कानपुर में EPFO का EEC-2026 अभियान लागू, 1,160 प्रतिष्ठानों को भेजे पत्र; पात्र कर्मचारियों के नामांकन पर जोर

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रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा 

कानपुर: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के क्षेत्रीय कार्यालय कानपुर ने कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 यानी EEC-2026 को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे पात्र कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है, जो किसी कारणवश EPFO कवरेज से बाहर रह गए हैं, जबकि वर्तमान में प्रतिष्ठानों में कार्यरत हैं।

इसी क्रम में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I शाहिद इकबाल ने विभिन्न प्रतिष्ठानों के कर्मचारी रेमिटेंस और चालानों की स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में पूर्व की तुलना में चालानों में दर्शाए गए कर्मचारियों की संख्या कम पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों की स्थिति की समीक्षा कर कर्मचारी कवरेज में आई कमी को दूर करने के निर्देश दिए गए।

1,160 प्रतिष्ठानों को भेजे गए पत्र

EPFO क्षेत्रीय कार्यालय, कानपुर की ओर से अभियान के तहत कुल 1,160 प्रतिष्ठानों को पत्र जारी किए गए हैं। इन पत्रों के माध्यम से प्रतिष्ठानों को अपने वर्तमान कर्मचारी रेमिटेंस और चालानों की स्थिति की समीक्षा करने के लिए कहा गया है।

इसके साथ ही, यदि कोई पात्र कर्मचारी वर्तमान में प्रतिष्ठान में कार्यरत है लेकिन किसी कारणवश EPFO कवरेज से बाहर रह गया है, तो उसे सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में अभियान का उद्देश्य पात्र कर्मचारियों की कवरेज में आई कमी को पहचानना और नियमानुसार उनका नामांकन सुनिश्चित करना है।

औद्योगिक क्षेत्रों और क्लस्टरों पर विशेष ध्यान

EPFO की ओर से जारी किए गए पत्र विभिन्न औद्योगिक क्लस्टरों और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित प्रतिष्ठानों को भेजे गए हैं। इनमें उन्नाव का लेदर क्लस्टर, पनकी-दादानगर, रूमा, जाजमऊ, कानपुर देहात, फतेहपुर औद्योगिक क्षेत्र और झांसी समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां और प्रतिष्ठान संचालित होते हैं। ऐसे में EPFO का प्रयास है कि इन संस्थानों में कार्यरत पात्र कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाए।

साथ ही, जिन कर्मचारियों का नाम किसी कारणवश EPFO कवरेज में शामिल नहीं हो पाया है, उन्हें अभियान के निर्धारित प्रावधानों के तहत सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जा सके।

कर्मचारी कवरेज में कमी की समीक्षा

क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I शाहिद इकबाल की समीक्षा में कुछ प्रतिष्ठानों के चालानों में कर्मचारियों की संख्या पहले की तुलना में कम पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों को अपनी कर्मचारी स्थिति की दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।

EPFO की ओर से प्रतिष्ठानों को यह देखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि वर्तमान में कार्यरत सभी पात्र कर्मचारी नियमानुसार सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हैं या नहीं।

इस प्रक्रिया के जरिए न केवल कर्मचारी कवरेज को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि प्रतिष्ठानों को स्वैच्छिक अनुपालन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

EEC-2026 में विशेष प्रावधान

अभियान के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों और शर्तों के अधीन कर्मचारी अंशदान से संबंधित विशेष छूट का लाभ उपलब्ध है। निर्धारित शर्तों के तहत कुछ पात्र मामलों में कर्मचारी अंशदान की वसूली से छूट का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, अभियान के तहत संबंधित नियमों और निर्धारित शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा। नियोक्ता को नियमानुसार अपना अंशदान, देय ब्याज तथा 100 रुपये प्रशासनिक प्रभार का भुगतान करना होगा।

इस व्यवस्था के माध्यम से प्रतिष्ठानों को ऐसे कर्मचारियों को EPFO सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने का अवसर मिल रहा है, जो पूर्व में किसी कारणवश कवरेज से बाहर रह गए थे।

नियोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर

EPFO के अनुसार, EEC-2026 प्रतिष्ठानों के लिए अपने कर्मचारी रिकॉर्ड की समीक्षा करने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रतिष्ठान अपने यहां कार्यरत कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति की जांच कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई भी पात्र कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित न रहे।

इसके अलावा, अभियान से कर्मचारी कवरेज में सामने आने वाली विसंगतियों को दूर करने में भी सहायता मिल सकती है।

EPFO का जोर इस बात पर है कि प्रतिष्ठान अपने वर्तमान कर्मचारी रेमिटेंस और चालानों की नियमित समीक्षा करें। यदि रिकॉर्ड में कर्मचारियों की संख्या में कमी दिखाई देती है, तो उसके कारणों की जांच कर आवश्यक सुधार किया जाए।

प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की भी अहम भूमिका

EEC-2026 अभियान में प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। EPFO क्षेत्रीय कार्यालय, कानपुर की ओर से प्रिंसिपल एम्प्लॉयर को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

विशेष रूप से नगर निगम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी और अन्य प्रिंसिपल एम्प्लॉयर अपने अधीन आने वाले संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं।

कई संस्थानों में कर्मचारी सीधे विभाग के बजाय ठेकेदारों के माध्यम से कार्यरत होते हैं। ऐसे में प्रिंसिपल एम्प्लॉयर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त कोई भी पात्र कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर न रह जाए।

ठेकेदारों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों पर भी नजर

प्रिंसिपल एम्प्लॉयर अपने यहां कार्यरत ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों की जानकारी की समीक्षा कर सकते हैं। यदि किसी पात्र कर्मचारी का नाम EPFO कवरेज से छूटा हुआ पाया जाता है, तो EEC-2026 के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार उसके नामांकन की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

इससे ठेका व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने में मदद मिलेगी।

स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने की कोशिश

EPFO क्षेत्रीय कार्यालय, कानपुर की इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रतिष्ठानों में स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रतिष्ठानों को पत्र भेजकर उनकी मौजूदा कर्मचारी स्थिति की समीक्षा करने और पात्र कर्मचारियों को कवरेज में शामिल करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

अभियान के जरिए EPFO यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ उन सभी कर्मचारियों तक पहुंचे, जो निर्धारित नियमों के अनुसार इसके पात्र हैं।

कर्मचारियों के हित में अभियान

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था कर्मचारियों के लिए भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसलिए पात्र कर्मचारियों का EPFO के दायरे में होना उनके हित में महत्वपूर्ण माना जाता है।

EEC-2026 के तहत प्रतिष्ठानों को अपनी कर्मचारी सूची और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा करने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, प्रिंसिपल एम्प्लॉयर और ठेकेदारों की भूमिका को भी अभियान में शामिल किया गया है।

कुल मिलाकर, कानपुर क्षेत्र में 1,160 प्रतिष्ठानों को पत्र भेजकर EPFO ने कर्मचारी कवरेज बढ़ाने की दिशा में पहल की है। अब संबंधित प्रतिष्ठानों की ओर से रिकॉर्ड की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने पात्र कर्मचारियों को अभियान के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जाता है।

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