सत्य निकेतन हादसा: मोबाइल जैमर की खबर पर दिल्ली पुलिस दी सफाई, बताया दावा पूरी तरह झूठा

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने के बाद राहत और बचाव अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। इसी बीच कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि हादसे के बाद बचाव स्थल पर मोबाइल नेटवर्क जैमर लगाए गए हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि घटनास्थल पर मोबाइल नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहा है और बचाव अभियान में शामिल एजेंसियां मोबाइल कम्युनिकेशन के जरिए आपस में लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की। पुलिस के मुताबिक, सत्य निकेतन हादसे के बचाव स्थल पर किसी तरह का मोबाइल नेटवर्क जैमर नहीं लगाया गया है। साथ ही, इलाके में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय है। इसलिए जैमर लगाए जाने का दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

दिल्ली पुलिस ने वायरल हो रहे दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बचाव स्थल पर मोबाइल संचार व्यवस्था सामान्य रूप से काम कर रही है। पुलिस के अनुसार, दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मोबाइल कम्युनिकेशन के माध्यम से एक-दूसरे के साथ समन्वय कर रहे हैं।

दरअसल, किसी भी बड़े हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान में अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी होता है। ऐसे में मोबाइल संचार की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दिल्ली पुलिस ने इसी स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि घटनास्थल पर मौजूद बचाव दल मोबाइल फोन के माध्यम से निर्बाध तरीके से आपस में संपर्क कर रहे हैं।

इसके अलावा, पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद मीडियाकर्मियों और आम नागरिकों के मोबाइल नेटवर्क इस्तेमाल करने की स्थिति का भी उल्लेख किया। पुलिस ने बताया कि वहां मौजूद लोग बिना किसी नेटवर्क संबंधी परेशानी के लगातार लाइव ब्रॉडकास्ट कर रहे हैं। इससे भी यह स्पष्ट होता है कि घटनास्थल पर मोबाइल नेटवर्क बंद या बाधित नहीं किया गया है।

सोशल मीडिया पर तेजी से फैला था दावा

सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद सोशल मीडिया पर बचाव स्थल से संबंधित कई तरह की सूचनाएं प्रसारित होने लगी थीं। इन्हीं में एक दावा यह भी था कि प्रशासन ने घटनास्थल पर मोबाइल नेटवर्क जैमर लगा दिए हैं। इस दावे के कारण लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अब आधिकारिक तौर पर इस दावे को झूठा बताया है। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बचाव स्थल पर मोबाइल नेटवर्क जैमर लगाए जाने की बात सही नहीं है।

ऐसे में किसी भी आपदा या संवेदनशील घटना के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं को लेकर सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है। खासकर राहत और बचाव अभियान से जुड़े मामलों में बिना पुष्टि किसी जानकारी को साझा करने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से हुआ था हादसा

गौरतलब है कि रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में लड़कों के लिए संचालित एक पेइंग गेस्ट यानी पीजी की पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। इस हादसे ने इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद राहत और बचाव एजेंसियों को मौके पर भेजा गया।

हादसे के बाद मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया गया। इस अभियान में दिल्ली पुलिस के साथ एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग के जवान भी शामिल रहे। अलग-अलग एजेंसियों के कर्मचारियों ने मिलकर राहत और बचाव कार्य को आगे बढ़ाया।

इस दुखद घटना में सात लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई थी। हादसे के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य को लेकर प्रशासन की गतिविधियां तेज रहीं।

बचाव अभियान में एजेंसियों के बीच समन्वय

किसी इमारत के ढहने जैसी घटना में बचाव अभियान कई स्तरों पर चलाया जाता है। एक ओर मलबे में फंसे लोगों को खोजने और बाहर निकालने का काम होता है, वहीं दूसरी ओर घटनास्थल को सुरक्षित रखने और लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसियों की होती है।

सत्य निकेतन हादसे में भी दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग के जवानों ने मौके पर समन्वय के साथ काम किया। दिल्ली पुलिस ने अपने स्पष्टीकरण में विशेष रूप से बताया कि इन एजेंसियों के बीच मोबाइल कम्युनिकेशन निर्बाध रूप से जारी रहा।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि बचाव अभियान के दौरान संचार व्यवस्था को लेकर किसी तरह की बाधा सामने नहीं आई। पुलिस ने आम लोगों और मीडिया की गतिविधियों का हवाला देकर भी स्थिति को स्पष्ट किया है।

लाइव ब्रॉडकास्ट से भी साफ हुई नेटवर्क की स्थिति

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल पर मौजूद मीडियाकर्मी और आम नागरिक लगातार लाइव ब्रॉडकास्ट कर रहे थे। इसके लिए मोबाइल इंटरनेट और नेटवर्क की आवश्यकता होती है। ऐसे में पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर मोबाइल नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहा था।

यही वजह है कि पुलिस ने सोशल मीडिया पर सामने आए जैमर संबंधी दावों को पूरी तरह गलत बताया। पुलिस की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब हादसे से जुड़ी कई जानकारियां सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही थीं।

अफवाहों से बचने की जरूरत

किसी भी बड़ी दुर्घटना के बाद लोगों में घटना से संबंधित जानकारी जानने की स्वाभाविक उत्सुकता रहती है। ऐसे समय में सोशल मीडिया सूचना का तेज माध्यम बन जाता है। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आने वाली हर जानकारी आधिकारिक या सत्यापित हो, यह जरूरी नहीं है।

इसलिए विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से अक्सर लोगों से अपील की जाती है कि वे किसी भी संवेदनशील घटना से संबंधित जानकारी को साझा करने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करें। विशेष रूप से बचाव अभियान, प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित दावों को लेकर आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है।

सत्य निकेतन हादसे में मोबाइल जैमर लगाए जाने का दावा भी इसी तरह सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया था। लेकिन दिल्ली पुलिस के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद इस दावे की वास्तविक स्थिति सामने आ गई है।

दिल्ली पुलिस ने स्थिति की तस्वीर साफ की

कुल मिलाकर, सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद मोबाइल नेटवर्क जैमर लगाए जाने की चर्चा को दिल्ली पुलिस ने खारिज कर दिया है। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल पर मोबाइल नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहा था। दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग के जवान मोबाइल कम्युनिकेशन के माध्यम से आपस में संपर्क और समन्वय बनाए हुए थे।

इसके साथ ही, घटनास्थल पर मौजूद मीडियाकर्मियों और आम नागरिकों द्वारा लाइव ब्रॉडकास्ट किए जाने की जानकारी भी पुलिस ने दी। इसलिए फिलहाल आधिकारिक तौर पर यही स्थिति सामने आती है कि बचाव स्थल पर मोबाइल नेटवर्क जैमर लगाए जाने की बात गलत है।

सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत के बाद प्रशासन और बचाव एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। ऐसे में घटना से जुड़ी सूचनाओं को जिम्मेदारी के साथ साझा करना और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना बेहद जरूरी है।

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