लखीमपुर खीरी में ग्राम पंचायत सचिव निलंबित ,परिवार रजिस्टर में अनधिकृत एंट्री का खुलासा

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रिपोर्ट- शरद अवस्थी

लखीमपुर खीरी: सरकारी अभिलेखों में दर्ज सूचनाओं की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। लखीमपुर खीरी में परिवार रजिस्टर में कथित तौर पर बिना सक्षम स्तर की स्वीकृति के बाहरी महिला का नाम दर्ज किए जाने और बाद में उसकी नकल जारी किए जाने के मामले में ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई की गई है। शिकायत के बाद मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिषेक कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अभिलेख तलब कराए और उनका सत्यापन कराया। जांच के दौरान प्रथमदृष्टया अनियमितता सामने आने के बाद ग्राम पंचायत सचिव मनोज यादव को निलंबित कर दिया गया है।

प्रशासन की ओर से मामले की विस्तृत जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। अब जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि परिवार रजिस्टर में महिला का नाम किस आधार पर दर्ज किया गया, इसके लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और परिवार रजिस्टर की प्रति जारी करने की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा, यदि इस प्रकरण में किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

शिकायत के बाद सीडीओ ने तलब किए अभिलेख

मामला ग्राम कादीपुर के मजरा सफियापुर से जुड़ा हुआ है। यहां के निवासी अरविंद कुमार ने सीडीओ अभिषेक कुमार के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में परिवार रजिस्टर में एक महिला का नाम दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि संबंधित महिला की एंट्री परिवार रजिस्टर में बिना सक्षम स्तर की स्वीकृति के की गई और इस आधार पर परिवार रजिस्टर की नकल भी जारी कर दी गई।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि परिवार रजिस्टर से जारी की गई प्रति का इस्तेमाल न्यायालय में लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ ने शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया और संबंधित अभिलेख तत्काल तलब कराए।

इसके बाद परिवार रजिस्टर समेत संबंधित दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासनिक स्तर पर कराए गए सत्यापन में परिवार रजिस्टर में दर्ज महिला की एंट्री को लेकर अनियमितता सामने आई।

परिवार रजिस्टर में बाहरी महिला की एंट्री पर सवाल

परिवार रजिस्टर ग्राम पंचायत स्तर पर रखा जाने वाला महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख है। इसमें किसी परिवार के सदस्यों से संबंधित जानकारी दर्ज होती है। ऐसे में इसमें किसी व्यक्ति का नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की जानी होती है।

इसी वजह से परिवार रजिस्टर में किसी बाहरी व्यक्ति की एंट्री का मामला सामने आने पर प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान दर्ज महिला के आधार कार्ड और परिवार रजिस्टर में दर्ज विवरण के बीच अंतर भी पाया गया।

इसके साथ ही परिवार रजिस्टर की जो नकल जारी की गई थी, उसमें भी तथ्यों को लेकर हेरफेर की बात सामने आई। हालांकि, पूरे मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही अनियमितता की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

प्रथमदृष्टया अनियमितता मिलने पर सचिव निलंबित

अभिलेखों के सत्यापन के बाद प्रथमदृष्टया अनियमितता सामने आने पर ग्राम पंचायत सचिव मनोज यादव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामलों पर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।

सीडीओ ने मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने से पहले किन दस्तावेजों का परीक्षण किया गया था। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि एंट्री के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

इसके अलावा, परिवार रजिस्टर की नकल जारी करने के दौरान भी संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया था या नहीं, इसकी पड़ताल की जाएगी। इस तरह जांच केवल एक एंट्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया की कड़ी को खंगाला जाएगा।

नकल जारी करने की प्रक्रिया की भी होगी जांच

परिवार रजिस्टर की प्रमाणित प्रति कई प्रशासनिक और कानूनी कार्यों में महत्वपूर्ण दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल की जाती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति के नाम या पारिवारिक विवरण में बदलाव करने से पहले दस्तावेजों की सही तरीके से जांच जरूरी होती है।

इस मामले में प्रशासन अब यह भी जांच करेगा कि जिस परिवार रजिस्टर की नकल जारी की गई, उसके लिए आवेदन किसने किया था और उसे जारी करने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज देखे गए थे। यदि दस्तावेजों में अंतर होने के बावजूद नकल जारी की गई है तो इसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

वहीं, यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति ने भी अनियमितता में सहयोग किया था, तो उसकी भूमिका की भी जांच की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाना है।

अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सीडीओ की ओर से कराई जा रही विस्तृत जांच में सिर्फ ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका ही नहीं, बल्कि पूरे प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी। इसमें परिवार रजिस्टर में एंट्री किए जाने से लेकर उसकी नकल जारी होने तक की प्रक्रिया शामिल होगी।

जांच अधिकारी यह भी देख सकते हैं कि संबंधित एंट्री के लिए कोई आवेदन या अनुमति उपलब्ध थी या नहीं। इसके अलावा जिस दस्तावेज के आधार पर नाम दर्ज किया गया, उसकी प्रमाणिकता की भी जांच की जाएगी।

इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितता किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय या अन्य नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

पंचायत स्तर पर प्रशासन का सख्त संदेश

लखीमपुर खीरी में इस कार्रवाई के बाद पंचायत स्तर पर सरकारी अभिलेखों के रखरखाव को लेकर प्रशासन की सख्ती का संदेश गया है। सीडीओ अभिषेक कुमार इससे पहले भी दो अन्य ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कर चुके हैं।

इस तरह लगातार हो रही कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि प्रशासन पंचायत स्तर पर सरकारी कामकाज और अभिलेखों में लापरवाही को गंभीरता से ले रहा है। खासतौर पर परिवार रजिस्टर जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में दर्ज सूचनाओं को लेकर किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारी तय की जा रही है।

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सरकारी अभिलेखों में नियमों के विपरीत किसी भी प्रकार की एंट्री या बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। शिकायत मिलने पर संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।

जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल ग्राम पंचायत सचिव मनोज यादव को निलंबित किया जा चुका है और मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। इसलिए अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि परिवार रजिस्टर में कथित अनधिकृत एंट्री किस परिस्थिति में हुई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

जांच पूरी होने के बाद ही इस प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासनिक जांच का उद्देश्य रिकॉर्ड में हुई अनियमितता की पूरी प्रक्रिया को सामने लाना और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है।

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