कानपुर के वार्ड 72 दबौली में रोड लाइट को लेकर उठ रहे सवाल, शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान – जरूर पढ़िए ऐसा क्यों?

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रिपोर्ट – सर्वेश सोनू शर्मा 

कानपुर: शहर के वार्ड 72 दबौली क्षेत्र में खराब रोड लाइट को लेकर स्थानीय लोगों की परेशानी अब व्यवस्था और जिम्मेदारी से जुड़े सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में खराब पड़ी रोड लाइट को ठीक कराने के लिए लाइनमैन से संपर्क किया गया, लेकिन उन्हें कथित तौर पर यह जवाब मिला कि पार्षद की अनुमति के बिना काम नहीं किया जाएगा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित समस्या की शिकायत IGRS (Integrated Grievance Redressal System) पर भी दर्ज कराई जा चुकी है। इसके बावजूद रोड लाइट की समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। हालांकि, लाइनमैन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। इसलिए लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना भी आवश्यक है।

खराब रोड लाइट को लेकर बढ़ी लोगों की परेशानी

वार्ड 72 के दबौली क्षेत्र में रोड लाइट खराब होने के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि सड़क और गलियों में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था होना बुनियादी सुविधाओं का हिस्सा है। ऐसे में जब कोई रोड लाइट खराब होती है तो उसका समय पर रखरखाव और मरम्मत किया जाना जरूरी है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसी समस्या को दूर कराने के लिए उन्होंने संबंधित लाइनमैन से संपर्क किया। उनका दावा है कि बातचीत के दौरान लाइनमैन ने कथित तौर पर कहा कि पार्षद पति की ओर से पूर्व पार्षद के माध्यम से काम करने से मना किया गया है और पार्षद के कहने के बाद ही रोड लाइट ठीक की जाएगी।

यदि स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए ये दावे सही हैं, तो मामला केवल एक खराब रोड लाइट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सरकारी व्यवस्था में जिम्मेदारी और प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

IGRS शिकायत के बावजूद समाधान पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि रोड लाइट की समस्या को लेकर IGRS पर शिकायत दर्ज कराई गई है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने का दावा किया जा रहा है। लोगों का सवाल है कि जब किसी नागरिक की शिकायत आधिकारिक शिकायत प्रणाली के माध्यम से दर्ज होती है, तो उसका निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए।

दरअसल, IGRS जैसी शिकायत व्यवस्था का उद्देश्य ही नागरिकों की समस्याओं को संबंधित विभाग तक पहुंचाना और उनके निस्तारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। ऐसे में यदि किसी शिकायत के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही है, तो इसकी वजह स्पष्ट होना जरूरी है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि शिकायत दर्ज होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित विभाग ने जानबूझकर कार्रवाई रोकी है। शिकायत की स्थिति, संबंधित विभाग की जिम्मेदारी और अब तक की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

क्या सरकारी काम के लिए राजनीतिक अनुमति जरूरी है?

इस मामले में स्थानीय नागरिकों ने सबसे बड़ा सवाल सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर उठाया है। लोगों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी ने वास्तव में यह कहा है कि वह किसी जनप्रतिनिधि के कहने के बाद ही काम करेगा, तो इसकी जांच होनी चाहिए।

नागरिकों का तर्क है कि जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए प्रयास करने की भूमिका में होते हैं। वहीं, सरकारी कर्मचारियों को अपने विभागीय नियमों और अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार कार्य करना होता है।

इसलिए यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि रोड लाइट की मरम्मत के लिए निर्धारित प्रक्रिया क्या है और संबंधित कर्मचारी को काम करने के लिए किस स्तर से आदेश प्राप्त करना होता है। यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

जनता ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई

स्थानीय लोगों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ विवाद खड़ा करना नहीं है। उनकी मांग केवल इतनी है कि वार्ड 72 के नागरिकों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों और खराब रोड लाइट जैसी समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाए।

लोगों का कहना है कि सरकारी सुविधाएं जनता के लिए होती हैं। इसलिए उनके रखरखाव और संचालन में किसी प्रकार की राजनीतिक खींचतान नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही, यदि किसी कर्मचारी पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया जा रहा है, तो प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की ओर से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि IGRS पर शिकायत दर्ज है, तो उसकी वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि लोगों को पता चल सके कि शिकायत किस विभाग के पास है और उसके निस्तारण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

मूलभूत सुविधाओं को राजनीति से अलग रखने की मांग

वार्ड 72 के लोगों का कहना है कि रोड लाइट, सड़क, जल निकासी और सफाई जैसी सुविधाएं सीधे आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़ी हैं। इसलिए इन सुविधाओं को राजनीतिक मतभेदों से अलग रखते हुए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जनता ने अपने क्षेत्र के प्रतिनिधियों को इसलिए चुना है ताकि क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जा सके और उनका समाधान कराया जा सके। ऐसे में किसी सुविधा के रखरखाव को लेकर राजनीतिक विवाद की स्थिति बनना चिंता का विषय है।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि संबंधित नगर निकाय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और लाइनमैन की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है। साथ ही, IGRS शिकायत की स्थिति और रोड लाइट की मरम्मत के संबंध में विभागीय रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

वार्ड 72 के नागरिकों का सवाल फिलहाल यही है कि सरकारी मूलभूत सुविधाओं का काम निर्धारित नियमों के अनुसार होगा या किसी राजनीतिक निर्देश के आधार पर? अब लोगों को संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब और समस्या के समाधान का इंतजार है।

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