इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द की, लॉ छात्रा की रिहाई का रास्ता साफ

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Digital UP News Desk

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 वर्षीय लॉ छात्रा और लेबर एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को नेशनल सिक्यूरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले से पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में रहने वाले उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। आकृति चौधरी करीब पांच महीने से हिरासत में हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ है, हालांकि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित हैं तो उनकी रिहाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

आकृति चौधरी कानून की पढ़ाई कर रही हैं और सामाजिक एवं श्रमिक मुद्दों से भी जुड़ी रही हैं। उनके परिवार के मुताबिक, वह पढ़ाई के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता और बच्चों की शिक्षा जैसे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रही हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनके पिता अरुण चौधरी ने उम्मीद जताई है कि जेल से बाहर आने के बाद उनकी बेटी अपनी लॉ की पढ़ाई पूरी करेंगी और समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम जारी रखेंगी।

पांच महीने से NSA के तहत हिरासत में थीं आकृति

आकृति चौधरी को अप्रैल में नोएडा में हुए एक बड़े मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। आरोप था कि उन्होंने प्रदर्शन में शामिल मजदूरों के एक समूह को कथित तौर पर हिंसा के लिए उकसाया। इसके बाद उनके खिलाफ नेशनल सिक्यूरिटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई और उन्हें हिरासत में रखा गया।

हालांकि, आकृति की ओर से उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई। याचिका में हिरासत की कानूनी प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और सामग्री की विस्तृत जांच की।

इसके बाद कोर्ट ने आकृति चौधरी की हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

हाईकोर्ट ने हिरासत की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने की। अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान आकृति की हिरासत से संबंधित रिकॉर्ड और राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत सामग्री का परीक्षण किया।

कोर्ट के अनुसार, हिरासत के आधार से जुड़े दावों में कुछ महत्वपूर्ण विसंगतियां सामने आईं। अदालत ने यह भी पाया कि हिरासत के आधार में राज्य सरकार की ओर से पेश की गई कहानी को लेकर गंभीर सवाल मौजूद थे। इसके अलावा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत जारी किए गए नोटिस की प्रक्रिया में भी अदालत ने खामियां पाईं।

इन कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने NSA के तहत जारी हिरासत आदेश को रद्द कर दिया। अदालत का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रखने की प्रक्रिया में निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन आवश्यक होता है।

नोएडा में हुआ था बड़ा मजदूर आंदोलन

आकृति चौधरी की हिरासत जिस मामले से जुड़ी है, उसकी पृष्ठभूमि अप्रैल की शुरुआत में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन से संबंधित है। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में फैक्ट्री कर्मचारियों के शामिल होने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 40 हजार से अधिक श्रमिकों ने बेहतर वेतन और काम की परिस्थितियों में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद हिंसा के आरोप सामने आए। इसी घटनाक्रम से जुड़े मामले में आकृति चौधरी पर प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर उकसाने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट में उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने हिरासत के आधार और संबंधित प्रक्रिया की जांच की।

अदालत के फैसले के बाद अब आकृति की हिरासत समाप्त हो गई है। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों की स्थिति अलग हो सकती है और उनकी अंतिम रिहाई संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सुनिश्चित होगी।

लॉ की पढ़ाई के साथ सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं

आकृति चौधरी के पिता अरुण चौधरी ने अपनी बेटी के सामाजिक कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार को उनके समर्पण पर गर्व है। उन्होंने बताया कि आकृति ने दिल्ली के दौलत राम कॉलेज में पढ़ाई के दौरान भी सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लिया।

उनके मुताबिक, आकृति ने आंगनवाड़ी केंद्रों में स्वयंसेवक के तौर पर काम किया। इसके अलावा वह मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी आवाज उठाती रही हैं। अपने खाली समय में वह बच्चों को पढ़ाने का काम भी करती थीं।

परिवार का कहना है कि सामाजिक सरोकारों के साथ आकृति ने अपनी शिक्षा को भी जारी रखा। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिवार को उम्मीद है कि वह अपनी अधूरी लॉ की पढ़ाई पूरी कर पाएंगी।

पिता ने कहा- मुश्किल दौर किसी बुरे सपने जैसा था

हाईकोर्ट के फैसले के बाद आकृति के पिता अरुण चौधरी ने राहत व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बेटी को जिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, वह परिवार के लिए बेहद कठिन समय था। उन्होंने इसे एक बुरे सपने जैसा बताया।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को आकृति के गरीब और वंचित लोगों की मदद करने के प्रति समर्पण पर गर्व है। पिता के मुताबिक, आकृति हमेशा समाज के जरूरतमंद वर्गों की सहायता के लिए आगे रही हैं।

अरुण चौधरी खुद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के फुल टाइम वर्कर हैं और पार्टी के मुखपत्र ‘गणशक्ति’ के साउथ बंगाल एडिशन से जुड़े हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी बेटी फिर से सामान्य जीवन की ओर लौट सकेंगी।

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में मिली राहत

आकृति चौधरी की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में उनकी हिरासत की वैधता पर सवाल उठाया गया था। इस तरह की याचिका का उद्देश्य यह जांचना होता है कि किसी व्यक्ति को कानून के अनुरूप हिरासत में रखा गया है या नहीं।

हाईकोर्ट ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और राज्य सरकार की ओर से दिए गए आधारों की समीक्षा की। सुनवाई के दौरान अदालत को हिरासत के आधार से जुड़े कुछ दावों में असंगतियां दिखाई दीं। साथ ही, नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में भी कानूनी कमियां पाई गईं।

इन सभी पहलुओं को देखते हुए कोर्ट ने हिरासत आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत का आदेश यह भी स्पष्ट करता है कि यदि आकृति किसी अन्य मामले में वांछित हैं तो उस मामले की कानूनी स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

हाईकोर्ट के फैसले से परिवार को बड़ी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला आकृति चौधरी और उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आया है। करीब पांच महीने तक हिरासत में रहने के बाद अब उनके बाहर आने की संभावना बनी है। परिवार को उम्मीद है कि वह आगे अपनी पढ़ाई पूरी करेंगी और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी।

फिलहाल, उनकी रिहाई अन्य मामलों में कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत आवश्यक नहीं है और संबंधित औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं, तो अदालत के निर्देश के अनुसार उन्हें रिहा किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द करने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला निवारक हिरासत से जुड़े कानूनी मानकों और निर्धारित प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करता है। साथ ही, यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है कि किसी भी हिरासत आदेश की वैधता की न्यायिक समीक्षा किस प्रकार की जाती है।

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