राहुल गांधी का BJP-RSS पर हमला, बोले संविधान और संघ की विचारधारा के बीच जारी है लड़ाई
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा। उन्होंने देश में दलितों के साथ कथित भेदभाव और अत्याचार के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भारत में आज भी दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष जारी है। राहुल गांधी के मुताबिक, एक तरफ संविधान के मूल्यों की विचारधारा है, जबकि दूसरी तरफ आरएसएस की विचारधारा है।
राहुल गांधी ने कहा कि संविधान समानता, अधिकार और सामाजिक न्याय की बात करता है। इसके विपरीत, उनके आरोप के मुताबिक, देश में ऐसी सोच भी मौजूद है जो दलितों और कमजोर वर्गों को बराबरी का अधिकार मिलने में बाधा पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि देश के भविष्य और संविधान की मूल भावना से भी जुड़ी हुई है।
दलितों के मुद्दे पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने दलित समुदाय के साथ होने वाले कथित भेदभाव का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दशकों से दलितों के साथ भेदभाव की घटनाएं सामने आती रही हैं और उनके अनुसार यह समस्या आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर चाय की दुकानों में दलितों के लिए अलग कप रखने जैसी घटनाएं अभी भी सामने आती हैं। इसी तरह, उन्होंने शादी समारोहों में दलित दूल्हे के घोड़े पर बैठने को लेकर विवाद और मारपीट की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने स्कूलों में दलित बच्चों से सफाई कराए जाने के आरोप भी लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि सामाजिक बराबरी केवल कानून बनाने से हासिल नहीं होगी, बल्कि समाज की सोच में भी बदलाव जरूरी है।
उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि दलितों के आगे बढ़ने और सफल होने पर उनके खिलाफ दबाव बढ़ जाता है। राहुल गांधी ने कहा कि जितना कोई दलित व्यक्ति सफल होता है, उनके अनुसार उतना ही बड़ा राजनीतिक और सामाजिक प्रहार उसके खिलाफ किया जाता है।
हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों पर बीजेपी की ओर से अलग-अलग मौकों पर कांग्रेस और राहुल गांधी के दावों को खारिज किया जाता रहा है। ऐसे में इस मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
संविधान बनाम संघ की विचारधारा का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में संविधान को केंद्र में रखते हुए कहा कि देश में संविधान और आरएसएस की विचारधारा के बीच लड़ाई चल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान में दिए गए समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी।
उन्होंने कहा कि संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, सामाजिक स्थिति या अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस लगातार सामाजिक न्याय, जातिगत जनगणना और संविधान की रक्षा को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख मुद्दा बना रही है। पार्टी की ओर से बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।
खरगे की हल्द्वानी सभा का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े हल्द्वानी के एक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 8 अगस्त 2026 को मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था।
राहुल गांधी के अनुसार, इसके दो दिन बाद श्री राम सेना के सदस्यों ने कथित तौर पर उसी स्थान पर ‘शुद्धिकरण हवन’ किया। उन्होंने इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष की सभा के बाद इस तरह का आयोजन किया जाना गंभीर विषय है।
राहुल गांधी ने मांग की कि कथित रूप से शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को न्याय मिलना चाहिए।
हालांकि, इस घटनाक्रम से जुड़े आरोपों और स्थानीय स्तर पर सामने आए तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोपों को संबंधित पक्षों के जवाब के साथ देखना महत्वपूर्ण है।
सामाजिक न्याय को लेकर कांग्रेस का रुख
कांग्रेस लंबे समय से दलितों, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता से उठाती रही है। राहुल गांधी भी अपने विभिन्न भाषणों में सामाजिक न्याय और समान अवसर की बात करते रहे हैं।
उनका कहना है कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ तब पूरा होता है, जब समाज के हर वर्ग को सम्मान, अधिकार और अवसर मिले।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में संविधान को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों से सामाजिक समानता के लिए आवाज उठाने की अपील भी की।
BJP और RSS पर लगातार हमलावर हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी पिछले कुछ समय से बीजेपी और आरएसएस पर लगातार वैचारिक हमले कर रहे हैं। उनके भाषणों में संविधान, सामाजिक न्याय, आरक्षण और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
वहीं, बीजेपी की ओर से कांग्रेस पर राजनीतिक ध्रुवीकरण करने और समाज को जाति के आधार पर बांटने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। बीजेपी नेताओं का तर्क रहा है कि सरकार ने गरीब, पिछड़े और दलित वर्गों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।
इस तरह दोनों प्रमुख राजनीतिक धाराओं के बीच संविधान, सामाजिक न्याय और आरएसएस की भूमिका को लेकर बहस लगातार तेज होती दिखाई दे रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है राहुल गांधी का बयान?
राहुल गांधी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने दलितों से जुड़े सामाजिक मुद्दों को सीधे संविधान और वैचारिक संघर्ष से जोड़ दिया है। इससे आने वाले समय में सामाजिक न्याय और संविधान का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में और अधिक मजबूती से आ सकता है।
इसके अलावा, हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण हवन’ का मुद्दा भी कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। राहुल गांधी ने इस मामले में कार्रवाई की मांग करके स्पष्ट किया है कि कांग्रेस इस घटना को केवल स्थानीय विवाद के रूप में नहीं, बल्कि सम्मान और सामाजिक बराबरी के प्रश्न के रूप में देख रही है।
संविधान और की विचारधारा के बीच संघर्ष
फिलहाल, राहुल गांधी के आरोपों और मांगों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आना तय माना जा रहा है। आने वाले दिनों में बीजेपी और आरएसएस की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया आने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।
राहुल गांधी ने एक बार फिर संविधान, सामाजिक न्याय और दलित अधिकारों के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश में संविधान की विचारधारा और आरएसएस की विचारधारा के बीच संघर्ष जारी है। साथ ही, उन्होंने दलितों के साथ कथित भेदभाव की घटनाओं और हल्द्वानी में खरगे की सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण हवन’ का मुद्दा उठाते हुए कार्रवाई और न्याय की मांग की है।

