कानपुर में युवक ने पत्नी और फिरोजाबाद पुलिस पर लगाए यह गंभीर आरोप – पढ़िए आखिरकार क्या है पूरा माजरा
रिपोर्ट – विवेक कृष्ण दीक्षित
कानपुर: सेन थाना क्षेत्र की आजाद नगर चौकी इलाके से एक युवक ने अपनी पत्नी और फिरोजाबाद पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित अर्चित यादव का दावा है कि उसकी पत्नी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ कानपुर पहुंची और उसे जबरन कार में बैठाकर फिरोजाबाद ले जाया गया। युवक ने रास्ते में उसके साथ मारपीट और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। मामले में पीड़ित ने कानपुर के डीसीपी साउथ से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित के आरोप सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और युवक को कानपुर से ले जाने की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, परिजनों ने भी मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि युवक के शरीर पर चोटों के निशान दिखाई दे रहे थे, लेकिन इसके बावजूद मेडिकल जांच नहीं कराई गई।
पत्नी के साथ पुलिसकर्मियों के पहुंचने का दावा
अर्चित यादव के अनुसार, वह कानपुर के सेन थाना क्षेत्र में मौजूद था। इसी दौरान उसकी पत्नी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुंची। पीड़ित का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे बातचीत के लिए बुलाने के बजाय जबरन कार में बैठा लिया।
अर्चित का कहना है कि उसे यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि उसे किस मामले में और किस आधार पर अपने साथ ले जाया जा रहा है। इसके बाद उसे कार से फिरोजाबाद की ओर ले जाया गया।
पीड़ित के मुताबिक, रास्ते में उसके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। उसने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसे धमकाया और एक सुनसान स्थान पर ले जाकर पिस्टल दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले में पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बेहोशी के बाद लॉकअप में होश आने का दावा
अर्चित यादव का दावा है कि कथित मारपीट के दौरान वह बेहोश हो गया था। उसका कहना है कि जब उसे होश आया तो वह खुद को थाने के लॉकअप में पाया।
इस दावे के सामने आने के बाद परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि युवक को किसी मामले में कानूनी कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया था, तो इसकी प्रक्रिया और परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए।
परिजनों के अनुसार, युवक के शरीर पर चोटों के निशान थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चोटों के बावजूद उसका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। अब परिवार चाहता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
वीडियो वायरल होने के बाद उठे सवाल
मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी सामने आई है। वीडियो को लेकर पुलिस की कार्रवाई और युवक को ले जाने की परिस्थितियों पर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसकी पूरी पृष्ठभूमि स्पष्ट नहीं है। इसलिए वीडियो में दिखाई देने वाली परिस्थितियों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया था तथा उसमें दिखाई दे रही घटनाओं का इस मामले से क्या संबंध है।
डीसीपी साउथ से लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित अर्चित यादव ने कानपुर के डीसीपी साउथ से मामले में शिकायत कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उसने आरोपों की जांच के साथ-साथ संबंधित पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की मांग रखी है।
पीड़ित का कहना है कि यदि उसे कानूनी कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया था, तो पूरी प्रक्रिया नियमानुसार होनी चाहिए थी। वहीं, यदि उसके साथ मारपीट या धमकी जैसी कोई घटना हुई है तो उसकी भी जांच आवश्यक है।
परिजनों ने भी पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद अभी तक उन्हें अपेक्षित कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।
कानूनी प्रक्रिया और जांच से सामने आएगी सच्चाई
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल युवक को कानपुर से फिरोजाबाद ले जाने की परिस्थितियों को लेकर है। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि संबंधित पुलिसकर्मी किस मामले में कार्रवाई के लिए कानपुर पहुंचे थे और युवक को हिरासत में लेने की प्रक्रिया क्या थी।
इसके अलावा, पीड़ित द्वारा लगाए गए मारपीट, धमकी और मेडिकल नहीं कराने के आरोपों की भी जांच जरूरी है। यदि मामले में कोई वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, शिकायत या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं तो उनकी जांच से घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने और उसके साथ व्यवहार की प्रक्रिया निर्धारित होती है। इसलिए शिकायत के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि आरोपों की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए।
परिवार को निष्पक्ष जांच की उम्मीद
अर्चित यादव के परिजनों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या विभाग पर बिना जांच के आरोप लगाना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराना है। परिवार चाहता है कि युवक को कथित रूप से ले जाने से लेकर थाने में पहुंचने तक की पूरी घटना की जांच हो।
वहीं, पीड़ित की ओर से डीसीपी साउथ से की गई शिकायत के बाद अब पुलिस अधिकारियों की जांच और कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल, यह मामला युवक की शिकायत और उसके परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। पुलिस की ओर से जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम वास्तव में किस तरह हुआ और इसमें किसकी क्या भूमिका रही। ऐसे में मामले से जुड़े सभी पक्षों का बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

