पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, निचले इलाकों की बढ़ी चिंता, प्रशासन अलर्ट
Digital UP News Desk
पटना: बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे और निचले इलाकों में चिंता बढ़ गई है। गंगा इस समय कई स्थानों पर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। इसके चलते दीघा और गांधी घाट समेत शहर के विभिन्न घाटों तथा आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। मरीन ड्राइव यानी जेपी गंगा पथ पर स्थित कृष्णा घाट की सीढ़ियां भी पानी की जद में आ गई हैं।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। प्रशासन की ओर से नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने तथा जोखिम वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की गई है। फिलहाल मुख्य शहरी क्षेत्रों में गंगा का पानी प्रवेश नहीं कर पाया है, लेकिन तटीय और निचले इलाकों में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
गांधी घाट पर खतरे के निशान से 1.76 मीटर ऊपर पानी
पटना में गंगा के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांधी घाट पर पानी खतरे के निशान से 1.76 मीटर ऊपर दर्ज किया गया है। वहीं, दीघा घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से 1.68 मीटर ऊपर पहुंच गया है।
जलस्तर बढ़ने के कारण गंगा के किनारे मौजूद कई संरचनाएं पानी के संपर्क में आ गई हैं। कृष्णा घाट की सीढ़ियों तक पानी पहुंचने से नदी के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत मिल रहा है। ऐसे में प्रशासन की ओर से हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
दियारा क्षेत्र में बढ़ी मुश्किलें
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर दियारा क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। नदी के आसपास बसे कई इलाकों में पानी पहुंचने के बाद लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। कई परिवार अपने जरूरी सामान के साथ-साथ मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं।
दियारा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग और मवेशी रहते हैं। इसलिए अचानक बढ़ते जलस्तर के बीच उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है।
प्रशासन की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं और नदी के किनारे जाने से बचें। इसके अलावा लोगों से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
कई जिलों में हाई अलर्ट
गंगा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बिहार के कई जिलों में प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पटना के अलावा भोजपुर, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद समेत नदी किनारे तथा निचले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
प्रशासन की ओर से नदी के आसपास रहने वाले लोगों से स्थिति पर नजर रखने और किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की गई है। आपात स्थिति में लोग राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के 1070 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लिया स्थिति का जायजा
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नदी के जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से समीक्षा
वहीं, उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने पटना स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बाढ़ प्रभावित जिलों की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जिलों में नदियों के जलस्तर, तटबंधों की स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी ली।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए तटबंधों की स्थिति का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
भागलपुर में स्थिति अधिक प्रभावित
समीक्षा के दौरान विजय कुमार चौधरी ने बताया कि भागलपुर जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित है। खरीक अंचल के राघोपुर पंचायत में स्थिति गंभीर बनी हुई है, हालांकि प्रशासन के अनुसार हालात नियंत्रण में हैं।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। स्थानीय स्तर पर लोगों की जरूरतों का आकलन कर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
पुनपुन और दरधा नदी का जलस्तर भी बढ़ा
झारखंड में हुई भारी बारिश का असर बिहार की नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। बारिश के चलते पुनपुन और दरधा नदी के जलस्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे नदी किनारे बसे क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
जल संसाधन विभाग के अभियंता लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव की निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में तटबंधों की स्थिति की भी जांच की जा रही है।
प्रशासन की अपील, अफवाहों से बचें
बाढ़ जैसे हालात में प्रशासन के सामने राहत और बचाव के साथ-साथ लोगों तक सही सूचना पहुंचाने की भी चुनौती होती है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे केवल प्रशासन और अधिकृत माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं पर भरोसा करें।
नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों को विशेष रूप से बच्चों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा नाव या अन्य साधनों से अनधिकृत तरीके से नदी पार करने से बचने की अपील भी की गई है।
आगे की स्थिति पर प्रशासन की नजर
पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण आने वाले समय में स्थिति पर विशेष नजर रखना जरूरी है। फिलहाल मुख्य शहरी क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है।
प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारी लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखा जा रहा है। यदि जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है तो प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान को और तेज किया जा सकता है।
कुल मिलाकर पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। गांधी घाट और दीघा घाट पर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा पानी प्रशासन के लिए सतर्कता का संकेत है। ऐसे में आने वाले दिनों में जलस्तर की स्थिति और प्रशासन की तैयारियां महत्वपूर्ण रहेंगी।

