कानपुर में जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का डीएम ने लिया जायजा, करीब एक हजार परिवार आंशिक रूप से प्रभावित
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर । पांडु नदी के बढ़े जलस्तर के कारण कानपुर नगर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को पांडु नदी से सटे प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अंबेडकर नगर, पिपौरी सहित आसपास की बस्तियों में पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को जाना। जिलाधिकारी ने प्रभावित परिवारों को प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
प्रशासन के प्रारंभिक आकलन के अनुसार पांडु नदी से सटे निचले इलाकों में करीब एक हजार परिवार आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। हालांकि, प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं और जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है। वहीं, जलभराव वाले इलाकों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं।
प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री का वितरण
अंबेडकर नगर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने जलभराव प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री की किट वितरित की। प्रशासन के अनुसार अब तक करीब 500 प्रभावित परिवारों को राहत किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
राहत किट में परिवारों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खाद्य सामग्री के साथ आवश्यक घरेलू और स्वच्छता संबंधी सामान भी शामिल किया गया है। प्रत्येक किट में 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, दो किलो अरहर की दाल, दो किलो भुना चना, दो किलो चना, एक किलो चीनी, एक किलो नमक और एक लीटर सरसों का तेल अथवा रिफाइंड दिया जा रहा है।
इसके अलावा किट में 10 पैकेट बिस्कुट, 200 ग्राम हल्दी, 100 ग्राम मिर्च और 200 ग्राम सब्जी मसाला भी शामिल है। प्रभावित परिवारों को नहाने और कपड़े धोने का साबुन, सैनिटरी पैड, सूती कपड़ा, डेटॉल या सेवलॉन, डिस्पोजेबल सामग्री, तिरपाल, ढक्कनदार बाल्टी और मग जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इतना ही नहीं, प्रत्येक प्रभावित परिवार को अतिरिक्त रूप से 10 किलो आलू और 2.5 किलो लाई की बोरी भी दी जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जलभराव के कारण प्रभावित परिवारों को तत्काल आवश्यक खाद्य एवं घरेलू सामग्री के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
इन इलाकों में हुआ जलभराव
जिलाधिकारी ने बताया कि पांडु नदी के कैचमेंट एरिया में बसी निचली बस्तियों में जलभराव की स्थिति सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में ग्राम गुजैनी के मायापुरम और रविदासपुरम, पिपौरी, मर्दनपुर, मेहरबान सिंह का पुरवा, ग्राम जरौली के गोपाल नगर, वरुण विहार, बर्रा, पनका और बहादुर नगर क्षेत्र शामिल हैं।
प्रशासन के अनुसार इन क्षेत्रों में जलभराव मुख्य रूप से पांडु नदी के कैचमेंट एरिया में बसावट होने के कारण हुआ है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और आवश्यकता के अनुसार राहत एवं सहायता पहुंचाई जा रही है।
वहीं, प्रभावित इलाकों में लोगों से संवाद कर उनकी वास्तविक जरूरतों की जानकारी भी जुटाई जा रही है, ताकि राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
पिपौरी में एनडीआरएफ की टीम तैनात
जलभराव की स्थिति को देखते हुए पिपौरी क्षेत्र में एनडीआरएफ की टीम तैनात की गई है। टीम मौके पर रहकर स्थानीय लोगों की सहायता कर रही है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
एनडीआरएफ अधिकारियों के अनुसार गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर करीब एक से डेढ़ फुट तक पानी है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पानी का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। टीम जरूरतमंद लोगों की सहायता के साथ-साथ परिस्थितियों का आकलन कर रही है।
प्रशासन की ओर से भी अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी परिवार को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
अधिकारियों को लगातार निगरानी के निर्देश
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व डॉ. विवेक चतुर्वेदी, एसडीएम सदर एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अनुभव सिंह तथा तहसीलदार विनय द्विवेदी प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत कर रहे हैं और उनकी जरूरतों के अनुसार राहत सामग्री एवं अन्य सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
इसके साथ ही प्रशासन यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि जो परिवार राहत शिविरों में नहीं पहुंचे हैं और अभी अपने घरों में रह रहे हैं, उन्हें भी सरकारी राहत का लाभ मिले।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे परिवारों को चिह्नित कर उनके घर तक राहत किट पहुंचाई जाए। इसका उद्देश्य यह है कि जलभराव के कारण घर से बाहर नहीं निकल पा रहे लोगों तक भी आवश्यक सामग्री समय से पहुंच सके।
कम्युनिटी किचन से रोजाना 400 लोगों को भोजन
प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन की ओर से कम्युनिटी किचन का संचालन भी किया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रतिदिन करीब 400 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रशासन का प्रयास है कि जलभराव के दौरान प्रभावित परिवारों को भोजन और आवश्यक सामग्री की कमी न हो। इसके लिए राहत वितरण और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था को प्रभावित क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार संचालित किया जा रहा है।
पानी उतरने के बाद विशेष सफाई अभियान
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जैसे ही जलस्तर सामान्य हो और प्रभावित बस्तियों से पानी पूरी तरह उतर जाए, वहां तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। उन्होंने जमा गंदगी और कचरे के निस्तारण के साथ-साथ एंटी-लार्वा और कीटाणुनाशक का छिड़काव कराने के निर्देश दिए।
दरअसल, जलभराव के बाद साफ-सफाई का विशेष महत्व होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रखने और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रभावित इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी करने को भी कहा गया है।
यदि किसी क्षेत्र में बुखार, डायरिया अथवा अन्य संक्रामक बीमारी के लक्षण सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्ति को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस तरह प्रशासन जलभराव के साथ-साथ इसके बाद उत्पन्न होने वाली संभावित स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर भी सतर्क है।
गंगा-यमुना का जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे
जिलाधिकारी ने बताया कि फिलहाल गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे है। इसलिए इन दोनों नदियों को लेकर वर्तमान में कोई विशेष समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि पांडु एक मौसमी नदी है और इसके जलस्तर में वृद्धि के कारण आसपास के निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी है।
हालांकि, प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद रहकर स्थिति का आकलन करने और आवश्यकता के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
जिलाधिकारी ने आम लोगों से किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी तरह की समस्या होने पर प्रशासन को तत्काल सूचना दें। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें भोजन, राहत सामग्री, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराना है।

