रक्षाबंधन पर अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- भाजपा हटेगी तो खत्म होंगे सभी संकट
रिपोर्ट – रोहित सिंह चौहान
सैफई: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रक्षाबंधन के अवसर पर सैफई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने प्रदेश और देश के मौजूदा राजनीतिक एवं आर्थिक हालात को लेकर भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में अभी से जुटने की अपील की।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके मुताबिक देश में मौजूदा समय में सबसे बड़ा संकट भारतीय जनता पार्टी है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के सत्ता से हटने के बाद कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने महंगाई, किसानों की समस्याओं, जेपीएनआईसी और भाजपा की नीतियों सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।
‘भाजपा हटेगी तो खत्म होंगे सभी संकट’
रक्षाबंधन के मौके पर सैफई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि देश में उनके अनुसार एक ही बड़ा संकट है और वह भारतीय जनता पार्टी है। उन्होंने कहा कि भाजपा के हटने के बाद सभी संकट खत्म हो जाएंगे।
उन्होंने भाजपा पर राजनीतिक रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी से अब कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि भाजपा का समय अब समाप्त होने की ओर है और आगामी चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।
उन्होंने चुनाव और चंदे को लेकर भी सवाल उठाते हुए महंगाई के मुद्दे को राजनीतिक बहस से जोड़ा। हालांकि, इन बयानों पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आना बाकी है।
JPNIC को लेकर भी साधा निशाना
अखिलेश यादव ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर यानी JPNIC को लेकर भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने JPNIC को बेच दिया।
अखिलेश ने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ था, तब पार्टी ने खुद को समाजवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए जयप्रकाश नारायण की तस्वीर का इस्तेमाल किया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग जयप्रकाश नारायण से जुड़े केंद्र को बेचने की बात कर रहे हैं, उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है।
JPNIC को लेकर समाजवादी पार्टी पहले भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाती रही है। इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी होती रही है।
किसानों के मुद्दे पर भाजपा को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने किसानों की स्थिति को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के सामने संकट पैदा करने वाली नीतियां भाजपा से जुड़ी हुई हैं।
अखिलेश यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पहले बोरी से चोरी होने की बात सामने आती थी, लेकिन अब पूरी बोरी ही चोरी हो गई। उनके इस बयान को किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने के तौर पर देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
‘भाजपा के पास नफरत के अलावा कोई काम नहीं’
अखिलेश यादव ने भाजपा पर समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास कथित तौर पर नफरत और समाज को बांटने के अलावा कोई काम नहीं है।
उन्होंने हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को लेकर भी भाजपा पर राजनीतिक हमला किया। अखिलेश ने कहा कि समाज को धर्म के आधार पर बांटने की राजनीति के बजाय विकास और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि देश में लंबे समय से विभिन्न विचारधाराओं के बीच संघर्ष चलता रहा है और आने वाले समय में इसका अंत होगा।
2027 चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं को संदेश
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं से अभी से सक्रिय होने की अपील की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भाजपा हटाओ अभियान में जुटने का आह्वान किया।
अखिलेश के इस बयान को सपा की चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार रहने का संदेश दिया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से अभी से बयानबाजी और संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
बुलडोजर कार्रवाई पर मुख्यमंत्री पर तंज
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वैसे तो बुलडोजर लेकर घूमते हैं, लेकिन कथित तौर पर बिना नक्शा पास वाले घर में चाय पीने चले गए।
इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री का बुलडोजर कहां है। अखिलेश का यह बयान मुख्यमंत्री की बुलडोजर नीति पर राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर सामने आया।
RSS को लेकर भी दिया बयान
अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संघ को ‘सुरंगवादी’ और ‘वर्चस्ववादी’ संगठन बताते हुए आरोप लगाया कि वह देश के इतिहास को बदलने की कोशिश में लगातार जुटा हुआ है।
उन्होंने कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ के बजाय देश को अपने वास्तविक इतिहास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर ध्यान देना चाहिए। अखिलेश के इस बयान पर भी राजनीतिक प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
महंगाई और चीनी के दामों पर सरकार को घेरा
बातचीत के दौरान महंगाई का मुद्दा भी उठा। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल चीनी ही नहीं, बल्कि उनके अनुसार लगभग हर चीज में महंगाई बढ़ती जा रही है।
मध्य प्रदेश के भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के उस कथित बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर कि 98 प्रतिशत लोग चीनी का सेवन नहीं करते, अखिलेश यादव ने इसे संवेदनहीनता से जोड़कर टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वाले लोग संवेदनहीनता से आगे की स्थिति में हैं और इसलिए कभी भी कुछ भी बोलते रहते हैं।
चुनाव से पहले तेज हो सकती है राजनीतिक बयानबाजी
रक्षाबंधन के अवसर पर सैफई में अखिलेश यादव की पत्रकार वार्ता में भाजपा सरकार और उसकी नीतियों पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा गया। महंगाई, किसान, JPNIC, बुलडोजर नीति, सामाजिक विभाजन और इतिहास जैसे मुद्दों को उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा बनाया।
इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी से सक्रिय होने का संदेश दिया। ऐसे में माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां आने वाले समय में और तेज हो सकती हैं।
फिलहाल अखिलेश यादव के बयानों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस को जन्म दिया है। अब देखना होगा कि भाजपा इन आरोपों और राजनीतिक टिप्पणियों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और 2027 के चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दल किस तरह अपनी रणनीति आगे बढ़ाते हैं।

