स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में कानपुर के वार्ड-78 का कमाल, पढ़िए इस तरह से यूपी में मिला पहला स्थान
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कानपुर: स्वच्छ वायु प्रबंधन को लेकर कानपुर के सिविल लाइंस स्थित वार्ड-78 ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 के वार्ड स्तरीय मूल्यांकन में वार्ड-78 ने उत्तर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि से कानपुर नगर निगम की स्थानीय स्तर पर किए जा रहे स्वच्छ हवा, कचरा प्रबंधन, सड़क धूल नियंत्रण और हरित क्षेत्र से जुड़े प्रयासों को पहचान मिली है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी वार्ड-78 को राज्य स्तरीय वार्ड पुरस्कार के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वार्डों में शामिल किया गया है।
दरअसल, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल शहर की मौजूदा वायु गुणवत्ता को देखना नहीं है, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों और उनके क्रियान्वयन का भी मूल्यांकन करना है। केंद्र सरकार के अनुसार वार्ड स्तर का स्वच्छ वायु सर्वेक्षण जमीनी स्तर पर स्वच्छ हवा से जुड़े प्रयासों को पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। देशभर में 7,400 से अधिक वार्डों का वार्ड-स्तरीय मूल्यांकन किया गया।
ठोस कचरा प्रबंधन पर रहा विशेष जोर
वार्ड-78 की उपलब्धि में ठोस कचरा प्रबंधन को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। वार्ड में कचरे के संग्रहण और परिवहन को व्यवस्थित करने के लिए जीपीएस-इनेबल्ड वाहनों का इस्तेमाल किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वार्ड में 7 जीपीएस-सक्षम वाहनों के माध्यम से कचरा संग्रहण एवं परिवहन की व्यवस्था संचालित की गई।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरा उठाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनाना है। जीपीएस आधारित व्यवस्था से वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखने और कचरा संग्रहण व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिलती है। परिणामस्वरूप, नियमित कचरा उठान और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
इसके अलावा, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट यानी C&D Waste Management पर भी विशेष ध्यान दिया गया। निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले मलबे का उचित प्रबंधन शहरी क्षेत्रों में धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
सड़क धूल नियंत्रण पर भी फोकस
वार्ड-78 में सड़क धूल को नियंत्रित करने के लिए भी कई स्तरों पर काम किया गया। वार्ड में कुल करीब 20.84 किलोमीटर सड़क लंबाई बताई गई है, जिसमें लगभग 19 किलोमीटर सड़क को गड्ढामुक्त रखने का दावा किया गया है।
सड़कों की बेहतर स्थिति का सीधा संबंध धूल नियंत्रण से भी है। सड़क पर गड्ढे, टूटे किनारे और निर्माण सामग्री जमा होने की स्थिति में वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल बढ़ सकती है। इसलिए सड़क रखरखाव के साथ-साथ धूल नियंत्रण के उपायों को स्वच्छ वायु प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
हाल की रिपोर्टों में भी वार्ड-78 की उपलब्धि के पीछे ठोस कचरा प्रबंधन, धूल नियंत्रण, C&D वेस्ट प्रबंधन और हरित क्षेत्र विकसित करने जैसे कार्यों को प्रमुख आधार बताया गया है।
LPG और PNG कनेक्शन से स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा
वार्ड-78 में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 8,896 घरों को LPG/PNG से जोड़ा गया, जबकि 190 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में क्लीनर फ्यूल सुनिश्चित किया गया।
शहरी वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता और उसका इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। खासतौर पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल से स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।
इस तरह वार्ड में सड़क, कचरा और हरित क्षेत्र के साथ-साथ ईंधन से जुड़े पहलुओं को भी स्वच्छ वायु प्रबंधन की व्यापक रणनीति में शामिल किया गया।
मियावाकी प्लांटेशन से बढ़ाई गई हरियाली
वार्ड-78 में हरित क्षेत्र बढ़ाने और उपलब्ध हरियाली के रखरखाव पर भी ध्यान दिया गया। इसके तहत 14 स्थानों पर मियावाकी प्लांटेशन कराया गया। इसके साथ ही करीब 2.27 लाख वर्गमीटर हरित क्षेत्र के रखरखाव की जानकारी दी गई है।
मियावाकी पद्धति के तहत कम क्षेत्र में अपेक्षाकृत घना पौधारोपण किया जाता है। शहरी क्षेत्रों में ऐसे हरित क्षेत्र पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय हरियाली बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।
इसलिए वार्ड-78 की उपलब्धि केवल सड़क या कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें हरित क्षेत्र और पौधारोपण को भी शामिल किया गया। इससे स्वच्छ वायु के लिए स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को व्यापक रूप मिला।
कानपुर की समग्र रैंकिंग में गिरावट, वार्ड-78 ने दिलाई राहत
खास बात यह है कि जहां स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में कानपुर की शहर स्तर की रैंकिंग में इस बार गिरावट दर्ज हुई, वहीं वार्ड-78 ने प्रदेश स्तर पर पहला स्थान हासिल कर शहर को सकारात्मक पहचान दिलाई। रिपोर्ट के अनुसार कानपुर शहर पिछली रैंकिंग के मुकाबले छह पायदान नीचे खिसककर 11वें स्थान पर पहुंचा।
ऐसे में वार्ड-78 का प्रदर्शन नगर निगम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह उपलब्धि यह भी दिखाती है कि शहर में अलग-अलग वार्ड स्तर पर किए गए लक्षित प्रयास स्वच्छ वायु प्रबंधन में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
स्थानीय प्रयासों से स्वच्छ हवा की दिशा में बढ़ा कदम
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के तहत अब शहरों के साथ-साथ वार्ड स्तर पर भी गतिविधियों को महत्व दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार वार्ड-स्तरीय मूल्यांकन का उद्देश्य जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों को पहचान देना और स्थानीय निकायों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।
कानपुर के वार्ड-78 की उपलब्धि इसी दिशा में एक उदाहरण के तौर पर सामने आई है। ठोस कचरा प्रबंधन, C&D वेस्ट का निस्तारण, सड़क धूल नियंत्रण, बेहतर सड़कें, स्वच्छ ईंधन और हरित क्षेत्र जैसे विभिन्न पहलुओं पर एक साथ काम किया गया।
कुल मिलाकर, वार्ड-78 का उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल करना कानपुर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे स्थानीय स्तर पर स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस उपलब्धि को आगे भी बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी, सड़क एवं कचरा प्रबंधन की निरंतरता और हरित क्षेत्रों के संरक्षण पर लगातार ध्यान देना जरूरी होगा।

