कानपुर देहात में पक्के रास्ते की उठी मांग, NHRC के संज्ञान के बाद भी एक महीने से कार्रवाई का है इंतजार

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा 

कानपुर देहात: विकासखंड राजपुर के ग्राम बिलासपुर बाँगर में एक सार्वजनिक रास्ते के स्थायी निर्माण की मांग लंबे समय से बनी हुई है। अमराहट कैनाल पम्प माइनर की पुलिया से मुन्नीलाल के दरवाजे तक जाने वाले रास्ते की बदहाल स्थिति का मामला अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि आयोग के संज्ञान और जिला प्रशासन की ओर से अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद करीब एक महीने बाद भी मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह रास्ता वर्षों से स्थानीय लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन है। बरसात के दौरान स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा होने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीण अब कागजी कार्रवाई के बजाय धरातल पर स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

NHRC ने मांगी थी Action Taken Report

उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, इस मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली ने वाद संख्या 1435/24/79/2026 में 27 मई 2026 को जिला प्रशासन से Action Taken Report (ATR) मांगी थी।

इसके अनुपालन में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), कानपुर देहात की ओर से 15 जुलाई 2026 को पत्र संख्या 94/शि०लि०-का०दे०/आयोग संदर्भ/जाँच/2026 जारी किया गया। इस पत्र के क्रम में संबंधित अधिकारियों को मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किए जाने का उल्लेख उपलब्ध रिकॉर्ड में है।

अभिलेख के मुताबिक, मामले को जिला स्तरीय अधिकारियों और विकास विभाग के स्तर पर भी कार्रवाई के लिए संदर्भित किया गया। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि निर्देश जारी होने के बाद भी रास्ते की स्थिति में अभी तक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

वर्ष 2009 से चली आ रही है समस्या

ग्रामीणों के अनुसार, रास्ते की समस्या कोई नई नहीं है। इसका समाधान कराने के लिए वर्ष 2009 से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने वर्ष 2009 में मार्ग निर्माण के लिए प्रार्थना-पत्र दिए जाने की बात कही है।

इसके बाद वर्ष 2010 में संबंधित मार्ग और क्षेत्र में मनरेगा के तहत मिट्टी भराई कार्य के लिए वित्तीय स्वीकृति से जुड़े अभिलेख होने की जानकारी सामने आई। इसके बावजूद रास्ते का स्थायी निर्माण नहीं हो सका।

वर्ष 2014 में यह मामला जनहित याचिका (PIL) संख्या 30382/2014 के माध्यम से उच्च न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद वर्ष 2016 में तहसीलदार स्तर से रास्ते की पैमाइश और निर्माण से संबंधित कार्रवाई किए जाने का भी उल्लेख उपलब्ध रिकॉर्ड में है।

रिकॉर्ड के अनुसार, 14 नवंबर 2016 को मार्ग निर्माण से संबंधित निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

पंचायत की योजनाओं में भी आया रास्ते का मामला

समय-समय पर ग्राम पंचायत की योजनाओं और बैठकों में भी इस मार्ग के निर्माण का मुद्दा उठता रहा है। उपलब्ध अभिलेख में वर्ष 2023 के TS No. 224/2023-24 के बाद रास्ते के एक हिस्से में मिट्टी भराई किए जाने का उल्लेख है।

इसके अलावा, वर्ष 2025 की ग्राम पंचायत की खुली बैठक में भी चरण सिंह के दरवाजे से मुन्नीलाल के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग मार्ग निर्माण का प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी दी गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्ताव और कागजी प्रक्रिया के बावजूद अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि रास्ते पर स्थायी निर्माण हो जाए तो बरसात के दौरान होने वाली परेशानी से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

बारिश में बढ़ जाती है ग्रामीणों की परेशानी

ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात के दिनों में रास्ते पर जलभराव और कीचड़ की समस्या गंभीर हो जाती है। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण रास्ते से गुजरना मुश्किल हो जाता है।

इसका असर विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और विद्यालय जाने वाले विद्यार्थियों पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के लिए भी लोगों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।

NHRC के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में भी मार्ग पर जलभराव, कीचड़, जल निकासी की समस्या तथा आसपास के घरों और सरकारी विद्यालय तक पानी पहुंचने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है।

रोजाना सैकड़ों लोगों का आवागमन

उपलब्ध शिकायत और अभिलेख में इस रास्ते को सार्वजनिक मार्ग बताया गया है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि मार्ग से प्रतिदिन करीब 200 से 500 लोगों का आवागमन होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन वाले रास्ते की स्थिति बेहतर होना जरूरी है। यदि मार्ग का स्थायी निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था हो जाए तो स्थानीय लोगों को वर्षभर सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकती है।

संयुक्त निरीक्षण की मांग

ग्रामीणों ने जिला विकास अधिकारी, उपजिलाधिकारी सिकंदरा, जिला पंचायत राज अधिकारी और खंड विकास अधिकारी राजपुर से मामले में संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है।

उनकी मांग है कि मौके पर पहुंचकर रास्ते की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। इसके साथ ही जल निकासी की व्यवस्था, संभावित अतिक्रमण और मार्ग की उपलब्ध चौड़ाई आदि की भी जांच की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद आवश्यकतानुसार स्थायी सड़क या इंटरलॉकिंग मार्ग का निर्माण कराया जाना चाहिए, ताकि समस्या का बार-बार अस्थायी समाधान करने की जरूरत न पड़े।

अब कागजी कार्रवाई नहीं, निर्माण की उम्मीद

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वह अधिकारियों और संबंधित विभागों के समक्ष रास्ते की समस्या उठाते आ रहे हैं। अब जब मामला राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तक पहुंच चुका है और जिला प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, तो उन्हें धरातल पर काम शुरू होने की उम्मीद है।

उनका कहना है कि केवल पत्राचार और रिपोर्ट तैयार करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच कर स्थायी निर्माण कार्य शुरू करना जरूरी है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांग

ग्रामीण चाहते हैं कि अमराहट कैनाल पम्प माइनर की पुलिया से मुन्नीलाल के दरवाजे तक सार्वजनिक रास्ते का जल्द से जल्द स्थायी निर्माण कराया जाए। साथ ही, जलभराव की समस्या को देखते हुए उचित जल निकासी की व्यवस्था की जाए।

ग्रामीणों की मांग है कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के लिए सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।

कुल मिलाकर, बिलासपुर बाँगर में सार्वजनिक रास्ते की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। उपलब्ध रिकॉर्ड में अलग-अलग वर्षों में इस मामले को लेकर हुई कार्रवाई और प्रस्तावों का उल्लेख है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। उनका कहना है कि 79 वर्ष बाद भी यदि उन्हें पक्के रास्ते के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, तो अब इस मामले का स्थायी समाधान होना चाहिए।

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