नोएडा में स्वाइन फ्लू के 192 मरीज, डेंगू के 48 केस, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की इमरजेंसी एडवाइजरी

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Digital UP News Desk

नोएडा: गौतमबुद्ध नगर जिले में स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के 192 मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि डेंगू के 48 मामलों की पुष्टि हुई है। मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी इमरजेंसी एडवाइजरी में अस्पतालों को स्वाइन फ्लू और डेंगू के संदिग्ध मरीजों की पहचान को लेकर सतर्क रहने के लिए कहा गया है। साथ ही ऐसे मरीजों की समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। विभाग का कहना है कि बदलते मौसम में वायरल संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए निगरानी और बचाव के उपायों को मजबूत करना जरूरी है।

स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 192 पहुंची

गौतमबुद्ध नगर में स्वाइन फ्लू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में 192 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इसे देखते हुए अस्पतालों को संदिग्ध मरीजों की पहचान और चिकित्सकीय जांच में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

अस्पतालों में आने वाले ऐसे मरीज, जिनमें तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, बदन दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनकी प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सकीय जांच करने को कहा गया है। इसके अलावा मरीज की स्थिति के अनुसार आगे की जांच और उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को भी संदिग्ध मरीजों के उपचार के दौरान संक्रमण से बचाव के जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है। इससे अस्पतालों में संक्रमण के प्रसार की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है।

गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन से गंभीर लक्षण वाले मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा है। यदि किसी मरीज की हालत में सुधार नहीं होता या उसे उच्च चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता होती है, तो उसे समय रहते बेहतर चिकित्सा केंद्र पर रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, जांच सुविधाओं और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि मरीजों को जरूरत के मुताबिक समय पर उपचार मिल सके और किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

दरअसल, स्वाइन फ्लू जैसे संक्रमण में शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे दिखाई दे सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।

डेंगू के भी 48 मामले सामने आए

स्वाइन फ्लू के साथ-साथ जिले में डेंगू के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब तक 48 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद विभाग ने मच्छरों की रोकथाम और लार्वा नियंत्रण गतिविधियों को तेज करने की तैयारी की है।

डेंगू का प्रसार मुख्य रूप से मच्छरों के जरिए होता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीमें उन स्थानों का निरीक्षण कर रही हैं, जहां पानी जमा होने की वजह से मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है। इसके अलावा लोगों को भी अपने घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डेंगू से बचाव के लिए घरों के आसपास साफ-सफाई रखना और पानी जमा होने वाले स्थानों की नियमित जांच करना महत्वपूर्ण है। कूलर, गमले, छतों और अन्य कंटेनरों में जमा पानी को समय-समय पर हटाने की सलाह दी जा रही है।

लार्वा नियंत्रण पर बढ़ाया जाएगा जोर

डेंगू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग मच्छरों के लार्वा की पहचान और नियंत्रण के लिए अभियान को तेज करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण किया जा रहा है। जहां भी पानी जमा मिलता है, वहां आवश्यक कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।

इसके अलावा स्थानीय स्तर पर लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। क्योंकि छोटे स्तर पर जमा पानी भी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। इसलिए नियमित सफाई और पानी की निकासी डेंगू की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

बदलते मौसम में सावधानी जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। ऐसे में लोगों को अपनी सेहत को लेकर सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आवश्यकता के अनुसार सावधानी बरतना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना तथा हाथों की स्वच्छता बनाए रखना उपयोगी हो सकता है।

वहीं, यदि किसी व्यक्ति को बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे अपनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। लक्षण लगातार बने रहने या बढ़ने की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

खास तौर पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं लेने से बचने की सलाह दी गई है। अलग-अलग बीमारियों के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, इसलिए सही जांच के बाद ही उपचार की दिशा तय करना उचित रहता है।

अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता पर जोर

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि मरीजों की जांच और उपचार में किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए जरूरी दवाओं, जांच सुविधाओं और अन्य चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

इसके साथ ही अस्पतालों से मरीजों से संबंधित जानकारी नियमित रूप से जुटाई जा रही है। इससे स्वास्थ्य विभाग को जिले में स्वाइन फ्लू और डेंगू की स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर जरूरत के अनुसार आगे की रणनीति तैयार की जा सकती है।

लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील

स्वाइन फ्लू के 192 और डेंगू के 48 मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग का कहना है कि बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण है।

इसलिए लोगों को अपने आसपास साफ-सफाई रखने, मच्छरों के प्रजनन वाले स्थानों को खत्म करने और संक्रमण से बचाव के सामान्य उपाय अपनाने चाहिए। साथ ही बुखार या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर स्थिति को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

कुल मिलाकर, गौतमबुद्ध नगर में स्वाइन फ्लू और डेंगू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं डेंगू की रोकथाम के लिए मच्छर नियंत्रण गतिविधियों पर भी जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की अपील है कि लोग जागरूक रहें, साफ-सफाई का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें।

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