नेपाल में भूस्खलन से बनी 2 झीलों का खतरा बरकरार, 2500 लापता-320 भारतीय भी शामिल
Digital UP News Desk
नेपाल-चीन सीमा पर बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता अब भूस्खलन से बनी दो नई झीलों को लेकर है। इन झीलों में पानी का स्तर और उनकी स्थिरता लगातार निगरानी में रखी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, एक झील से पानी बाहर निकलना शुरू हो गया है।
जबकि दूसरी झील को लेकर भी विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में दोबारा बाढ़ या मलबे के बहाव का खतरा बना हुआ है।
भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई इलाकों तक पहुंचना अब भी चुनौती
26 अगस्त को नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने के बाद अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया था। इस फ्लैश फ्लड ने रास्ते में आने वाले घरों, पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया।
राहत और बचाव अभियान के बावजूद दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई इलाकों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है।
दो नई झीलों ने बढ़ाई चिंता
इस प्राकृतिक आपदा के बाद भूस्खलन से दो झीलें बनने की जानकारी सामने आई है। इनमें से एक झील का पानी बाहर निकलना शुरू हो चुका है। इसके कारण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पानी के साथ मलबा और चट्टानें नीचे की ओर आने की आशंका बनी रहती है।
दूसरी झील को लेकर भी विशेष निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उसका प्राकृतिक बांध कमजोर हुआ और अचानक टूट गया तो नीचे के इलाकों में तेज पानी और मलबे का नया बहाव आ सकता है। CNN की रिपोर्ट में भी दो नई बनी झीलों को लेकर चिंता जताई गई थी और एक झील के ओवरफ्लो होने की जानकारी सामने आई थी।
इस स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव दलों को संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेष रूप से नदी घाटियों और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
हजारों लोग अब भी लापता
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल तथा तिब्बत में बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है। आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं और अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर भी देखने को मिल रहा है। 29 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में मौतों की संख्या 626 तक पहुंच गई थी, जबकि नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में करीब 3,000 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई।
वहीं, पहले के अपडेट में करीब 2,500 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें लगभग 320 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए थे। भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है।
खासकर कैलाश-मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोगों और सीमा क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए प्रयास जारी हैं। इसके अलावा तिब्बत में भी सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना है। दोनों देशों की एजेंसियां अपने-अपने क्षेत्रों में तलाश और राहत अभियान चला रही हैं।
80 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें प्रभावित
आपदा का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं है। नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के अनुसार दर्जनों पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त या बह गई हैं। इससे प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने और बचाव दलों को भेजने में कठिनाई हो रही है।
नेपाल-चीन सीमा का यह क्षेत्र व्यापार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सीमा के पास मौजूद सड़क और पुल नेपाल को चीन से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके क्षतिग्रस्त होने से सामान की आवाजाही और स्थानीय कारोबार पर असर पड़ सकता है।
इससे पहले भी प्राकृतिक आपदाओं के कारण हिमालयी क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती रही है। हालांकि इस बार नुकसान का स्तर काफी व्यापक बताया जा रहा है।
राहत और बचाव अभियान जारी
बाढ़ के बाद नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नेपाली सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से भी बचाव अभियान चलाया गया है।
अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि खराब मौसम, भूस्खलन, मलबे और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण बचाव अभियान में लगातार चुनौतियां आ रही हैं। कई स्थानों पर संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
इसके अलावा कुछ संवेदनशील स्थानों पर सुरंगों और जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों को निकालना भी राहत एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहा है।
हजारों परिवारों को भोजन और साफ पानी की जरूरत
आपदा के बाद बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस के अनुसार हजारों लोगों को तत्काल सहायता की आवश्यकता है। प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पीने का साफ पानी, चिकित्सा सहायता और अस्थायी आश्रय की जरूरत बनी हुई है।
ऐसे में राहत सामग्री को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना सरकार और राहत एजेंसियों के लिए प्राथमिकता बन गया है। सड़क संपर्क टूटने की वजह से कुछ स्थानों पर हवाई मार्ग से सहायता पहुंचाने की जरूरत पड़ रही है।
भारत समेत कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में आई इस बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहायता की पेशकश की गई है। भारत ने राहत सामग्री उपलब्ध कराने और तकनीकी सहायता देने की पेशकश की है। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ समेत कई देशों की ओर से सहायता की घोषणा की गई है।
नेपाल ने सामान्य खोज एवं बचाव सहायता के बजाय कुछ विशेष तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई है। इनमें जटिल स्थानों पर बचाव, परिवहन और संचार व्यवस्था बहाल करना, डीएनए परीक्षण और फोरेंसिक सेवाएं जैसी जरूरतें शामिल हैं।
नेपाल की अर्थव्यवस्था पर भी असर
बाढ़ और भूस्खलन का असर नेपाल की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। सीमा क्षेत्र में व्यापारिक मार्गों, सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से सामान की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र भी इस आपदा से प्रभावित हो सकता है। हिमालयी क्षेत्र नेपाल के पर्यटन और धार्मिक यात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है।
विशेषज्ञों की नजर झीलों पर
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण चुनौती नई बनी झीलों की निगरानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्राकृतिक जलाशयों की स्थिति में अचानक बदलाव आने पर निचले क्षेत्रों में खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए प्रभावित इलाकों में प्रशासन को लगातार निगरानी बनाए रखने और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की जरूरत है। वहीं, राहत एवं बचाव दलों के लिए भी सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
बचाव कार्य तेज
नेपाल-चीन सीमा पर आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर जनजीवन और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है। हालांकि राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन भूस्खलन से बनी दो झीलों के कारण खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
मौतों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं। ऐसे में प्रभावित परिवार अपने परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन, सुरक्षा बल और राहत एजेंसियां बचाव कार्य तेज करने के साथ-साथ संभावित दूसरी बाढ़ के खतरे पर भी नजर बनाए हुए हैं।

