स्वाइन फ्ल्यू से घबराएं नहीं, जागरूकता से थमेगा संक्रमण का खतरा, जानिए क्या हैं उपाय,,,
रिपोर्ट- शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी। जिले में H1N1 यानी स्वाइन फ्ल्यू और इन्फ्लुएंजा को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से विशेष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों ने बीमारी के लक्षण, संक्रमण से बचाव, समय पर उपचार और जरूरी सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं, जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने लोगों से बीमारी को लेकर घबराने के बजाय जागरूक और सतर्क रहने की अपील की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन के बीच H1N1 और इन्फ्लुएंजा को लेकर सही जानकारी पहुंचाना था, ताकि लोग शुरुआती लक्षणों को पहचान सकें और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह ले सकें। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल कॉलेज, आईएमए से जुड़े चिकित्सकों के साथ नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों ने भी हिस्सा लिया।
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता, सीएमएस डॉ. आरके कोली और आईएमए पदाधिकारियों डॉ. अखिलेश वर्मा, डॉ. मनोज शर्मा तथा डॉ. पवन वर्मा के साथ दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी बीमारी से बचाव में जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि लोग बीमारी के लक्षणों, संक्रमण के फैलने के तरीकों और बचाव के उपायों के प्रति सजग रहें तो संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्ल्यू जैसी मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम करने वाले अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी बीमारी के बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए।
गांव-गांव तक पहुंचे सही जानकारी
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी गांव-गांव तक पहुंचनी चाहिए, ताकि लोगों को बीमारी के बारे में अनावश्यक भ्रम या डर का सामना न करना पड़े।
उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य मैदानी कर्मचारियों से अपील की कि वे लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में सरल भाषा में जानकारी दें। साथ ही, किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसे समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया जाए।
जिलाधिकारी ने नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के लिए व्यावहारिक ज्ञान बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें H1N1 और इन्फ्लुएंजा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है, जिसका लाभ उन्हें भविष्य में अपने कार्यक्षेत्र में मिलेगा।
उन्होंने आईएमए की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संस्था समय-समय पर जनहित और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रही है। ऐसे कार्यक्रम समाज में स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी और सजगता बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं।
फीवर ओपीडी में लगातार पहुंच रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वाणी गुप्ता ने कार्यक्रम में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में फीवर ओपीडी संचालित की जा रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान यहां एक हजार से अधिक मरीज पहुंचे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रतिदिन करीब 20 से 40 मरीज बुखार की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकीय उपचार और निगरानी के बाद इनमें से अधिकांश मरीज तीन से चार दिन में स्वस्थ हो रहे हैं।
डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में आवश्यक दवाओं, जांच सुविधाओं और चिकित्सकीय टीम की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसलिए लोगों को किसी भी तरह की अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आवश्यक सावधानी बरतें और जरूरत महसूस होने पर मास्क का इस्तेमाल करें। इसके अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।
शुरुआती लक्षणों की पहचान जरूरी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि इन्फ्लुएंजा और H1N1 से जुड़े लक्षणों की समय पर पहचान करना महत्वपूर्ण है। सामान्य तौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान और अन्य फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
हालांकि, हर बुखार को स्वाइन फ्ल्यू मान लेना उचित नहीं है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। खासतौर पर जिन लोगों में लक्षण लगातार बने रहें या स्थिति बिगड़ती महसूस हो, उन्हें समय पर स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना चाहिए।
चिकित्सकों ने यह भी समझाया कि संक्रमण से बचाव के लिए हाथों की स्वच्छता, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना तथा बीमार होने पर अनावश्यक रूप से भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना उपयोगी सावधानियां हैं।
वरिष्ठ चिकित्सकों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में जनपद के वरिष्ठ चिकित्सकों ने पैनलिस्ट के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने H1N1 और इन्फ्लुएंजा की रोकथाम, उपचार तथा जरूरी सावधानियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की।
चिकित्सकों ने बताया कि किसी भी संक्रामक बीमारी के नियंत्रण में समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय परामर्श की अहम भूमिका होती है। इसके साथ ही लोगों को अफवाहों से बचने और प्रमाणित स्वास्थ्य जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में डॉ. आरसी पांडे, डॉ. संजीव भल्ला, डॉ. एनके वर्मा, डॉ. कमलेन्द्र वर्मा, डॉ. पीसी मिश्रा, डॉ. शिप्रा मिश्रा, डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. एसपी वर्मा, डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. एसके मिश्रा और डॉ. जयराम समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में आईएमए सचिव डॉ. मनोज शर्मा ने जागरूकता कार्यक्रम की आवश्यकता और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोगों तक सही स्वास्थ्य जानकारी पहुंचाना सामुदायिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों ने भी लिया हिस्सा
कार्यक्रम में नर्सिंग इंस्टीट्यूट के प्रशिक्षणार्थियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। स्वास्थ्य क्षेत्र में भविष्य बनाने वाले इन प्रशिक्षणार्थियों के लिए कार्यक्रम व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।
इस दौरान उन्हें H1N1 और इन्फ्लुएंजा से संबंधित सावधानियों तथा मरीजों को जागरूक करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, यह भी बताया गया कि स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी की रोकथाम और जन-जागरूकता में भी उनकी अहम जिम्मेदारी होती है।
आईएमए ने दिया जागरूकता का संदेश
आईएमए लखीमपुर खीरी के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश वर्मा, संरक्षक अखिलेश खरे, सचिव डॉ. मनोज शर्मा और कोषाध्यक्ष डॉ. पवन वर्मा समेत संस्था के पदाधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता, विभिन्न विभागों के चिकित्सक और नर्सिंग इंस्टीट्यूट के प्रशिक्षणार्थी भी कार्यक्रम का हिस्सा बने। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रभाकर श्रीवास्तव ने किया।

