पर कायम है, वहीं BJP नेताओं की ओर से इसे पार्टी की आधिकारिक नीति नहीं बताया जा रहा।

दूसरी ओर, अमृता फडणवीस का बयान इस बहस में एक अलग दृष्टिकोण सामने रखता है। उन्होंने त्योहारों को सभी लोगों को जोड़ने वाला माध्यम बताया है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया आयोजक प्रवेश को लेकर किस प्रकार की व्यवस्था अपनाते हैं। साथ ही, प्रशासन और स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, इस पर भी नजर रहेगी।

फिलहाल, नवरात्रि से पहले महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया को लेकर शुरू हुई यह बहस हिंदुत्व खेमे के भीतर अलग-अलग विचारों को सामने ला रही है। VHP जहां धार्मिक पहचान के आधार पर प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपना रही है, वहीं अमृता फडणवीस ने समावेशी दृष्टिकोण की बात कही है। BJP ने भी स्पष्ट किया है कि VHP की मांग को पार्टी की आधिकारिक मांग नहीं माना जाना चाहिए।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक भागीदारी, निजी आयोजनों के नियम और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है। नवरात्रि समारोह जैसे बड़े आयोजनों के दौरान शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखना आयोजकों, प्रशासन और आम लोगों की साझा जिम्मेदारी होगी।