अंकित बालियान हत्याकांड: सुमित-मोहित की मुठभेड़ पर फिर उठे सवाल, भोलू शाहपुरिया की पोस्ट की जांच में जुटी पुलिस

WhatsApp Image 2026-09-04 at 3.15.31 PM

Digital UP News Desk

हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड की जांच के बीच सोशल मीडिया पर सामने आई एक नई पोस्ट ने मामले को लेकर चर्चा और बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार शाम इंस्टाग्राम पर भोलू शाहपुरिया के नाम से बनी एक आईडी से पोस्ट साझा की गई। इस पोस्ट में दावा किया गया कि अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारे गए सुमित और मोहित का एनकाउंटर नहीं हुआ था, बल्कि उनकी हत्या की गई। हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

मामला सामने आने के बाद शामली पुलिस ने पोस्ट और इंस्टाग्राम आईडी की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जिस आईडी से पोस्ट साझा की गई, वह वास्तव में भोलू शाहपुरिया की है या किसी अन्य व्यक्ति ने उसके नाम का इस्तेमाल करके इसे बनाया है। इसके साथ ही पोस्ट की भाषा, उसमें किए गए दावों और आईडी से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

सुमित और मोहित को लेकर पोस्ट में क्या दावा किया गया?

वायरल हो रही पोस्ट में दावा किया गया है कि सुमित और मोहित को 30 अगस्त की रात पंजाब के अमृतसर में गोल्डन टेंपल के पास स्थित एक होटल से उठाया गया था। इसके बाद उन्हें शामली लाकर उनकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया है। पोस्ट में पुलिस द्वारा की गई मुठभेड़ की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए गए हैं और इसे एनकाउंटर मानने से इनकार किया गया है।

हालांकि, इन दावों को फिलहाल केवल सोशल मीडिया पर किए गए दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है। पुलिस या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए पोस्ट में कही गई बातों को तथ्य के रूप में मानना उचित नहीं होगा।

पोस्ट में अंकित बालियान को निर्दोष बताए जाने का दावा भी किया गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ अथवा उकसाने वाली सामग्री साझा करने से खुद को अलग बताया गया है। पोस्ट के अंत में ‘गोगी भाई’ लिखा गया है, जिसके कारण पुलिस के सामने इस पोस्ट के स्रोत और इसके पीछे सक्रिय लोगों की पहचान का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है।

पुलिस कर रही है आईडी की तकनीकी जांच

नई पोस्ट के सामने आने के बाद शामली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। शामली के एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि पोस्ट वास्तव में किस व्यक्ति ने साझा की है। इसके लिए इंस्टाग्राम आईडी से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी सत्यापित कर रही है कि आईडी भोलू शाहपुरिया की वास्तविक आईडी है या उसके नाम पर किसी अन्य व्यक्ति ने सोशल मीडिया अकाउंट बनाया है। इसके अलावा पोस्ट कब और कहां से अपलोड की गई, अकाउंट का संचालन कौन कर रहा है और इससे जुड़े अन्य डिजिटल साक्ष्य क्या हैं, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।

दरअसल, आपराधिक मामलों में सोशल मीडिया पर सामने आने वाली पोस्ट कई बार जांच की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में पुलिस के लिए पोस्ट के वास्तविक स्रोत की पुष्टि करना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी वजह से पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों के साथ-साथ तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बना रही है।

27 अगस्त की पोस्ट से भी जुड़ रहा मामला

अंकित बालियान हत्याकांड में सोशल मीडिया पोस्ट का यह सिलसिला नया नहीं है। इससे पहले 27 अगस्त को भी भोलू शाहपुरिया के नाम से एक पोस्ट सोशल मीडिया पर सामने आई थी। उस पोस्ट में अंकित बालियान की शामली में हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था।

उस पोस्ट में अंकित पर दुश्मनों का साथ देने और गोगी गिरोह के खिलाफ गाना बनाने जैसे आरोप लगाए गए थे। इसके साथ ही धमकी वाला संदेश भी साझा किया गया था। पोस्ट के सामने आने के बाद पुलिस ने इसकी गंभीरता से जांच शुरू की थी।

बाद में पुलिस की जांच में दावा किया गया कि अंकित की हत्या की जिम्मेदारी लेने वाली पोस्ट कनाडा में बैठे चिराग और अमेरिका में बैठे मोंटी ने भोलू शाहपुरिया के नाम से साझा की थी। इस कार्रवाई के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि सोशल मीडिया पर भोलू शाहपुरिया के नाम से कौन-कौन लोग पोस्ट कर रहे हैं और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या है।

31 अगस्त की पुलिस मुठभेड़ के बाद बढ़े सवाल

अंकित बालियान हत्याकांड की जांच के दौरान 31 अगस्त को पुलिस मुठभेड़ में सुमित और मोहित की मौत हुई थी। पुलिस कार्रवाई के बाद मामले में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। अब नई सोशल मीडिया पोस्ट में भी मुठभेड़ की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने से यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

हालांकि, पुलिस मुठभेड़ के संबंध में सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोपों को अभी जांच के निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां ही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट कर सकती हैं।

इसी बीच मुठभेड़ की जांच को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग की ओर से भी प्रक्रिया सामने आ चुकी है। आयोग की ओर से शामली जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे मुठभेड़ से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक जांच का महत्व और बढ़ गया है।

सोशल मीडिया नेटवर्क भी जांच के दायरे में

पुलिस अब केवल वायरल पोस्ट तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अंकित बालियान हत्याकांड से जुड़े पूरे सोशल मीडिया नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट के बीच कोई आपसी संबंध है या नहीं और क्या एक ही समूह अलग-अलग नामों से पोस्ट साझा कर रहा है।

इसके अलावा पुलिस पोस्ट साझा करने वाले संभावित लोगों की पहचान, डिजिटल गतिविधियों और उनके संपर्कों की भी जांच कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि नई पोस्ट वास्तव में किसने साझा की और इसमें किए गए दावों की सच्चाई क्या है। पुलिस इन दोनों पहलुओं की जांच कर रही है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रही किसी भी अपुष्ट जानकारी को तथ्य मानकर आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी सच्चाई

अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस की जांच पहले से ही कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित है। अब नई सोशल मीडिया पोस्ट ने जांच के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। पुलिस को एक ओर पोस्ट के वास्तविक स्रोत का पता लगाना है, वहीं दूसरी ओर इसमें लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक जांच भी करनी है।

इसके साथ ही मुठभेड़ से जुड़े सवालों पर संबंधित अधिकारियों और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। मानवाधिकार आयोग की प्रक्रिया और पुलिस की तकनीकी जांच से आने वाले निष्कर्ष इस पूरे मामले को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट, इंस्टाग्राम आईडी और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। आईडी किसकी है, पोस्ट किसने साझा की और पोस्ट में किए गए दावे वास्तविक हैं या नहीं—इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। ऐसे में मामले से जुड़ी किसी भी नई जानकारी को आधिकारिक जांच और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर ही देखा जाना जरूरी है।

You may have missed