आजमगढ़ में मिशन आत्मनिर्भरता के तहत अरहर और धान के प्रदर्शन खेतों का वैज्ञानिकों ने किया निरीक्षण
रिपोर्ट- पित्तेश्वर कुमार
आजमगढ़। मिशन आत्मनिर्भरता इन पल्सेस के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, कोटवा, आजमगढ़-1 की ओर से किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से लगातार गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में ग्राम गंधुवई, विकासखंड रानी की सराय में सीएफएलडी (Cluster Front Line Demonstration) कार्यक्रम के अंतर्गत लगाए गए अरहर के प्रदर्शन खेतों का वैज्ञानिकों की टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया। इसके साथ ही धान की फसल में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (FLD) के तहत स्थापित प्रदर्शन खेतों का भी जायजा लिया गया।
इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य खेतों में खड़ी फसलों की वर्तमान स्थिति, वृद्धि एवं विकास तथा फसल स्वास्थ्य का वास्तविक आकलन करना था। साथ ही वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि किसानों द्वारा प्रदर्शन के दौरान अपनाई जा रही उन्नत कृषि तकनीकों का फसल पर किस प्रकार प्रभाव पड़ रहा है। निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल की अवस्था के अनुरूप आवश्यक प्रबंधन और फसल सुरक्षा संबंधी तकनीकी जानकारी भी दी।
अरहर के प्रदर्शन खेतों का लिया जायजा
ग्राम गंधुवई में अरहर के प्रदर्शन खेतों का निरीक्षण करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मृदा वैज्ञानिक डॉ. रणधीर नायक, सस्य विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. दिव्या सिंह तथा फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र कुमार मिश्र की टीम पहुंची। वैज्ञानिकों ने किसानों इंद्रसेन सिंह, हरिश्चंद्र सिंह और महेंद्र प्रताप यादव के खेतों में पहुंचकर अरहर की फसल की स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने अरहर के पौधों की वृद्धि एवं विकास, पौधों की स्थिति और खेत में फसल के समग्र स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया। इसके अलावा खेत में अपनाई जा रही कृषि पद्धतियों की भी जानकारी ली गई। वैज्ञानिकों ने किसानों से फसल की वर्तमान अवस्था, सिंचाई, पोषण और फसल में दिखाई देने वाले किसी भी संभावित लक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त की।
विशेष रूप से फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र कुमार मिश्र ने अरहर की फसल में कीट एवं रोगों के संभावित लक्षणों की जांच की। उन्होंने खेत में पौधों की स्थिति को देखते हुए किसानों को सलाह दी कि फसल की नियमित निगरानी करना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते किसी कीट या रोग के शुरुआती लक्षणों की पहचान हो जाए तो वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से फसल को बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है।
किसानों को फसल प्रबंधन की तकनीकी जानकारी
निरीक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल की वर्तमान अवस्था के अनुरूप आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि अरहर जैसी दलहनी फसलों में समय पर निगरानी और उचित प्रबंधन से उत्पादन क्षमता को बेहतर किया जा सकता है। इसलिए किसानों को खेत में नियमित भ्रमण कर पौधों की वृद्धि, पत्तियों की स्थिति और किसी भी असामान्य लक्षण पर नजर रखनी चाहिए।
इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि बिना आवश्यकता किसी भी कृषि रसायन का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। फसल में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान करना जरूरी है। इसके बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही उचित प्रबंधन अपनाया जाना चाहिए।
वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदर्शन खेतों का उद्देश्य केवल बेहतर उत्पादन प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि किसानों को ऐसी वैज्ञानिक तकनीकों से परिचित कराना भी है, जिन्हें वे आगे अपने खेतों में प्रभावी ढंग से अपना सकें। इससे खेती की लागत को संतुलित रखने और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
धान के प्रदर्शन खेतों का भी निरीक्षण
अरहर के खेतों के निरीक्षण के बाद वैज्ञानिकों की टीम ने धान की फसल में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (FLD) के तहत स्थापित प्रदर्शन खेतों का भी स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान धान के पौधों की वृद्धि, पौधों की स्थिति और फसल के समग्र स्वास्थ्य का अवलोकन किया गया।
वैज्ञानिकों ने खेत में धान की फसल की वर्तमान अवस्था को देखा और किसानों से खेती से जुड़ी विभिन्न जानकारियां प्राप्त कीं। इसके साथ ही फसल में कीट एवं रोगों की स्थिति की भी जांच की गई। जहां आवश्यकता महसूस हुई, वहां किसानों को समयबद्ध फसल सुरक्षा और प्रबंधन संबंधी जानकारी दी गई।
धान की फसल में भी नियमित निगरानी को महत्वपूर्ण बताते हुए वैज्ञानिकों ने कहा कि खेत में फसल की स्थिति का लगातार अवलोकन करने से किसी भी समस्या की शुरुआती अवस्था में पहचान की जा सकती है। इससे किसान समय रहते उचित कदम उठा सकते हैं और अनावश्यक नुकसान से बचने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।
प्रदर्शन खेत किसानों के लिए बन रहे सीख का माध्यम
कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित सीएफएलडी और एफएलडी कार्यक्रम किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। प्रदर्शन खेतों में उन्नत तकनीकों को व्यावहारिक रूप से अपनाया जाता है, जिससे किसान खेत में उनके परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकते हैं।
दरअसल, कृषि क्षेत्र में केवल नई तकनीक की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। उसका खेत स्तर पर सही तरीके से प्रयोग और परिणामों का आकलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से वैज्ञानिकों द्वारा समय-समय पर प्रदर्शन खेतों का निरीक्षण किया जाता है।
इस दौरान किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझने का अवसर भी मिलता है। इसके आधार पर वैज्ञानिक फसल की अवस्था के अनुसार आवश्यक सुझाव देते हैं। परिणामस्वरूप किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को खेत तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
समय पर फसल निगरानी पर जोर
वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की कि वे अपनी फसलों की नियमित निगरानी करें। विशेषकर अरहर और धान जैसी फसलों में पौधों की वृद्धि, पत्तियों की स्थिति तथा कीट एवं रोगों से संबंधित संभावित लक्षणों पर लगातार नजर रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि खेत में किसी भी प्रकार का असामान्य लक्षण दिखाई देने पर किसान तत्काल कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें। समय पर मिलने वाला वैज्ञानिक मार्गदर्शन फसल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
साथ ही किसानों को यह भी समझाया गया कि फसल सुरक्षा के लिए संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। जरूरत के अनुसार उचित उपाय करने से कृषि संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
मिशन आत्मनिर्भरता इन पल्सेस के तहत अरहर के प्रदर्शन खेतों का निरीक्षण दलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। दलहनी फसलें कृषि व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और किसानों की आय तथा मृदा स्वास्थ्य से भी इनका संबंध है।
वहीं, धान की फसल के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। दोनों फसलों के प्रदर्शन खेतों का निरीक्षण यह दर्शाता है कि कृषि विज्ञान केंद्र खेत स्तर पर किसानों को व्यावहारिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है।
अंततः वैज्ञानिकों ने कहा कि सीएफएलडी और एफएलडी के प्रदर्शन खेतों का नियमित स्थलीय निरीक्षण किसानों को फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे उन्नत कृषि तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन, कीट एवं रोगों की समय से पहचान तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है।

