श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026: गुरु-चंद्रमा की दिव्य स्थिति के बीच मथुरा में जन्माष्टमी की भव्य तैयारी

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रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज 

मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। रक्षाबंधन के बाद अब प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं का पूरा ध्यान जन्माष्टमी पर्व की व्यवस्थाओं पर केंद्रित है। इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के बीच मनाए जाने की बात ज्योतिषाचार्यों ने कही है। उच्च राशि में स्थित बृहस्पति और चंद्रमा की स्थिति को धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जा रहा है। ऐसे में इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

जन्मभूमि मथुरा में आयोजित होने वाले इस पर्व में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगर निगम ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा आगमन की संभावना को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।

5252 वर्ष पूर्ण कर 5253वें वर्ष में प्रवेश करेंगे श्रीकृष्ण

ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य से जुड़ी जन्माष्टमी तिथि का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण के स्कंध 12, अध्याय 2, श्लोक संख्या 33 का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य से संबंधित तिथि धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के 5252 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से अजन्मा गोविंद 5253वें वर्ष में प्रवेश करेंगे। इसलिए इस वर्ष का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व वाला माना जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा की कारागार में मध्यरात्रि के समय भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था। निशीथ बेला में वृषभ लग्न के दौरान भगवान के जन्म की यह कथा श्रीमद्भागवत सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है। यही कारण है कि जन्माष्टमी की मध्यरात्रि पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

गुरु-चंद्रमा की स्थिति से बढ़ेगा आध्यात्मिक महत्व

इस वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को लेकर भी ज्योतिषाचार्यों ने विशेष जानकारी दी है। ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के साथ नारायण प्रसाद शर्मा ने बताया कि उच्च राशि में स्थित बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, अध्यात्म और शुभता का कारक माना जाता है। वहीं चंद्रमा का संबंध मन और भावनाओं से माना गया है।

ऐसे में गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति को जन्माष्टमी के अवसर पर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक भाव को मजबूत करने वाली स्थिति के रूप में देखा जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि धार्मिक पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं का सात्विक जीवन और पूजा-अर्चना में मन लगाना सकारात्मक आध्यात्मिक वातावरण तैयार करता है।

इसके साथ ही शनि ग्रह के वक्र गति में रहने और भाद्रपद मास में पांच शनिवार पड़ने का भी उल्लेख ज्योतिषाचार्यों ने किया है। उनके अनुसार जन्माष्टमी जैसे पवित्र पर्व पर श्रद्धालुओं को सात्विक जीवनशैली अपनाने, धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में मन लगाने का प्रयास करना चाहिए।

उपवास और मध्यरात्रि पूजा का विशेष महत्व

जन्माष्टमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के लिए व्रत रखते हैं। दिनभर उपवास के बाद मध्यरात्रि में भगवान के प्राकट्य के समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिरों में भगवान के बाल स्वरूप का श्रृंगार किया जाता है और धार्मिक विधि-विधान के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता के अनुसार श्रद्धालु जन्माष्टमी के दिन उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद मध्यरात्रि में उनके प्राकट्य के समय विधि-विधान से जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मंदिरों में भजन, कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बनाने की तैयारी की जा रही है।

मथुरा में श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का पर्व हर वर्ष देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहता है। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

रक्षाबंधन के बाद अब प्रशासन का फोकस पार्किंग, यातायात, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर है। इसके अलावा शहर की साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाओं को भी बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है।

श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते हुए प्रमुख मार्गों और धार्मिक स्थलों के आसपास व्यवस्थाओं को व्यवस्थित किया जा रहा है। वहीं, यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार डायवर्जन की व्यवस्था भी की जाएगी। पुलिस प्रशासन द्वारा भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

मंदिरों और शहर को सजाने-संवारने का काम तेज

श्रीकृष्ण जन्मभूमि सहित मथुरा के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों को सजाने-संवारने का काम शुरू हो चुका है। शहर के प्रमुख मार्गों और धार्मिक क्षेत्रों में साफ-सफाई तथा सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

ब्रज तीर्थ विकास परिषद, जिला प्रशासन और नगर निगम के स्तर से श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही धार्मिक स्थलों के आसपास प्रकाश व्यवस्था, पेयजल और स्वच्छता जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।

दरअसल, जन्माष्टमी के दौरान मथुरा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में प्रशासन के सामने एक ओर धार्मिक आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर शहर में यातायात और नागरिक सुविधाओं को सामान्य बनाए रखने की चुनौती भी रहती है।

मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को लेकर भी तैयारी

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मथुरा आगमन की संभावना को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि कार्यक्रम को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित स्तर से स्पष्ट होने के बाद ही पूरी जानकारी सामने आएगी।

मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं, जन्मभूमि परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर भी संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है।

आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र है मथुरा

मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के रूप में देश-दुनिया में विशेष धार्मिक पहचान प्राप्त है। जन्माष्टमी के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मभूमि के साथ-साथ वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल और अन्य ब्रज क्षेत्रों में भी धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हैं।

इस कारण जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि ब्रज क्षेत्र के लिए पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण अवसर बन जाता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा बेहतर व्यवस्थाएं किए जाने से आयोजन को सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।

सौरभ शास्त्री, ऋषभ देव और प्रियांशु के अनुसार जन्मभूमि मथुरा में मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्मोत्सव दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर इस पावन अवसर का साक्षी बनना श्रद्धालुओं के लिए विशेष सौभाग्य माना जाता है।

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