कानपुर SPCA केंद्र में पशुओं की देखभाल को लेकर DM जितेंद्र प्रताप सिंह ने दिए निर्देश – एक बार जरूर पढ़ें

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रिपोर्ट – सुहैल अंसारी 

कानपुर: घायल, बीमार और बेसहारा पशु-पक्षियों की देखभाल और उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (SPCA) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में रायपुरवा स्थित SPCA केंद्र की व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान पशुओं के उपचार, संरक्षण, देखभाल और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

पूर्णकालिक चिकित्सक की होगी तैनाती

बैठक में जिलाधिकारी ने SPCA केंद्र पर पशुओं को समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने केंद्र में एक पूर्णकालिक चिकित्सक की तैनाती करने के निर्देश दिए। इसके लिए चिकित्सक के चयन को लेकर एक समिति गठित करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि चिकित्सक के चयन की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। उन्होंने आगामी 15 दिनों के भीतर चयन प्रक्रिया पूरी कर चिकित्सक की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इससे केंद्र में आने वाले घायल और बीमार पशुओं को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

252 पशु-पक्षियों का किया गया उपचार

बैठक के दौरान SPCA रायपुरवा में किए गए उपचार कार्यों की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। बताया गया कि केंद्र में विभिन्न प्रजातियों के कुल 252 पशु-पक्षियों का उपचार किया जा चुका है।

इनमें 76 कुत्ते, 97 गोवंशीय पशु, 8 घोड़े और 2 भैंस शामिल हैं। इसके अलावा पक्षियों और अन्य जीवों में 25 चील, 21 कबूतर, 3 गिद्ध, 3 मोर, एक उल्लू, 2 लंगूर, 6 बंदर, 3 बिल्लियां और 5 बगुले का उपचार किया गया है।

इस आंकड़े से स्पष्ट है कि SPCA केंद्र में केवल घरेलू या सामान्य पशुओं ही नहीं, बल्कि घायल और जरूरतमंद पक्षियों तथा अन्य जीवों को भी उपचार एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसलिए केंद्र की व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

CCTV कैमरों से होगी निगरानी

पशुओं की सुरक्षा और केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर भी जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने SPCA केंद्र को CCTV कैमरों की निगरानी में रखने को कहा।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि केंद्र में अनधिकृत लोगों के प्रवेश को रोका जाए। इसके साथ ही CCTV के माध्यम से केंद्र की गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाए। इससे एक ओर जहां केंद्र में रखे गए पशु-पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर वहां संचालित व्यवस्थाओं पर भी लगातार नजर रखी जा सकेगी।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह भी कहा कि केंद्र में उपचार और संरक्षण के लिए आने वाले पशुओं की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। घायल अथवा बीमार पशुओं को उनकी स्थिति के अनुसार समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाए।

स्कूली बच्चों को कराया जाएगा SPCA केंद्र का भ्रमण

बैठक में जिलाधिकारी ने पशुओं के प्रति बच्चों में संवेदनशीलता और करुणा विकसित करने की दिशा में भी पहल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को SPCA केंद्र का भ्रमण कराया जाए, ताकि वे पशुओं की देखभाल और संरक्षण की वास्तविक प्रक्रिया को समझ सकें।

भ्रमण के दौरान बच्चों को बताया जाएगा कि घायल या बेसहारा पशुओं की स्थिति में किस प्रकार सहायता की जा सकती है। साथ ही, पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकने और उनके साथ संवेदनशील व्यवहार करने के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों में पशु-पक्षियों के प्रति दया, करुणा और सेवा की भावना विकसित करना है। इसके अलावा, उन्हें यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि पशु भी समाज और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए उनके प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील व्यवहार करना सभी की जिम्मेदारी है।

उपचार के साथ देखभाल पर भी जोर

जिलाधिकारी ने कहा कि SPCA केंद्र में केवल उपचार की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि पशुओं के रखरखाव और देखभाल पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। केंद्र में आने वाले घायल एवं बीमार पशुओं को समय से चिकित्सा सुविधा मिले और उनके रहने की व्यवस्था भी बेहतर होनी चाहिए।

इसके साथ ही, उपचार के बाद पशुओं की स्थिति पर भी निगरानी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रशासन का उद्देश्य है कि SPCA केंद्र में आने वाले पशु-पक्षियों को सुरक्षित वातावरण, आवश्यक उपचार और उचित देखभाल मिल सके।

पशु क्रूरता की रोकथाम SPCA का प्रमुख उद्देश्य

SPCA का मुख्य उद्देश्य पशुओं के प्रति होने वाली क्रूरता की रोकथाम करना तथा घायल, बीमार और बेसहारा पशु-पक्षियों के संरक्षण एवं उपचार की व्यवस्था को प्रभावी बनाना है। ऐसे में रायपुरवा स्थित केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

कानपुर जैसे बड़े शहर में सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर कई बार घायल अथवा बेसहारा पशु दिखाई देते हैं। ऐसे पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा केंद्र की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में अधिकारियों ने केंद्र से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी जिलाधिकारी के समक्ष रखी। इसके बाद जिलाधिकारी ने आवश्यक सुधार और व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनुराग सिंह, डॉ. निरंजन सहित SPCA समिति के सदस्य मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद अब उम्मीद है कि रायपुरवा स्थित SPCA केंद्र में पशुओं के उपचार और देखभाल की व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी। पूर्णकालिक चिकित्सक की तैनाती से बीमार एवं घायल पशुओं को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। वहीं, CCTV निगरानी और प्रवेश व्यवस्था को बेहतर बनाने से केंद्र की सुरक्षा भी मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, कानपुर प्रशासन की यह पहल पशु संरक्षण के साथ-साथ समाज में पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। खासकर स्कूली बच्चों को SPCA केंद्र से जोड़ने की पहल आने वाली पीढ़ी में जीव-जंतुओं के प्रति जिम्मेदारी और करुणा की भावना विकसित करने में सहायक हो सकती है।

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