आगरा में 58 बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई, एक-एक लाख रुपये जुर्माना-73 मदरसों को नोटिस
Digital UP News Desk
आगरा: बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने बिना मान्यता संचालित हो रहे विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। आगरा जिले में जांच के दौरान बिना विभागीय मान्यता के संचालित पाए गए 58 विद्यालयों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही इन विद्यालयों का संचालन तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से ऐसे विद्यालय संचालकों में हड़कंप की स्थिति है, जो निर्धारित नियमों और विभागीय मान्यता के बिना बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जुर्माने और संचालन बंद करने के निर्देश के बाद भी कोई विद्यालय बिना मान्यता के चलता पाया गया, तो संबंधित संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा विभाग की ओर से बिना आवश्यक मान्यता के अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं संचालित करने वाले 73 मदरसों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इन मदरसों के प्रबंधकों से आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जांच में सामने आए बिना मान्यता वाले विद्यालय
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में विद्यालयों की जांच कराई गई। इस दौरान जैतपुर कलां, पिनाहट, शमशाबाद, आगरा नगर, फतेहपुर सीकरी, अछनेरा और बाह समेत कई क्षेत्रों में ऐसे विद्यालय मिले, जहां आवश्यक विभागीय मान्यता के बिना कक्षाएं संचालित की जा रही थीं।
जांच के दौरान सामने आई स्थिति के बाद संबंधित विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को पहले नोटिस जारी किया गया था। विभाग ने उनसे विद्यालय संचालन से संबंधित दस्तावेज और मान्यता से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने के साथ ही अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा था।
हालांकि, निर्धारित समय सीमा में कई विद्यालय संचालकों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। वहीं, कुछ संचालकों ने जो स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, वह विभागीय अधिकारियों को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद विभाग ने नियमों के तहत कार्रवाई का निर्णय लिया।
खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
इस पूरी कार्रवाई में खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण रही। अपने-अपने विकासखंडों में निरीक्षण और जांच के दौरान अधिकारियों ने बिना मान्यता संचालित विद्यालयों की पहचान की। इसके बाद ऐसे विद्यालयों की सूची कार्रवाई की संस्तुति के साथ बेसिक शिक्षा विभाग को भेजी गई।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद विभाग ने संबंधित विद्यालयों के दस्तावेज और पूर्व में जारी नोटिस के जवाबों की समीक्षा की। इसके पश्चात 58 विद्यालय संचालकों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई।
विभाग का कहना है कि विद्यालयों को मान्यता संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के नाम पर ऐसे संस्थानों का संचालन नहीं किया जा सकता, जो विभागीय मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कार्रवाई
बेसिक शिक्षा विभाग ने विद्यालयों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 की धारा 18(5), उत्तर प्रदेश शिक्षा का अधिकार नियमावली-2011 और शासन की ओर से जारी निर्देशों का हवाला दिया है।
नियमों के अनुसार, बिना मान्यता के विद्यालय स्थापित करने या संचालित करने पर संबंधित संचालक पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बावजूद यदि विद्यालय का संचालन जारी रहता है तो प्रत्येक दिन के उल्लंघन के लिए 10 हजार रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसलिए विभाग ने विद्यालय संचालकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल जुर्माना भरना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बिना मान्यता वाले विद्यालयों का संचालन भी बंद करना होगा।
निर्देशों का उल्लंघन हुआ तो दर्ज होगी एफआईआर
बीएसए राकेश सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन विद्यालयों पर कार्रवाई की गई है, उनका संचालन तत्काल बंद कराया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जुर्माने की कार्रवाई के बाद विद्यालय दोबारा बिना मान्यता के संचालित न हों।
यदि जांच के दौरान कोई ऐसा विद्यालय दोबारा चलता हुआ पाया जाता है, तो संबंधित संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही नियमों के अनुसार अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
विभाग की इस सख्ती का उद्देश्य केवल आर्थिक दंड लगाना नहीं, बल्कि बिना आवश्यक मानकों के संचालित विद्यालयों पर रोक लगाना भी है। इससे अभिभावकों को भी अपने बच्चों के दाखिले से पहले विद्यालय की मान्यता और अन्य जरूरी मानकों की जांच करने का संदेश मिलता है।
73 मदरसों को भी जारी किया गया नोटिस
विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग ने बिना विभागीय मान्यता के अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं संचालित करने वाले 73 मदरसों को नोटिस जारी किए हैं।
विभाग ने संबंधित मदरसों के प्रबंधकों से आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्यों के साथ अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है। बीएसए राकेश सिंह के अनुसार, इसके लिए प्रबंधकों को तीन दिन का समय दिया गया है।
अब इन मदरसों के प्रबंधकों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों और स्पष्टीकरण की जांच की जाएगी। यदि जवाब संतोषजनक पाया जाता है और आवश्यक मान्यता संबंधी दस्तावेज उपलब्ध होते हैं, तो आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर तय होगी। वहीं, यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है और स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिलता है, तो संबंधित मदरसों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों के लिए भी महत्वपूर्ण है विभाग की कार्रवाई
बिना मान्यता संचालित विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई का सीधा संबंध विद्यार्थियों और अभिभावकों से भी है। बच्चों का दाखिला कराने से पहले अभिभावकों के लिए यह देखना जरूरी है कि संबंधित विद्यालय के पास आवश्यक विभागीय मान्यता है या नहीं।
दरअसल, विद्यालय की मान्यता केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इस बात से भी जुड़ी होती है कि संस्थान निर्धारित शैक्षिक मानकों और नियमों का पालन कर रहा है या नहीं। इसलिए विभाग की कार्रवाई के बाद अभिभावकों के बीच भी जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।
आगे भी जारी रह सकती है जांच
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से की गई यह कार्रवाई जिले में शिक्षा व्यवस्था को निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बिना मान्यता विद्यालय संचालित करने वालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, 73 मदरसों को जारी किए गए नोटिस के बाद अब उनके दस्तावेजों और स्पष्टीकरण की जांच की जाएगी। इसके बाद यह तय होगा कि किन संस्थानों के खिलाफ आगे की कार्रवाई आवश्यक है।
कुल मिलाकर, आगरा में 58 बिना मान्यता वाले विद्यालयों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना और संचालन बंद कराने के निर्देश शिक्षा विभाग की सख्ती को दर्शाते हैं। साथ ही 73 मदरसों को नोटिस जारी किए जाने से यह साफ है कि विभाग मान्यता और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर किसी तरह की लापरवाही के पक्ष में नहीं है। यदि संबंधित संस्थान विभागीय निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो आगे जुर्माने के साथ एफआईआर जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

