कानपुर में थमी बारिश, मगर आजाद नगर-ख्यौरा में मुसीबत बरकरार, डीपीएस के पास सड़क बनी तालाब
रिपोर्ट – विवेक कृष्ण दीक्षित
कानपुर: शहर में बारिश थमने के बाद कई इलाकों में लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन आजाद नगर-ख्यौरा क्षेत्र के लोगों की परेशानी अभी कम नहीं हुई है। डीपीएस आजाद नगर के पास सड़क पर कई दिनों से पानी जमा होने के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सड़क का बड़ा हिस्सा जलभराव की चपेट में है और लोगों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है।
डीपीएस आजाद नगर का पता मेनावती मार्ग, आजाद नगर, ख्यौरा क्षेत्र में है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क के आसपास करीब 10 सोसाइटी हैं, जहां रहने वाले हजारों लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागों का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
बारिश रुकने के बाद भी नहीं उतरा पानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश रुकने के बावजूद सड़क पर पानी जमा है। उनका आरोप है कि इलाके की जलनिकासी व्यवस्था पर्याप्त प्रभावी नहीं होने के कारण पानी तेजी से बाहर नहीं निकल पा रहा है। नतीजतन, लोगों को रोजाना इसी रास्ते से गुजरने में परेशानी हो रही है।
दरअसल, ख्यौरा और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या पहले भी सामने आती रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, नगर निगम अधिकारियों ने ख्यौरा और आसपास के जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया था तथा पंपों के संचालन और जलनिकासी व्यवस्था पर निगरानी के निर्देश दिए थे।
ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल बारिश के दौरान पानी निकालने के बजाय जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान तलाशा जाए।
सड़क पर जमा पानी से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित
जलभराव के कारण स्थानीय लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। बच्चों को स्कूल जाने और वापस लौटने में परेशानी होती है। वहीं, बुजुर्गों तथा महिलाओं के लिए पानी से होकर निकलना आसान नहीं है।
लोगों का कहना है कि सड़क पर पानी जमा होने से दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी होती है। इसके अलावा, पैदल चलने वालों को यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि पानी के नीचे सड़क की स्थिति कैसी है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से जल्द पानी निकलवाने की मांग की है।
गंदगी और मच्छरों को लेकर भी चिंता
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, कई दिनों से जमा पानी में गंदगी और कचरा भी नजर आ रहा है। इससे आसपास दुर्गंध की समस्या बढ़ने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही पानी जमा रहने के कारण मच्छरों की संख्या बढ़ने की शिकायत भी सामने आई है।
लोगों का कहना है कि क्षेत्र में मच्छररोधी दवा और एंटी-लार्वा छिड़काव पर्याप्त स्तर पर नहीं हुआ है। ऐसे में उनकी मांग है कि नगर निगम की स्वास्थ्य टीम मौके का निरीक्षण करे और आवश्यकता के अनुसार फॉगिंग तथा एंटी-लार्वा गतिविधियां कराई जाएं।
हालांकि, किसी बीमारी के फैलने की पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। इसलिए स्थानीय लोगों की चिंता को प्रशासन द्वारा समय रहते साफ-सफाई और मच्छर नियंत्रण के उपायों के जरिए दूर करना महत्वपूर्ण होगा।
स्मार्ट सिटी के दावों के बीच व्यवस्था पर सवाल
कानपुर को बेहतर शहरी सुविधाओं वाला शहर बनाने की दिशा में लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद यदि बारिश रुकने के कई दिन बाद भी किसी रिहायशी इलाके की सड़क पर पानी जमा रहता है तो इससे जलनिकासी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में सड़क, नाला और जलनिकासी से जुड़ी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए। खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में जहां बारिश के दौरान बार-बार जलभराव होता है, वहां पहले से तैयारी करने की जरूरत है।
हालिया बारिश के दौरान कानपुर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति सामने आई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मकड़ीखेड़ा और ख्यौरा क्षेत्र में जलभराव की स्थिति का नगर निगम आयुक्त ने निरीक्षण भी किया था और पंप संचालन सहित अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी।
कभी तालाब था क्षेत्र का प्राकृतिक जलनिकासी माध्यम
स्थानीय लोगों का दावा है कि आजाद नगर-ख्यौरा क्षेत्र में पहले एक बड़ा तालाब हुआ करता था। लोगों के अनुसार, बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी तालाब में पहुंच जाता था, जिससे आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति कम बनती थी।
अब स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि समय के साथ तालाब का स्वरूप बदल गया और उसके आसपास निर्माण तथा कथित कब्जों के कारण प्राकृतिक जलनिकासी प्रभावित हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभागों की ओर से भी इस संबंध में विस्तृत स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।
यदि वास्तव में पुराने जलस्रोत या प्राकृतिक जलनिकासी मार्ग प्रभावित हुए हैं, तो पूरे क्षेत्र की जलनिकासी व्यवस्था का तकनीकी सर्वे कराया जाना उपयोगी हो सकता है।
शिकायतों के बाद भी स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव की समस्या को लेकर पहले भी संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों तक शिकायतें पहुंचाई गई हैं। इसके बावजूद उनका कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
लोगों की मांग है कि मौके पर जलनिकासी व्यवस्था की जांच कराई जाए, बंद या बाधित नालियों की सफाई कराई जाए और जहां जरूरत हो वहां अतिरिक्त पंपिंग की व्यवस्था की जाए। साथ ही, मच्छर नियंत्रण के लिए नियमित फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव कराने की भी मांग की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी मौके का निरीक्षण कर समस्या को संबंधित विभागों के सामने रखने की अपील की है। हालांकि, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का पक्ष मिलने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
स्थायी जलनिकासी समाधान की जरूरत
आजाद नगर-ख्यौरा में बारिश के बाद बना जलभराव केवल तत्काल पानी निकालने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि समस्या के मूल कारणों की पहचान की जाए। इसके लिए नालों की सफाई, जलनिकासी मार्गों की जांच, पंपिंग व्यवस्था और संभावित अतिक्रमण की स्थिति का सर्वे किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, स्थानीय लोगों की मुख्य मांग यही है कि सड़क से जल्द पानी हटाया जाए और भविष्य में बारिश के बाद ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी जलनिकासी योजना तैयार की जाए। साथ ही, साफ-सफाई और मच्छर नियंत्रण के उपाय भी नियमित रूप से किए जाएं। इससे क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को राहत मिलेगी और शहर की नागरिक सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

