सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के जाली नोट, नौ मशीनों से दोबारा गिनती शुरू

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Digital UP News Desk

सहारनपुर: सोफिया मार्केट स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने के मामले में जांच लगातार सख्त होती जा रही है। अब तक की जांच में 17 करोड़ 29 लाख रुपये मूल्य के जाली नोट सामने आने की बात कही जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटों की गिनती पूरी होने के बाद अब दोबारा गिनती और सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि किसी भी स्तर पर संख्या या पहचान को लेकर कोई चूक न रह जाए।

इसके लिए बैंक ने नोटों की जांच में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की संख्या भी बढ़ा दी है। पहले जहां चार मशीनों से नोटों की गिनती की जा रही थी, वहीं अब पांच अतिरिक्त मशीनें मंगाई गई हैं। इस तरह कुल नौ मशीनों की मदद से नोटों की दोबारा जांच की जा रही है। वहीं, करीब 30 बैंक अधिकारियों को दो शिफ्ट में इस काम में लगाया गया है। जरूरत के अनुसार दूसरे जिलों से भी बैंक कर्मचारियों को सहारनपुर बुलाया गया है।

दोबारा गिने जा रहे नोट, चूक की गुंजाइश खत्म करने पर जोर

करेंसी चेस्ट में जाली नोटों की बड़ी संख्या सामने आने के बाद बैंक और जांच एजेंसियां किसी भी तरह की जल्दबाजी से बच रही हैं। यही वजह है कि पहले चरण में नोटों की गिनती पूरी होने के बावजूद अब दोबारा पूरी नकदी का सत्यापन कराया जा रहा है।

अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि करेंसी चेस्ट में मौजूद नकदी की वास्तविक संख्या और जाली नोटों की पहचान में किसी प्रकार की गलती न हो। इसके लिए नौ मशीनों की सहायता ली जा रही है। साथ ही, बैंक अधिकारियों की अलग-अलग टीमों को शिफ्ट के अनुसार जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अलावा, आरबीआई और बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। इस जांच में करेंसी चेस्ट में नकदी के आने-जाने से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गंगोह करेंसी चेस्ट भी जांच के दायरे में

सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद पंजाब नेशनल बैंक की गंगोह करेंसी चेस्ट को भी अलर्ट कर दिया गया है। यहां करीब 12 सदस्यीय टीम ने जांच शुरू की है। टीम करेंसी चेस्ट में मौजूद नकदी के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है।

गंगोह करेंसी चेस्ट में जांच को फिलहाल गोपनीय रखा गया है। यहां नोटों की गिनती और जांच के लिए तीन मशीनें लगाई गई हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार महानगर स्थित करेंसी चेस्ट में मामला सामने आने से पहले गंगोह करेंसी चेस्ट से भी लेन-देन किया गया था। इसी कारण अब जांच का दायरा वहां तक भी बढ़ाया गया है।

जांच टीम यह समझने का प्रयास कर रही है कि दोनों करेंसी चेस्ट के बीच नकदी के लेन-देन की प्रक्रिया क्या थी और संबंधित रिकॉर्ड में किसी प्रकार की विसंगति तो नहीं है।

फॉरेंसिक टीम ने जुटाए अहम साक्ष्य

मामले की जांच में फॉरेंसिक टीम की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। टीम ने करेंसी चेस्ट का निरीक्षण करने के साथ बैंक अधिकारियों से करीब 15 बिंदुओं पर साक्ष्य मांगे हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों के फिंगर प्रिंट और अन्य तकनीकी साक्ष्य शामिल हैं।

बृहस्पतिवार को फॉरेंसिक टीम करेंसी चेस्ट पहुंची और वहां उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। टीम ने सीसीटीवी कैमरों और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का भी निरीक्षण किया। इसके बाद शुक्रवार सुबह टीम दोबारा करेंसी चेस्ट पहुंची। करीब डेढ़ दिन तक जांच करने के बाद फॉरेंसिक टीम ने अपनी प्राथमिक पड़ताल पूरी की।

हालांकि, जाली नोटों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच अभी बाकी बताई जा रही है। बैंक की ओर से मांगे गए आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध होने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जा सकता है।

सीसीटीवी और उपकरणों से छेड़छाड़ की भी पड़ताल

फॉरेंसिक जांच के दौरान केवल फिंगर प्रिंट या सीसीटीवी फुटेज पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि यह भी देखा गया कि करेंसी चेस्ट में लगे कैमरों या अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ तो नहीं हुई।

सीसीटीवी फुटेज इस मामले में अहम साक्ष्य साबित हो सकती है। इसके जरिए यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि करेंसी चेस्ट में नकदी कब और किस प्रक्रिया के तहत पहुंची। साथ ही, संबंधित समय अवधि में किन कर्मचारियों या अधिकारियों की आवाजाही रही, इसकी भी जांच की जा सकती है।

फॉरेंसिक टीम की ओर से बैंक से मांगे गए साक्ष्यों के मिलने के बाद जांच को और आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद है।

जाली नोट अलग रखे गए, लैब भेजे जा सकते हैं नमूने

अब तक की जांच में सामने आए जाली नोटों को करेंसी चेस्ट में अलग रखा गया है। इन नोटों को अन्य नकदी से अलग रखकर सुरक्षित किया गया है, ताकि आगे की जांच में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बताया जा रहा है कि फॉरेंसिक टीम ने अभी इन जाली नोटों का विस्तृत परीक्षण नहीं किया है। आगे जरूरत पड़ने पर कुछ नोटों के नमूने विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जा सकते हैं। वहां जांच के जरिए नोटों की गुणवत्ता, प्रिंटिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया जा सकता है।

हालांकि, प्रयोगशाला में नमूने भेजने को लेकर अंतिम निर्णय जांच की प्रगति और संबंधित अधिकारियों के निर्देशों के आधार पर लिया जाएगा।

29 लाख रुपये की और जाली करेंसी सामने आई

जांच के दौरान जाली नोटों की कुल कीमत में करीब 29 लाख रुपये की और बढ़ोतरी सामने आई है। इसके बाद जाली नोटों की कुल कीमत 17 करोड़ 29 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

इतनी बड़ी मात्रा में जाली करेंसी सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और करेंसी चेस्ट में नकदी के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां इस बात पर विशेष ध्यान दे रही हैं कि जाली नोट किस चरण में करेंसी चेस्ट तक पहुंचे।

लखनऊ से पहुंचे आरबीआई के अधिकारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए आरबीआई के अधिकारी भी जांच में सक्रिय हैं। बुधवार को लखनऊ से आरबीआई के कई अधिकारी सहारनपुर पहुंचे थे। उन्होंने बैंक अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम के साथ करेंसी चेस्ट की जांच की।

आरबीआई अधिकारियों की मौजूदगी में करेंसी चेस्ट की प्रक्रिया, रिकॉर्ड और नकदी से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। इसके अलावा, बैंक स्तर पर भी अधिकारियों की टीमें मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल: करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची इतनी जाली करेंसी?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अभी भी बना हुआ है कि आखिर 17.29 करोड़ रुपये मूल्य की जाली करेंसी करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची? इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोटों का मिलना सामान्य घटना नहीं है। इसलिए जांच एजेंसियां अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं कि नकदी के स्रोत से लेकर करेंसी चेस्ट तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं।

इसके साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि जाली नोटों की पहचान पहले क्यों नहीं हो सकी और वे किस स्तर पर सिस्टम में शामिल हुए। हालांकि, इन सवालों के जवाब विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।

फिलहाल, बैंक अधिकारी दोबारा नोटों की गिनती और सत्यापन में जुटे हैं। वहीं, फॉरेंसिक टीम, आरबीआई और अन्य संबंधित अधिकारी अपने-अपने स्तर पर जांच आगे बढ़ा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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