प्रतापगढ़ में SDM की बेटी को लगाया एक्सपायरी इंजेक्शन, CHC लालगंज में दो फार्मासिस्ट और स्टोर प्रभारी निलंबित
Digital UP News Desk
प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का मामला सामने आया है। लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में इलाज कराने पहुंची उपजिलाधिकारी (SDM) की 8 वर्षीय बेटी को कथित तौर पर एक्सपायरी पैरासिटामोल इंजेक्शन लगाए जाने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए संबंधित मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया है। इसके साथ ही दो फार्मासिस्ट और स्टोर प्रभारी को निलंबित किया गया है।
बताया जा रहा है कि लालगंज के एसडीएम वाचस्पति सिंह अपनी 8 वर्षीय बेटी को बुखार होने पर इलाज के लिए CHC लालगंज लेकर पहुंचे थे। चिकित्सकीय जांच के बाद बच्ची को पैरासिटामोल का इंजेक्शन लगाए जाने की बात सामने आई। हालांकि, बाद में इंजेक्शन की एक्सपायरी डेट को लेकर सवाल खड़े हुए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बच्ची को जो पैरासिटामोल इंजेक्शन लगाया गया, उसकी एक्सपायरी जून 2026 में हो चुकी थी।
शिकायत के बाद सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, बच्ची को बुखार की शिकायत के बाद परिजन उसे CHC लालगंज लेकर पहुंचे थे। वहां उपचार के दौरान उसे पैरासिटामोल इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद इंजेक्शन की पैकिंग और उसकी वैधता को लेकर मामला सामने आया।
एसडीएम वाचस्पति सिंह ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायत दी। उन्होंने मामले की जानकारी जिलाधिकारी (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को दी। शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच की प्रक्रिया शुरू की।
प्राथमिक स्तर पर सामने आई जानकारी के आधार पर मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया। साथ ही संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।
दो फार्मासिस्ट निलंबित
मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो फार्मासिस्ट को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि इन्हीं में से एक फार्मासिस्ट ने बच्ची को पैरासिटामोल इंजेक्शन लगाया था।
इंजेक्शन लगाने वाले फार्मासिस्ट देव कुमार दूबे को निलंबित किया गया है। इसके अलावा मेडिकल स्टोर के प्रभारी अरविंद कुमार शुक्ला के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद CHC लालगंज में दवाओं के रखरखाव और मरीजों को दवा देने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पूरे मामले की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एक्सपायरी दवा मरीज तक किस स्तर पर पहुंची और इसमें किसकी जिम्मेदारी थी।
मेडिकल स्टोर किया गया सील
शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित मेडिकल स्टोर को सील कर दिया है। इसका उद्देश्य स्टोर में मौजूद दवाओं के स्टॉक की जांच करना और यह पता लगाना है कि कहीं अन्य एक्सपायरी दवाएं भी तो मरीजों को उपलब्ध नहीं कराई गईं।
स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की वैधता की नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी दवा को मरीज को देने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और स्टोरेज की स्थिति की जांच की जाती है। ऐसे में यदि किसी मरीज को एक्सपायरी दवा उपलब्ध कराए जाने की पुष्टि होती है तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर लापरवाही मानी जा सकती है।
डीएम और सीएमओ से की गई शिकायत
एसडीएम की ओर से मामले की शिकायत जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटाई और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई कार्रवाई में मेडिकल स्टोर को सील करने के साथ ही संबंधित कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि विभाग ने शिकायत को गंभीरता से लिया है।
हालांकि, अभी यह भी महत्वपूर्ण है कि विभागीय जांच में पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही यह पता लगाया जाए कि संबंधित इंजेक्शन स्टोर में किस प्रक्रिया के तहत रखा गया था और उसकी एक्सपायरी डेट की जांच क्यों नहीं की गई।
दवाओं की जांच और रिकॉर्ड की भूमिका अहम
अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं के स्टॉक का रिकॉर्ड रखा जाता है। इसमें दवा की खरीद, उपलब्ध मात्रा, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और वितरण से संबंधित जानकारी शामिल होती है। इसके अलावा एक्सपायरी के करीब पहुंच रही दवाओं को अलग करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्वास्थ्य संस्थानों में दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए स्टॉक की नियमित निगरानी जरूरी है। यदि किसी दवा की वैधता समाप्त हो जाती है तो उसे मरीजों के उपयोग से अलग रखना चाहिए।
लालगंज CHC के मामले में भी अब यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि संबंधित पैरासिटामोल इंजेक्शन का स्टॉक कब प्राप्त हुआ था और उसकी एक्सपायरी डेट की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।
बच्ची की स्थिति पर भी नजर
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू 8 वर्षीय बच्ची का स्वास्थ्य है। उसे बुखार की शिकायत के बाद CHC लाया गया था। इसके बाद कथित तौर पर उसे पैरासिटामोल इंजेक्शन लगाया गया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर बच्ची की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में किसी तरह के स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। विभागीय जांच के साथ बच्ची की चिकित्सकीय स्थिति पर भी नजर रखी जानी जरूरी है।
स्वास्थ्य केंद्रों में लापरवाही रोकने की चुनौती
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दवाओं के सुरक्षित भंडारण और वितरण की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एक छोटी सी लापरवाही भी मरीजों और उनके परिवारों के लिए चिंता का कारण बन सकती है।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि CHC और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की एक्सपायरी डेट की नियमित जांच हो। इसके अलावा मेडिकल स्टोर के स्टॉक की निगरानी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए।

